Parvati Stotram

Gigaliyo | Khatu Shyam Bhajan | लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम बिलखे थारो गीगलियो | Aparna Mishra - BhaktiLok

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सनातन धर्म की समृद्ध संकीर्तन परंपरा में बाबा खाटू श्याम जी की आराधना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। "गीगलियो" (Gigaliyo) भजन, जिसे सुप्रसिद्ध भजन गायिका अपर्णा मिश्रा ने अपने मधुर कंठ से सजाया है, वात्सल्य और शरणागति भाव का एक अनुपम उदाहरण है। राजस्थानी लोक संस्कृति और मारवाड़ी बोली में रचित यह भजन जीवात्मा की उस व्याकुलता को दर्शाता है, जहाँ वह स्वयं को एक अबोध बालक (गीगलियो) मानकर अपने परमपिता बाबा श्याम की गोदी में स्थान पाने के लिए बिलख रही है। भक्ति मार्ग में जब साधक अपने समस्त सांसारिक अहंकार को त्यागकर बालक के समान निष्कपट और सरल हो जाता है, तभी उसे परमात्मा के वास्तविक प्रेम की अनुभूति होती है। यह भजन खाटू नरेश के प्रति अनन्य प्रेम, विरह, और पूर्ण समर्पण की भावना से ओतप्रोत है, जो श्रोताओं के हृदय में अश्रुधारा और भक्ति रस का संचार कर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो

लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो।
बिलखे थारो गीगलियो बाबा, बिलखे थारो गीगलियो।
लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो॥

थारे बिना म्हारो कोई न रखवालो, थे ही हो म्हाका दीनदयालो।
म्हाने चरणां में लिपटायो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो।
लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो॥

सारे जग ने म्हाने ठुकरायो, मैं तो हार के थारे द्वारे आयो।
म्हारी नैया पार लगायो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो।
लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो॥

आँख्यां सूँ बहे नीर की धारा, अब तो दे दो बाबा सहारा।
म्हाने हँसकर गले लगायो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो।
लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो॥

अपर्णा गावे थारी महिमा भारी, थे हो लीले के असवारी।
म्हारी बिगड़ी बात बणायो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो।
लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस पावन भजन का केंद्रीय भाव अत्यंत मर्मस्पर्शी है। यहाँ भक्त स्वयं को एक छोटा, असहाय बच्चा (गीगलियो) मानता है जो इस विशाल और स्वार्थी संसार में खो गया है। वह अपने आराध्य बाबा श्याम से प्रार्थना करता है कि "हे बाबा! मुझे अपनी गोदी में उठा लीजिए, आपका यह बालक आपके दर्शन और स्नेह के लिए व्याकुल होकर रो रहा है।"

आध्यात्मिक दृष्टि से, यह भजन जीवात्मा और परमात्मा के संबंध को परिभाषित करता है। संसार रूपी मायाजाल में फंसा मनुष्य जब चारों ओर से निराश हो जाता है, तब उसे समझ आता है कि इस जगत में ईश्वर के अतिरिक्त कोई भी उसका सच्चा रक्षक नहीं है। जब भक्त कहता है कि "सारे जग ने म्हाने ठुकरायो", तो यह सांसारिक संबंधों की नश्वरता को दर्शाता है। अंततः, हारकर जब वह "हारे के सहारे" बाबा श्याम के द्वार पर आता है, तो उसकी आँखों से पश्चाताप और अनन्य प्रेम के आंसू बहने लगते हैं। वह बाबा से याचना करता है कि वे उसे अपने चरणों में स्थान दें और उसकी जीवन-नैया को इस भवसागर से पार लगाएं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह साधना की उस अवस्था को दर्शाता है जिसे "बाल-भाव" या "वात्सल्य भक्ति" कहा जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • वात्सल्य रस की प्रधानता: इस भजन में भक्त और भगवान का संबंध माता-पिता और संतान जैसा दर्शाया गया है, जो भक्ति की सबसे सरल और मधुर अवस्था है।
  • शरण्य भाव: "हारे का सहारा" की अवधारणा को चरितार्थ करते हुए, यह भजन सिखाता है कि जब संसार के सारे मार्ग बंद हो जाते हैं, तब श्याम बाबा का द्वार सदैव खुला रहता है।
  • भावनात्मक जुड़ाव: राजस्थानी लोक धुनों और मारवाड़ी शब्दों का प्रयोग सीधे हृदय को छूता है और साधक को भाव-विभोर कर देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • एकादशी तिथि: खाटू श्याम जी की पूजा में एकादशी (विशेषकर शुक्ल पक्ष की एकादशी) का अत्यधिक महत्व है। इस दिन इस भजन को गाने से बाबा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • संध्या आरती के समय: घर या मंदिर में संध्या काल की पूजा के समय इस भजन को भावपूर्वक सुनने से मानसिक शांति मिलती है और घर का वातावरण सकारात्मक बनता है।
  • फाल्गुन मेला: खाटू धाम के वार्षिक फाल्गुन मेले के दौरान इस भजन का संकीर्तन भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन महाभारत कालीन महान योद्धा बर्बरीक, जिन्हें कलयुग में स्वयं भगवान श्री कृष्ण के वरदान स्वरूप बाबा खाटू श्याम के रूप में पूजा जाता है, को समर्पित है। बर्बरीक ने धर्म की रक्षा के लिए अपने शीश का दान दे दिया था, जिससे प्रसन्न होकर श्री कृष्ण ने उन्हें अपना नाम "श्याम" दिया। इस भजन को आधुनिक समय में सुप्रसिद्ध भक्ति गायिका अपर्णा मिश्रा ने अपनी सुरीली और भावुक आवाज से जन-जन तक पहुँचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

राजस्थान की पावन भूमि संतों और भक्तों की भूमि रही है। यहाँ की लोक संस्कृति में भजनों के माध्यम से भगवान से लाड लड़ाने (स्नेह प्रकट करने) की प्राचीन परंपरा है। "गीगलियो" शब्द का अर्थ मारवाड़ी में नवजात या छोटे बच्चे से है। इस भजन की पृष्ठभूमि इसी लोक-संवेदना पर आधारित है, जहाँ भक्त अपने आराध्य से किसी याचक की तरह नहीं, बल्कि एक हठी बालक की तरह अपनी मांग रखता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और मिठास से भरी मारवाड़ी (राजस्थानी) है। इसमें प्रयुक्त अलंकार और रूपक अत्यंत स्वाभाविक हैं। "बिलखे थारो गीगलियो" में अनुप्रास और करुण रस का सुंदर सम्मिश्रण है। काव्य शैली गेय है, जिसे ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की पारंपरिक धुनों पर बहुत ही खूबसूरती से गाया जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पाठ सिखाता है:

  1. अहंकार का विसर्जन: जब तक मनुष्य के भीतर "मैं" (अहंकार) रहता है, तब तक वह ईश्वर को नहीं पा सकता। बालक बनने का अर्थ है अपने अहंकार को शून्य कर देना।
  2. पूर्ण विश्वास: जैसे एक छोटा बच्चा जानता है कि रोने पर उसकी माँ उसे गोदी में उठा ही लेगी, वैसे ही भक्त को भी विश्वास होना चाहिए कि पुकारने पर बाबा श्याम अवश्य आएंगे।
  3. संसार की असारता: यह भजन याद दिलाता है कि सांसारिक रिश्ते अस्थायी हैं, केवल परमात्मा का प्रेम ही शाश्वत है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ एवं आध्यात्मिक महत्व
गीगलियो (Gigaliyo) छोटा बच्चा / अबोध बालक साधक की वह अवस्था जहाँ वह अहंकार रहित होकर बालक बन जाता है।
बिलखे (Bilkhe) रो रहा है / व्याकुल है ईश्वर दर्शन के लिए जीवात्मा की तड़प और विरह वेदना।
म्हारो / म्हाने मेरा / मुझे राजस्थानी भाषा में आत्मीयता सूचक सर्वनाम।
लीले के असवारी नीले घोड़े के सवार बाबा श्याम का प्रिय वाहन नीला घोड़ा (लीला घोड़ा)।
नैया पार लगायो नाव को किनारे लगाना संसार रूपी भवसागर से मोक्ष प्रदान करना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम, बिलखे थारो गीगलियो..."
भक्त कहता है कि हे श्याम सुंदर! आपका यह छोटा सा बच्चा आपके बिना व्याकुल होकर रो रहा है। आप इसे अपनी ममतामयी गोदी में उठा लीजिए और दुलार कीजिए।

"थारे बिना म्हारो कोई न रखवालो, थे ही हो म्हाका दीनदयालो..."
इस संसार में आपके अतिरिक्त मेरा कोई रक्षक और पालनहार नहीं है। आप ही दीनों पर दया करने वाले परमेश्वर हैं, इसलिए मुझे अपने चरणों की शरण प्रदान करें।

"सारे जग ने म्हाने ठुकरायो, मैं तो हार के थारे द्वारे आयो..."
जब संसार के लोगों ने मुझे अकेला छोड़ दिया और मैं हर तरफ से निराश हो गया, तब मैं आपकी शरण में आया हूँ, क्योंकि आप ही हारने वाले के सबसे बड़े सहारे हैं।

"आँख्यां सूँ बहे नीर की धारा, अब तो दे दो बाबा सहारा..."
मेरी आँखों से अविरल आंसू बह रहे हैं। अब मेरी सहनशक्ति समाप्त हो चुकी है, हे बाबा! अब तो मुझे अपना वरदहस्त देकर सहारा दीजिए।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

बाबा खाटू श्याम जी की आराधना करते समय इस भजन के साथ निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

॥ ॐ श्री श्याम देवाय नमः ॥

"हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।"

यह महामंत्र भक्त के भीतर अटूट विश्वास जगाता है और मानसिक क्लेशों का नाश करता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम लेके गोदी में खिलाल्यो बाबा श्याम बिलखे थारो गीगलियो (Gigaliyo)
मुख्य आराध्य देव बाबा खाटू श्याम जी (श्री कृष्ण स्वरूप)
मुख्य गायिका अपर्णा मिश्रा (Aparna Mishra)
भाषा / बोली राजस्थानी / मारवाड़ी
भक्ति का भाव वात्सल्य भाव, शरणागति, करुण रस
उपयुक्त अवसर एकादशी, श्याम संकीर्तन, फाल्गुन महोत्सव, दैनिक संध्या वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

राजस्थानी और मारवाड़ी बोली में "गीगलियो" शब्द का अर्थ "छोटा बच्चा", "शिशु" या "अबोध बालक" होता है। भजन में भक्त स्वयं को बाबा श्याम का छोटा बच्चा मानकर प्रार्थना कर रहा है।

इस भजन को सुप्रसिद्ध भक्ति गायिका अपर्णा मिश्रा (Aparna Mishra) ने गाया है। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति के कारण यह भजन श्याम भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

महाभारत काल में बर्बरीक ने प्रतिज्ञा की थी कि वे युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देंगे। भगवान श्री कृष्ण ने उनकी इस भावना और शीश दान के त्याग से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे "हारे के सहारे" के रूप में पूजे जाएंगे।

यह भजन मन से अहंकार को दूर करता है और साधक में समर्पण भाव जगाता है। इसे सुनने से मानसिक तनाव दूर होता है और बाबा श्याम के प्रति अटूट श्रद्धा का विकास होता है।

प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि बाबा खाटू श्याम जी की पूजा और दर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इसके अतिरिक्त कार्तिक और फाल्गुन मास की एकादशी का विशेष महत्व है।

"लीला" या "लीला घोड़ा" बाबा खाटू श्याम जी के नीले रंग के घोड़े का नाम है। इसलिए उन्हें आदरपूर्वक "लीले का सवार" या "लीले के असवारी" कहा जाता है।

हाँ, इस भजन को दैनिक संध्या आरती या सुबह की पूजा के समय बजाया या गाया जा सकता है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है।

इसका मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य अपने सांसारिक अभिमान को छोड़कर पूरी तरह भगवान पर आश्रित हो जाता है, तो भगवान स्वयं माता-पिता बनकर उसकी रक्षा करते हैं और उसे अपनी शरण में ले लेते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन की व्याख्या और इसके दार्शनिक पहलुओं का विश्लेषण सनातन धर्म की पारंपरिक वात्सल्य भक्ति और श्रीमद्भगवद्गीता के शरणागति योग के सिद्धांतों के आधार पर किया गया है। अपर्णा मिश्रा द्वारा गाए गए इस भजन के बोलों की शुद्धता और उनके अर्थों को प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित कर यहाँ प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों को सही और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • स्कंद पुराण - कौमारिका खंड (बर्बरीक / खाटू श्याम जी की पौराणिक कथा)।
  • पारंपरिक राजस्थानी लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह।
  • श्रीमद्भगवद्गीता - भक्ति योग (अध्याय 12)।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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