भक्ति और समर्पण की पराकाष्ठा को व्यक्त करने वाला भजन "एक बार माँ आ जाओ" राम अवतार शर्मा जी के सुमधुर स्वर में एक अत्यंत भावपूर्ण रचना है। यह भजन न केवल एक गीत है, बल्कि भक्त की उस व्याकुलता का प्रतीक है जो अपनी आराध्या माँ जगदम्बा के दर्शन के लिए तड़पता है। माँ के प्रति यह पुकार सात्विक प्रेम और अनन्य भक्ति का अनुपम उदाहरण है। जब भक्त सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर अपनी माँ को पुकारता है, तो वह पुकार सीधे माँ के हृदय तक पहुँचती है। यह भजन विशेष रूप से नवरात्रि, जागरण, और माँ की चौकी के अवसरों पर गाया जाता है, जो वातावरण में भक्ति की एक दिव्य लहर प्रवाहित कर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
एक बार माँ आ जाओ, एक बार माँ आ जाओ,
सूना है ये आँगन मेरा, दर्शन माँ दिखा जाओ।
एक बार माँ आ जाओ...
मैं तो हूँ बालक तेरा, तू है मेरी मैया,
भवसागर में फंसी है मेरी, जीवन की नैया।
आकर के माँ मेरी नैया, पार लगा जाओ,
एक बार माँ आ जाओ...
भटके हुए राही को, राह तू दिखा दे,
अंधियारे जीवन में, ज्योति तू जला दे।
भक्ति का वरदान मुझे, माँ आज दिला जाओ,
एक बार माँ आ जाओ...
चलो माँ के भवन पे, जहाँ खुशियाँ मिलती हैं,
जहाँ दुखों की कलियाँ, खिलकर के खिलती हैं।
राम अवतार की विनती, माँ स्वीकार कर जाओ,
एक बार माँ आ जाओ...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल भाव 'शरणागति' है। भक्त अपनी माँ (जगदम्बा) से प्रार्थना करता है कि वह उसके जीवन के सूनेपन को दूर करने के लिए एक बार अवश्य आए। भक्त स्वयं को एक असहाय बालक मानता है और माँ को अपनी रक्षक। संसार को एक भवसागर (दुखों का सागर) माना गया है, जिसमें भक्त की जीवन-नैया फंसी हुई है। वह माँ से विनती करता है कि वह आकर उसकी नैया को पार लगाए। यह भजन अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाने की प्रार्थना है। अंत में, भक्त माँ के भवन (मंदिर) की महिमा का गुणगान करता है और अपनी भक्ति को स्वीकार करने की प्रार्थना करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति भाव: यह भजन 'वात्सल्य' और 'दास्य' भाव का मिश्रण है।
- आध्यात्मिक शांति: इसके श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
- सांस्कृतिक महत्व: यह भजन भारतीय लोक-भक्ति परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो माँ की शक्ति और करुणा को दर्शाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी समय गाया जा सकता है, परंतु ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकालीन आरती के समय इसका प्रभाव सर्वाधिक होता है। इसे गाते समय मन में माँ के प्रति पूर्ण विश्वास और समर्पण होना चाहिए। धूप-दीप जलाकर, माँ की प्रतिमा के समक्ष बैठकर इसे गाने से विशेष ऊर्जा की अनुभूति होती है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| भवसागर | संसार रूपी सागर | दुखों से भरा जीवन |
| नैया | नाव | जीवन की यात्रा |
| आराध्या | पूजा के योग्य | माँ जगदम्बा |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | एक बार माँ आ जाओ |
|---|---|
| गायक | राम अवतार शर्मा |
| विषय | माँ की भक्ति और शरणागति |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, जागरण, दैनिक पूजा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
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संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
यह सामग्री पारंपरिक भक्ति साहित्य, लोक भजनों के संकलन और सनातन धर्म की स्तुति परंपराओं पर आधारित है।
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