Parvati Stotram

ऊँचे पर्वत पे !! Latest Bhole Baba Bhajan !! Video Song !! Neelima, Simrat #Bhakti Bhajan Kirtan - BhaktiLok

65 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"ऊँचे पर्वत पे" भजन भगवान शिव की महिमा का एक अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिमय गुणगान है। सनातन धर्म में भगवान शिव को 'कैलाशपति' और 'पर्वतराज' के रूप में पूजा जाता है। यह भजन साधक के मन में उस दिव्य कैलाश पर्वत की छवि अंकित करता है, जहाँ देवाधिदेव महादेव अपनी योग निद्रा और ध्यान में लीन रहते हैं। नीलिमा और सिमरत द्वारा स्वरबद्ध यह प्रस्तुति न केवल कानों को प्रिय लगती है, बल्कि यह मन को सांसारिक कोलाहल से दूर ले जाकर शिवत्व की शांति से जोड़ती है। शिव भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर उस 'शिव' को खोजना है जो ऊँचे पर्वत की भांति अडिग, शांत और कल्याणकारी है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

(मुखड़ा)
ऊँचे पर्वत पे, डेरा भोले बाबा का
ऊँचे पर्वत पे, डेरा भोले बाबा का
सदा ही गूँजे, नाम भोले बाबा का
ऊँचे पर्वत पे, डेरा भोले बाबा का...

(अंतरा 1)
गले में सोहे सर्पों की माला
माथे पे चंदा, जटा में गंगा
भक्तों की रक्षा, करते भोले बाबा का
ऊँचे पर्वत पे, डेरा भोले बाबा का...

(अंतरा 2)
नंदी की सवारी, डमरू बजाते
भक्तों के दुःख, पल में मिटाते
सबके हैं स्वामी, प्यारे भोले बाबा का
ऊँचे पर्वत पे, डेरा भोले बाबा का...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त भगवान शिव के निवास स्थान 'कैलाश' की महिमा का वर्णन कर रहा है। 'ऊँचे पर्वत' का अर्थ केवल हिमालय की ऊँचाई नहीं, बल्कि शिव की उच्च चेतना और उनकी निर्लिप्तता का प्रतीक है। भक्त कहता है कि जहाँ शिव का वास है, वहाँ निरंतर उनके नाम का संकीर्तन होता है। शिव के गले में सर्प, मस्तक पर चंद्रमा और जटाओं में गंगा का होना उनके प्रकृति के साथ एकाकार होने का प्रमाण है। वे न केवल ब्रह्मांड के स्वामी हैं, बल्कि अपने भक्तों के दुखों को पल भर में हरने वाले करुणा के सागर भी हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि यदि हम सच्चे मन से शिव का स्मरण करें, तो वे हमारे जीवन के पर्वतों (कठिनाइयों) को भी सहज ही पार करा देते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन शिवरात्रि, सावन के सोमवार और नित्य पूजन के समय अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इसकी मुख्य विशेषता इसकी सरलता है। सरल शब्दों में शिव के स्वरूप का वर्णन होने के कारण यह जन-जन के हृदय में उतर जाता है। यह भजन साधक को 'अहंकार' त्यागने और शिव की भांति 'शांत' रहने की प्रेरणा देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को आप प्रातःकाल स्नान के पश्चात शिव मंदिर में या घर के पूजा स्थल पर गा सकते हैं। सोमवार के दिन इसे सुनना या गाना विशेष फलदायी होता है। इसे गाते समय मन में शिव की प्रतिमा का ध्यान करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
कैलाश शिव का निवास स्थान पवित्र पर्वत
जटा शिव के बाल गंगा का उद्गम
नंदी शिव का वाहन धर्म का प्रतीक

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ऊँचे पर्वत पे
आराध्य देव भगवान शिव
भाषा हिंदी
भाव भक्ति एवं समर्पण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: यह भजन किस देवता को समर्पित है? उत्तर: यह भगवान शिव को समर्पित है।
  • प्रश्न: क्या इसे सोमवार को सुनना शुभ है? उत्तर: हाँ, सोमवार शिव का दिन है, अतः यह अत्यंत शुभ है।
  • प्रश्न: क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है? उत्तर: जी हाँ, इसे कहीं भी भक्ति भाव से गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह भजन शिव भक्ति परंपरा के लोक गीतों पर आधारित है। संदर्भ हेतु शिव पुराण एवं पारंपरिक स्तोत्रों का अध्ययन किया गया है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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