Parvati Stotram

प्रमोद प्रेमी छठ गीत !! पेन्ही के पियरी

66 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रमोद प्रेमी यादव द्वारा स्वरबद्ध "पेन्ही के पियरी" छठ गीत लोक आस्था और सूर्य उपासना के महापर्व का एक अत्यंत भावपूर्ण और कर्णप्रिय भजन है। यह गीत न केवल छठ मैया की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि व्रती महिलाओं के उस अटूट विश्वास और समर्पण को भी दर्शाता है, जो वे चार दिनों के कठिन व्रत के दौरान अनुभव करती हैं। छठ पूजा, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में श्रद्धा के साथ मनाई जाती है, सूर्य देव और छठी मैया के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। प्रमोद प्रेमी की गायकी में निहित लोक संगीत की मिठास इस गीत को हर घर की शोभा बना देती है। यह गीत व्रतियों के मन में भक्ति का संचार करता है और उन्हें कठिन निर्जला व्रत के दौरान मानसिक संबल प्रदान करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

पेन्ही के पियरी, माई के मनाइब,
घाट पर जाईब, अरघिया चढ़ाइब।
छठी माई के महिमा अपार बा,
भक्तन के बेड़ा पार बा...

(मुखड़ा)
पेन्ही के पियरी, माई के मनाइब,
घाट पर जाईब, अरघिया चढ़ाइब।
सूपवा में ठेकुआ, दउरा में फलवा,
मैया के चरण में, झुकावे सब पलवा।
अँखिया में आस, मन में विश्वास,
छठी माई पूरी करीहें, सब के अरदास।

(अंतरा 1)
कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाए,
बहंगी घाटा पहुँचाए दे,
दर्शन होई माई के।
प्रमोद प्रेमी गावे, भक्ति के तराना,
छठी माई के महिमा, सब के सुनाना।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस गीत का भावार्थ अत्यंत गहरा है। "पेन्ही के पियरी" का अर्थ है पीले वस्त्र धारण करके छठी मैया की आराधना करना। पीला रंग सनातन धर्म में शुभता, सात्विकता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। गीत में भक्त कहता है कि वह पूरी श्रद्धा के साथ घाट पर जाकर सूर्य देव और छठी मैया को अर्घ्य अर्पित करेगा। सूप और दउरा में रखे ठेकुआ और फल मैया के प्रति प्रेम और सात्विक भोग का प्रतीक हैं। गीत का मुख्य संदेश यह है कि यदि मन में अटूट विश्वास हो, तो छठी मैया भक्त की हर मनोकामना पूर्ण करती हैं। यह गीत केवल एक संगीत नहीं, बल्कि एक व्रती की प्रार्थना है जो अपनी साधना को सफल बनाने के लिए मैया से आशीर्वाद मांग रहा है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'समर्पण' है। छठ का व्रत कठिन तपस्या का नाम है, और यह गीत उस तपस्या को उत्सव में बदल देता है। इसका संदेश यह है कि ईश्वर की भक्ति में आडंबर से अधिक भाव का महत्व है। चाहे वह कांच के बांस की बहंगी हो या साधारण फल, मैया केवल भक्त के प्रेम को स्वीकार करती हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
गीत का नामपेन्ही के पियरी
गायकप्रमोद प्रेमी यादव
भाषाभोजपुरी
विषयछठ पूजा / सूर्य उपासना
भावभक्ति एवं समर्पण

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ गीत लोक संस्कृति की आत्मा हैं। ये गीत पीढ़ियों से चले आ रहे हैं और हमारी जड़ों से जुड़े रहने का माध्यम हैं। प्रमोद प्रेमी जैसे कलाकारों द्वारा गाए गए ये गीत आधुनिक पीढ़ी को भी अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं। छठ पूजा में गाये जाने वाले ये गीत न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि समाज में स्वच्छता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी फैलाते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द अर्थ
पियरीपीला वस्त्र (पीतांबर)
अरघियासूर्य देव को दिया जाने वाला अर्घ्य (जल)
ठेकुआछठ पूजा का विशेष प्रसाद
दउराबांस से बनी टोकरी जिसमें पूजा सामग्री रखी जाती है
बहंगियाबांस की बनी वह संरचना जिससे पूजा सामग्री घाट तक ले जाई जाती है

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • धैर्य और अनुशासन: छठ का व्रत हमें जीवन में कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की सीख देता है।
  • प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य देव को अर्घ्य देना प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का सबसे बड़ा उदाहरण है।
  • सात्विकता: सादा जीवन और शुद्ध आहार ही भक्ति का मार्ग है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

छठ पूजा में पीले वस्त्र का क्या महत्व है?

पीला रंग सूर्य देव का प्रिय है और यह सात्विकता व शुभता का प्रतीक है।

प्रमोद प्रेमी के छठ गीत क्यों प्रसिद्ध हैं?

उनकी गायकी में लोक संगीत की मिठास और भक्ति का अनूठा संगम होता है, जो लोगों के दिलों को छू लेता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह लेख लोक परंपराओं और भक्ति गीतों के सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखकर लिखा गया है।

संबंधित लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!