Parvati Stotram

देव उठनी एकादशी तुलसी विवाह Special भजन I Dev Uthani Ekadashi Tulsi Vivah Special Bhajans 2021 - BhaktiLok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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देव उठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह वह पावन तिथि है जब भगवान श्री हरि विष्णु चार माह की योग निद्रा से जागृत होते हैं और सृष्टि के संचालन का पुनः पूर्ण दायित्व संभालते हैं। इसी दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है, जो जीव और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। भक्तिलोक के इस विशेष लेख में हम देव उठनी एकादशी के आध्यात्मिक महत्व, तुलसी विवाह की महिमा और इस अवसर पर गाए जाने वाले भजनों के माध्यम से प्रभु के प्रति शरणागति के भाव को समझेंगे। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक जागृति का संदेश देता है, बल्कि हमारे भीतर सोई हुई भक्ति को भी जगाने का अवसर प्रदान करता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

उठो देव सांवरे, अब जागो महाराज,

कार्तिक की एकादशी, आई है आज।

तुलसी की क्यारी सजी, मंडप है तैयार,

शालिग्राम संग ब्याहने, आए हैं गिरधारी यार।

जागो-जागो हे केशव, जागो हे नारायण,

भक्तों की पुकार सुनो, करो सब का कल्याण।

दीपों की माला सजी, घर-घर हुआ उजियारा,

देव उठनी के पर्व पर, प्रभु का है सहारा।

तुलसी विवाह रचाएं, गाएं मंगल गान,

प्रभु के चरणों में अर्पित, अपना सब मान-सम्मान।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त भगवान विष्णु को 'देव उठनी एकादशी' के पावन अवसर पर निद्रा से जागने का आह्वान कर रहा है। 'उठो देव सांवरे' का अर्थ है कि हे प्रभु, अब आप अपनी योग निद्रा का त्याग करें और संसार के दुखों को दूर करने के लिए जागृत हों। तुलसी विवाह का उल्लेख यहाँ जीव (तुलसी) और परमात्मा (शालिग्राम/विष्णु) के मिलन के रूप में किया गया है। यह भजन हमें सिखाता है कि जिस प्रकार तुलसी का विवाह भगवान से होता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपना जीवन प्रभु के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। दीपों की माला और मंगल गान का अर्थ है कि जब प्रभु हृदय में जागते हैं, तो अज्ञानता का अंधकार मिट जाता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आध्यात्मिक जागृति: यह भजन साधक को अपनी अंतरात्मा को जगाने के लिए प्रेरित करता है।
  • तुलसी विवाह का उत्सव: यह भजन तुलसी और शालिग्राम के विवाह के पावन प्रसंग को भक्ति रस में पिरोता है।
  • शरणागति: भजन का मुख्य भाव प्रभु के प्रति पूर्ण समर्पण है।
  • कल्याणकारी: इस भजन के गायन से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देव उठनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान के पश्चात इस भजन का गायन करना अत्यंत फलदायी होता है। संध्या के समय तुलसी विवाह के आयोजन के दौरान इसे सामूहिक रूप से गाना चाहिए। भजन गाते समय मन में प्रभु की छवि का ध्यान करना और दीपक प्रज्वलित करना अनिवार्य है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री हरि विष्णु और माता तुलसी को समर्पित है। सनातन परंपरा में तुलसी को विष्णु प्रिया माना गया है, और उनके विवाह का प्रसंग मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक शैली में रचित है, जो सदियों से भारतीय घरों में देव उठनी एकादशी के अवसर पर गाया जाता रहा है। इसका उद्देश्य जन-जन को प्रभु की महिमा से जोड़ना है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

भजन का संदेश है कि ईश्वर कभी सोता नहीं, बल्कि वह हमारी भक्ति की प्रतीक्षा करता है। जीवन में जब हम तुलसी की भांति पवित्रता और भक्ति धारण करते हैं, तो स्वयं प्रभु हमारे जीवन में आकर 'विवाह' (मिलन) करते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
केशव भगवान विष्णु का नाम
शालिग्राम भगवान विष्णु का शिला रूप
योग निद्रा प्रभु की दिव्य निद्रा
उजियारा प्रकाश / ज्ञान

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम देव उठनी एकादशी तुलसी विवाह स्पेशल
आराध्य भगवान विष्णु एवं माता तुलसी
भाषा हिंदी
मुख्य भाव भक्ति एवं समर्पण
अवसर देव उठनी एकादशी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

देव उठनी एकादशी क्यों मनाई जाती है?

इस दिन भगवान विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागते हैं और सृष्टि का कार्यभार पुनः संभालते हैं।

तुलसी विवाह का क्या महत्व है?

तुलसी विवाह से घर में सुख-समृद्धि आती है और कन्यादान का पुण्य प्राप्त होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री विभिन्न पौराणिक ग्रंथों और लोक परंपराओं के आधार पर तैयार की गई है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री का उद्देश्य पाठकों को भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित करना है।

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स्रोत एवं संदर्भ: स्कंद पुराण, पद्म पुराण एवं वैष्णव परंपरा के लोक गीत।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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