सनातन धर्म में आदि शक्ति मां दुर्गा की आराधना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। "दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे" यह भजन देवी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय और हृदय को स्पर्श करने वाला संकीर्तन है। यह भजन मूलतः मां भगवती के प्रति अटूट विश्वास, अनन्य समर्पण और सुख-दुःख दोनों ही परिस्थितियों में समभाव रहने की प्रेरणा देता है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी आराध्या देवी माता रानी से प्रार्थना करता है कि जीवन के उतार-चढ़ाव चाहे जैसे भी हों, उसके घर में मां की पावन ज्योत सदैव प्रज्वलित रहेगी और उसका मन निरंतर मां के चरणों में लीन रहेगा। यह भजन साधक के अंतर्मन में भक्ति रस का संचार करता है और उसे सांसारिक कष्टों से मुक्ति दिलाकर परम शांति की अनुभूति कराता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे ॥
(मुखड़ा)
दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे।
हे माता रानी! हम सुबह-शाम तेरा गुणगान करेंगे।
दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे॥
(अंतरा - 1)
सुख में भी तुमको न भूलें, दुःख में भी धीरज न खोयें।
तेरे चरणों की धूलि लेकर, अपने पापों को धोयें।
मन के मंदिर में मैया, तेरी पावन मूरत बसाकर, तेरा ध्यान करेंगे।
दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे॥
(अंतरा - 2)
जग की झूठी माया से, नाता तोड़ के आये हैं।
हम अपनी जीवन नैया, तेरे भरोसे लाये हैं।
मैया शेरावाली! अपनी दया की छांव में रखना, तेरा ध्यान करेंगे।
दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे॥
(अंतरा - 3)
जब तक सांस चलेगी मैया, तेरा नाम पुकारेंगे।
तेरे ही दर पे आकर, अपनी जिंदगी गुजारेंगे।
भक्तों की बिगड़ी बनाने वाली, हे जगदम्बे! तेरा ध्यान करेंगे।
दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे॥
(refrain)
बोलो जय माता दी, सारे बोलो जय माता दी।
मैया पार करेगी, मिलकर बोलो जय माता दी॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन जीवात्मा की परमात्मा (मां शक्ति) के प्रति पूर्ण शरणागति का जीवंत दस्तावेज है। इसका मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में ईश्वर का स्मरण रखना चाहिए। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने भी समत्वं योग उच्यते कहा है, जिसका अर्थ है सुख और दुःख में समान रहना। यह भजन इसी दार्शनिक सत्य को अत्यंत सरल और सुगम भाषा में प्रस्तुत करता है।
भक्त कहता है कि हे माता रानी! मेरे जीवन में चाहे घोर अंधकार रूपी दुःख आये या प्रकाश रूपी सुख का सवेरा हो, मैं अपने घर में श्रद्धा की ज्योत जलाकर निरंतर आपका ध्यान करूँगा। सांसारिक प्राणी अक्सर सुख में ईश्वर को भूल जाते हैं और दुःख में उन्हें कोसते हैं, परंतु एक सच्चा भक्त वही है जो दोनों ही अवस्थाओं में मां के चरणों से जुड़ा रहे। घर में ज्योत जलाना केवल एक भौतिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह अंतःकरण में ज्ञान और भक्ति के प्रकाश को प्रज्वलित करने का प्रतीक है। जब हम मां की ज्योत जलाते हैं, तो हमारे भीतर की नकारात्मकता नष्ट होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
इस भजन का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- समर्पण भाव (Surrender): यह भजन भक्त को सिखाता है कि अपनी जीवन रूपी नैया को पूरी तरह से मां के हाथों में सौंप देना चाहिए। जब समर्पण पूर्ण होता है, तो भय स्वतः ही समाप्त हो जाता है।
- समभाव की शिक्षा: सुख और दुःख जीवन के दो पहलू हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि अनुकूल और प्रतिकूल दोनों ही परिस्थितियों में विचलित हुए बिना मां की भक्ति में लीन रहना चाहिए।
- ज्योत का आध्यात्मिक प्रतीक: हिंदू धर्म में दीपक या ज्योत को साक्षात देव रूप माना गया है। घर में ज्योत जलाने से वास्तु दोष दूर होते हैं और दैवीय शक्तियों का आगमन होता है।
- सामूहिक संकीर्तन का आनंद: इस भजन की लय और धुन इतनी मधुर है कि इसे सामूहिक रूप से गाने पर संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि मां की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष समय और विधियां अत्यंत फलदायी मानी गई हैं:
सर्वोत्तम समय: इस भजन का गायन सुबह के समय मंगला आरती के बाद या संध्या काल में संध्या आरती के समय करना अत्यंत शुभ होता है। विशेष रूप से नवरात्रि के पावन दिनों में, प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को इस भजन का श्रवण करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
गायन की विधि:
- सर्वप्रथम स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- अपने घर के मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी अथवा तिल के तेल का दीपक (ज्योत) प्रज्वलित करें।
- मां को लाल पुष्प, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
- पूर्ण श्रद्धा और शांत मन से इस भजन का गायन या श्रवण करें। भजन के अंत में पार्वती स्तोत्रम या मां की आरती अवश्य करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन आदि शक्ति मां दुर्गा (माता रानी) को समर्पित है। मां दुर्गा को सगुण और निर्गुण दोनों रूपों में पूजा जाता है। वे दुष्टों का संहार करने वाली महिषासुरमर्दिनी भी हैं और भक्तों पर ममता बरसाने वाली करुणामयी माता भी हैं। सनातन परंपरा में संतों ने सदैव नाम-स्मरण और संकीर्तन को कलयुग में मोक्ष प्राप्ति का सबसे सरल साधन बताया है। इस भजन की रचना लोक-परंपरा के अंतर्गत हुई है, जिसमें भक्तों के सामूहिक अनुभव और मां के प्रति अगाध प्रेम की अभिव्यक्ति है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन आधुनिक युग के सबसे लोकप्रिय देवी भजनों में से एक है। इसकी पृष्ठभूमि उत्तर भारत के जागरण (माता की चौकी) और संकीर्तन परंपरा से जुड़ी हुई है। जब भक्त मां के दरबार में एकत्र होते हैं, तो वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए ऐसे भजनों का सहारा लेते हैं जो सीधे हृदय को छूते हैं। इस भजन की भाषा अत्यंत सरल खड़ी बोली है, जिसमें पंजाबी और लोक-संस्कृति का भी प्रभाव देखने को मिलता है। यही कारण है कि यह भजन हर वर्ग के लोगों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी हिंदी है। इसमें किसी क्लिष्ट संस्कृत शब्दावली का प्रयोग नहीं किया गया है, जिससे यह आम जनमानस के लिए अत्यंत सुलभ हो जाता है। इसकी काव्य शैली 'प्रार्थना गीत' या 'विनय पद' जैसी है। इसमें रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है, जैसे "जीवन नैया" और "मन का मंदिर"। ये प्रतीक भक्त के आंतरिक भावों को गहराई से व्यक्त करते हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें केवल भक्ति करना ही नहीं सिखाता, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाता है:
- धैर्य और विश्वास: जीवन में जब भी कठिन समय आये, तो विचलित होने के बजाय मां पर विश्वास रखना चाहिए। दुःख स्थायी नहीं है, वह भी बीत जाएगा।
- अहंकार का त्याग: "हम अपनी जीवन नैया, तेरे भरोसे लाये हैं" - यह पंक्ति दर्शाती है कि मनुष्य को अपने कर्ता होने के अहंकार को त्याग कर ईश्वर की इच्छा को सर्वोपरि मानना चाहिए।
- कृतज्ञता का भाव: सुख के समय ईश्वर को धन्यवाद देना और उनका स्मरण करना हमें जमीन से जुड़े रहने की सीख देता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| ज्योत | दीपक की लौ / प्रकाश | ज्ञान, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक। |
| ध्यान | एकाग्रता / स्मरण | ईश्वर के स्वरूप में मन को लीन करना। |
| जीवन नैया | संसार रूपी सागर में जीवन रूपी नाव | संसार चक्र से पार उतरने का मानवीय प्रयास। |
| धीरज | धैर्य / सहनशीलता | विपत्ति के समय मन को शांत रखने का गुण। |
| जगदम्बे | जगत की माता (दुर्गा) | संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी और रचयिता। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे।"
हे मां! मेरे जीवन में चाहे सुख का उजाला हो या दुःख का अंधकार, मैं अपने घर में आपकी भक्ति की ज्योत जलाकर निरंतर आपका ही ध्यान धरूँगा।
"सुख में भी तुमको न भूलें, दुःख में भी धीरज न खोयें।"
हे दयामयी! मुझे ऐसा वरदान दें कि सुख के क्षणों में मेरा अहंकार जागृत न हो और मैं आपको न भूलूँ, तथा दुःख के समय मेरा धैर्य न टूटे।
"जग की झूठी माया से, नाता तोड़ के आये हैं।"
यह संसार नश्वर है और इसके संबंध क्षणभंगुर हैं। मैं इस सत्य को जानकर सांसारिक मोह-माया से अपना मन हटाकर आपके चरणों में आया हूँ।
"जब तक सांस चलेगी मैया, तेरा नाम पुकारेंगे।"
मेरे जीवन के अंतिम क्षण तक, मेरी हर सांस के साथ केवल आपका ही पावन नाम उच्चारित होता रहे, यही मेरी एकमात्र अभिलाषा है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
मां दुर्गा की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित सिद्ध मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
यह मंत्र मां भगवती के सर्वकल्याणकारी स्वरूप को नमन करता है। इसके अतिरिक्त, भक्त श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं जो इस भजन के भावों को और अधिक सुदृढ़ बनाता है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | दुखी हो या सुख आये, घर में जलाकर ज्योत, तेरा ध्यान करेंगे |
| मुख्य आराध्य देव | मां दुर्गा / माता रानी (शेरावाली) |
| भजन का मुख्य भाव | समर्पण, विश्वास, समत्व भाव (भक्ति रस) |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, मंगलवार, शुक्रवार, माता की चौकी, दैनिक पूजा |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| संबंधित पाठ | श्री दुर्गा चालीसा, ॐ जय जगदीश हरे आरती |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पर आधारित है। इस भजन के पाठ और अर्थ को विभिन्न प्रामाणिक भक्ति ग्रंथों, पारंपरिक संकीर्तन पद्धतियों और विद्वानों के विचारों के आलोक में संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध और प्रेरणादायक सामग्री पहुंचाना है ताकि वे अपनी दैनिक साधना को और अधिक समृद्ध बना सकें।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - मां भगवती की महिमा और आराधना प्रसंग।
- पारंपरिक भजन संग्रह एवं संकीर्तन मंडलियां।
- सनातन धर्म की आरती एवं स्तोत्र परंपरा।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें