Parvati Stotram

Maiya Ka Chola Hai Rangla By Lakhbir Singh Lakkha [Full Song] - Tere Bhagya Ke Chamkenge Taare - BhaktiLok

69 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha) की सुमधुर वाणी में गाया गया पावन भजन "मैया का चोला है रंगला" (Maiya Ka Chola Hai Rangla By Lakhbir Singh Lakkha [Full Song] - Tere Bhagya Ke Chamkenge Taare) सनातन धर्म और माता रानी के भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। शारदीय और चैत्र नवरात्र के पवित्र अवसरों पर माता के दरबार से लेकर हर घर और पंडाल में गूंजने वाला यह भजन माँ वैष्णो देवी, शेरावाली माता और जगत जननी दुर्गा माँ के प्रति अनन्य प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण शरणागति का जीवंत प्रतीक है। सनातन संस्कृति में संकीर्तन और माता के जैकारे लगाने का विशेष आध्यात्मिक महत्व बताया गया है, जो साधक के अंतर्मन के समस्त विकारों को दूर कर उसमें सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति का संचार करता है। इस भजन की एक-एक पंक्ति में माँ के अलौकिक शृंगार, उनके लाल रंग के चोले की महिमा और उनके भक्तों के जीवन में आने वाले सौभाग्य का बहुत ही सुंदर और मनमोहक वर्णन किया गया है। लक्खा जी की जादुई आवाज़ में जब यह भजन गूंजता है, तो श्रोता झूम उठते हैं और उनका मन माँ के चरणों में लीन हो जाता है। यह मार्गदर्शिका इस भजन के संपूर्ण बोल, भावार्थ, विशेषताओं और इसके गायन से मिलने वाले आध्यात्मिक लाभों का विस्तार से विश्लेषण करती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मैया का चोला है रंगला, तेरे भाग्य के चमकेंगे तारे...

मुखड़ा:
मैया का चोला है रंगला, तेरे भाग्य के चमकेंगे तारे,
ऊंचे पहाड़ों वाली माँ के, जाके दर्शन कर ले सारे!
मैया का चोला है रंगला, तेरे भाग्य के चमकेंगे तारे...

अंतरा 1:
लाल चुनरिया लाल कसुम्बी, मैया को अति भाये,
जो भी भक्त शरण में आए, मनचाहा फल पाए।
शेरावाली के दरबार में, दुःख सारे मिट जाते सारे,
ऊंचे पहाड़ों वाली माँ के, जाके दर्शन कर ले सारे!
मैया का चोला है रंगला, तेरे भाग्य के चमकेंगे तारे...

अंतरा 2:
भोर भये माँ ज्योति जगाओ, मन मंदिर महकाओ,
लक्खा गुण गाए मैया के, तुम भी शीश झुकाओ।
माता के जयकारे गूंजें, गूंजे पर्वत सारे के सारे,
ऊंचे पहाड़ों वाली माँ के, जाके दर्शन कर ले सारे!
मैया का चोला है रंगला, तेरे भाग्य के चमकेंगे तारे...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"मैया का चोला है रंगला" भजन केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा आध्यात्मिक संकीर्तन है जो मनुष्य को भौतिक दुखों और चिंताओं से ऊपर उठाकर माता की दिव्य कृपा का अनुभव कराता है। भजन की मुख्य पंक्ति "मैया का चोला है रंगला, तेरे भाग्य के चमकेंगे तारे" का गहरा दार्शनिक अर्थ है। यहाँ 'रंगला चोला' माता की ऊर्जा, प्रेम, उत्साह और जीवंतता का प्रतीक है। जिस प्रकार लाल रंग प्रेम, शौर्य और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है, उसी प्रकार देवी दुर्गा का लाल चोला साधक के जीवन से निराशा, अंधकार और अभाग्य को मिटाकर उसे सौभाग्य और सकारात्मकता से भर देता है।

भजन के माध्यम से लखबीर सिंह लक्खा जी भक्तों को यह संदेश देते हैं कि ऊंचे पहाड़ों (त्रिकूट पर्वत, वैष्णो देवी) पर विराजमान माता के दरबार में जाने मात्र से और सच्चे मन से उनके दर्शन करने मात्र से मनुष्य के संचित कर्मों के बंधन ढीले पड़ने लगते हैं। 'भोर भये माँ ज्योति जगाओ' पंक्ति यह सिखाती है कि साधक को प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर अपने भीतर और बाहर भक्ति की ज्योति प्रज्वलित करनी चाहिए। जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर माता के चरणों में शीश झुकाता है, तो उसका अंतर्मन पवित्र हो जाता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि कलियुग में भगवती दुर्गा का नाम स्मरण और संकीर्तन ही भवसागर से पार उतरने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस लोकप्रिय भजन की अनेक विशेषताएं हैं जो इसे हर वर्ग के भक्तों के बीच प्रिय बनाती हैं:

  • दिव्य ऊर्जा का संचार: इस भजन के बोल और इसकी लय इतनी ऊर्जावान है कि इसे सुनते ही थके हुए मन में भी उत्साह और स्फूर्ति जाग जाती है।
  • शारदीय और चैत्र नवरात्र का मुख्य गान: नवरात्र के नौ दिनों में जब घर-घर में घटस्थापना और माता की चौकी होती है, तब इस भजन के बिना उत्सव अधूरा माना जाता है।
  • समर्पण और आशा का संदेश: यह भजन निराश व्यक्तियों के जीवन में आशा की किरण जगाता है और उन्हें माता पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देता है।
  • सामूहिक संकीर्तन के लिए उपयुक्त: इसकी सरल और लयबद्ध धुन के कारण इसे माता की चौकी, जागरण और सत्संग में आसानी से सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।

सनातन परंपरा में देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, आदि शक्ति जगदंबा की आराधना से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। यह भजन उसी शास्त्र सम्मत भावना का आधुनिक और अत्यंत मधुर संगीत रूप है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उचित समय और विधि का ध्यान रखना आवश्यक है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातःकाल: सुबह स्नान करने के पश्चात माता के मंदिर या घर के पूजा स्थल पर घी का दीपक प्रज्वलित करके इस भजन का श्रवण या गायन करना अत्यंत शुभ होता है।
  • संध्या काल (प्रदोष काल): संध्या के समय जब घर में धूप और कपूर की आरती की जाती है, तब इस भजन को बजाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मकता का वास होता है।
  • नवरात्र और विशेष व्रत: नवरात्र के नौ दिनों में, अष्टमी-नवमी पूजन के समय, तथा शुक्रवार के दिन माता संतोषी या वैभव लक्ष्मी के व्रत के दौरान इस भजन को विशेष रूप से सुनना चाहिए।
  • जागरण और चौकी: माता के जागरण में रात के समय माहौल को भक्तिमय बनाने और झाँकियों के आगमन के दौरान यह भजन मुख्य आकर्षण होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से आदि शक्ति माता दुर्गा (शेरावाली, वैष्णो देवी) को समर्पित है। सनातन धर्म में माता दुर्गा को चराचर जगत की माता, आदि शक्ति और मूल प्रकृति माना जाता है जो अपने भक्तों के सभी संकटों को हरने वाली हैं।

इस भजन को अपनी जादुई और भावपूर्ण आवाज से अमर बनाने वाले लखबीर सिंह लक्खा भारतीय भक्ति संगीत जगत के एक युगपुरुष हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी माता रानी के भजनों और कृष्ण भजनों के प्रचार-प्रसार में समर्पित कर दी है। लक्खा जी के गाए हुए भजन आज घर-घर में बच्चे से लेकर बुजुर्गों की जुबान पर रहते हैं और लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। आप उनके अन्य लोकप्रिय भजनों जैसे मैया का चोला है रंगला के माध्यम से उनकी गायन शैली की दिव्यता का अनुभव कर सकते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल और लोक-सुलभ हिंदी/ब्रज-प्रभावित लोकभाषा में रचा गया है, जिससे यह आम जनमानस के हृदय को तुरंत स्पर्श कर लेता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहित और लयबद्ध (Rhythmic) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे "रंगला चोला" और "भाग्य के चमकेंगे तारे"। इस प्रकार के शब्दों का चयन श्रोताओं के मन में एक दृश्यात्मक प्रभाव (Visual Imagery) उत्पन्न करता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो माता का लाल चोला स्वयं आंखों के सामने चमक रहा हो और पहाड़ों की घंटियां गूंज रही हों।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस पावन भजन से हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीखें मिलती हैं:

  • अटूट विश्वास: जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर और माता रानी की शक्ति पर से कभी विश्वास नहीं उठाना चाहिए।
  • नियमित साधना: प्रतिदिन सुबह उठकर ईश्वर का स्मरण करना (ज्योति जगाना) जीवन को अनुशासित और सकारात्मक बनाता है।
  • अभिमान का त्याग: माता के दरबार में जाने के लिए ऊंच-नीच और अहंकार का त्याग करना पड़ता है, जो हमें नम्रता सिखाता है।
  • सामूहिक आनंद: उत्सवों और पर्वों को परिवार और समाज के साथ मिलकर मनाने से मानसिक प्रसन्नता और सौहार्द बढ़ता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
चोला माता का वस्त्र / श्रृंगार ईश्वरीय आवरण और दिव्य सुरक्षा कवच
रंगला रंगीन / लाल / जीवंत ऊर्जा, प्रेम और उत्साह का प्रतीक
भाग्य के तारे चमकना सौभाग्य उदय होना कर्मों के शुद्ध होने से जीवन में सुख-समृद्धि आना
भोर भये सुबह होते ही / प्रातःकाल ज्ञान के उदय का समय और चैतन्य अवस्था
ज्योति जगाना दीपक प्रज्वलित करना अंतरात्मा में ज्ञान और भक्ति का प्रकाश करना

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम Maiya Ka Chola Hai Rangla (मैया का चोला है रंगला)
मुख्य गायक लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha)
समर्पित देवता माता दुर्गा / शेरावाली / वैष्णो देवी
संगीत शैली भक्ति रस / देवी संकीर्तन / भजन
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य अवसर नवरात्र, माता की चौकी, जागरण, मंगलवार/शुक्रवार पूजा
मुख्य संदेश माता की शरण में जाने से भाग्य उदय और दुखों का नाश होता है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"मैया का चोला है रंगला" भजन के गायक कौन हैं?

इस प्रसिद्ध भजन के मुख्य गायक लोकप्रिय भजन सम्राट लखबीर सिंह लक्खा जी हैं, जिनकी आवाज में यह भजन देश-विदेश में बहुत चाव से सुना जाता है।

यह भजन मुख्य रूप से किस अवसर पर गाया जाता है?

यह भजन मुख्य रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्र, माता के जागरण, कन्या पूजन, मंगलवार या शुक्रवार की माता की चौकी और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में गाया जाता है।

भजन में 'रंगला चोला' का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?

यहाँ 'रंगला चोला' माता रानी के लाल वस्त्र और उनके दिव्य श्रृंगार को दर्शाता है, जो भक्त के जीवन में उत्साह, ऊर्जा और सौभाग्य का प्रतीक है।

क्या घर पर इस भजन का नियमित संकीर्तन किया जा सकता है?

हाँ, घर के मंदिर में पूजा के दौरान या सुबह-शाम माता की आरती के समय इस भजन को सुनने या गाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति बनी रहती है।

माता रानी के दर्शन और पूजन का सबसे उत्तम समय कौन सा माना गया है?

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल 4 से 6 बजे) और संध्या का प्रदोष काल माता की आराधना और भजन-कीर्तन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।

इस भजन से भक्तों को क्या प्रेरणा मिलती है?

यह भजन भक्तों को माता के प्रति अटूट श्रद्धा रखने, नियमित रूप से उनकी ज्योति जलाने और जीवन की कठिनाइयों में भी निराश न होने की प्रेरणा देता है।

क्या लखबीर सिंह लक्खा के अन्य प्रसिद्ध देवी भजन भी उपलब्ध हैं?

हाँ, लक्खा जी के गाए हुए 'भोर भये दिन चढ़ गया मेरी मैया', 'चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है' जैसे अनगिनत भजन विश्व प्रसिद्ध हैं।

इस भजन को सुनने से मानसिक शांति कैसे मिलती है?

भक्ति संगीत और संकीर्तन से मस्तिष्क की तरंगें शांत होती हैं, तनाव दूर होता है और हृदय में ईश्वरीय प्रेम का संचार होता है जिससे असीम शांति मिलती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन धर्म की परंपरा, देवी स्तुति के नियमों और लोक संगीत के सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें प्रयुक्त सभी तथ्य और भावार्थ पारंपरिक मान्यताओं और स्रोतों पर आधारित हैं।

स्रोत एवं संदर्भ

  • सनातन देवी उपासना परंपरा एवं लोकगीत संग्रह।
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं दुर्गा सप्तशती के सांस्कृतिक आयाम।
  • भक्ति संगीतकार लखबीर सिंह लक्खा के लोकप्रिय एल्बम और ऑडियो-वीडियो संदर्भ।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!