Parvati Stotram

#video | Pawan Singh का छठ गीत 2021 | स्वागत छठी माई के | Swagat Chhathi Mai Ke | Chhath Geet 2021

63 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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"स्वागत छठी माई के" (Swagat Chhathi Mai Ke) पवन सिंह द्वारा गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण भोजपुरी छठ गीत है, जो वर्ष 2021 में रिलीज हुआ था। यह गीत लोक आस्था के महापर्व छठ के पावन अवसर पर छठी मैया और भगवान सूर्य देव की आराधना को समर्पित है। सनातन धर्म में छठ पूजा का स्थान अत्यंत विशिष्ट है, क्योंकि यह पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह प्रकृति, स्वच्छता, अनुशासन और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है। पवन सिंह की सुरीली और भक्तिमयी आवाज में सजा यह गीत श्रोताओं के हृदय में सीधे उतर जाता है और उन्हें भक्ति रस से सराबोर कर देता है। इस लेख में हम इस गीत के बोल, इसका आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी परंपराओं का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। इस गीत के माध्यम से भक्त अपनी आस्था और श्रद्धा को छठी मैया के चरणों में अर्पित करते हैं, जिससे संपूर्ण वातावरण पवित्र और मंगलमय हो जाता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

(मुखड़ा)
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए...
स्वागत छठी माई के, पूजन की तैयारी बा...
दउरा सजवले बानी, घाट चमचमात बा...
स्वागत छठी माई के, पूजन की तैयारी बा...

(अंतरा 1)
केरवा के पात पर उगेलन सुरुज देव...
अरघ के बेर भईल, अरघ देवे के बा...
सभ मिलि गावे गीत, मंगलमय बेला बा...
स्वागत छठी माई के, पूजन की तैयारी बा...

(अंतरा 2)
छठी माई के बरतिया, जे करेला नियम से...
ओकर गोदी भरेली, सुख-संपत्ति देवेली...
महिमा अपार बा, जग उजियार बा...
स्वागत छठी माई के, पूजन की तैयारी बा...

(अंतरा 3)
गंगा के तीरे-तीरे सजल बा देवघरिया...
भक्तन के भीड़ लागल, दर्शन पावे के बा...
पवन गावे गीत, माई के चरनिया बा...
स्वागत छठी माई के, पूजन की तैयारी बा...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक और आधुनिक भावों का एक सुंदर मिश्रण है। गीत का प्रत्येक अंतरा भक्त के हृदय की व्याकुलता, श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है:

मुखड़ा का भावार्थ

गीत की शुरुआत "कांच ही बांस के बहंगिया" के पारंपरिक संदर्भ से होती है। इसका अर्थ है कि नए और कच्चे बांस से बनी बहंगी (टोकरी ले जाने का ढांचा) भार के कारण लचक रही है। भक्त कहते हैं कि हे छठी मैया! आपके स्वागत के लिए हमने पूजन की पूरी तैयारी कर ली है। हमने दउरा (बांस की बड़ी टोकरी) को विभिन्न प्रकार के फलों और पकवानों से सजा लिया है और नदी का घाट भी पूरी तरह से साफ-सुथरा और चमचमाता हुआ तैयार है।

प्रथम अंतरा का भावार्थ

प्रथम अंतरे में सूर्य देव के उदय होने का सुंदर वर्णन है। केले के पत्तों के पीछे से भगवान सूर्य देव उदित हो रहे हैं। अब अरघ (अर्घ्य) देने का समय हो गया है, और सभी भक्त जल और दूध से सूर्य देव को अर्घ्य देने के लिए तैयार हैं। सभी लोग मिलकर मंगल गीत गा रहे हैं, जिससे चारों ओर का वातावरण अत्यंत पवित्र और आनंदमय हो गया है।

द्वितीय अंतरा का भावार्थ

इस अंतरे में छठ व्रत की महिमा और इसके कठिन नियमों का उल्लेख किया गया है। जो भी श्रद्धालु अत्यंत कठिन नियमों और निष्ठा के साथ छठी मैया का व्रत करते हैं, मैया उनकी सूनी गोदी भर देती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। छठी मैया की महिमा अपरंपार है, जिससे संपूर्ण संसार आलोकित और धन्य होता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना पूर्ण समर्पण, पवित्रता और कृतज्ञता है। छठ महापर्व में किसी भी प्रकार की मूर्ति पूजा नहीं होती, बल्कि प्रत्यक्ष देवता सूर्य और उनकी शक्ति छठी मैया (उषा और प्रत्युषा) की आराधना की जाती है। यह गीत हमें संदेश देता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है, बल्कि मन की शुद्धता और प्रकृति के प्रति सम्मान ही सच्ची भक्ति है। पवन सिंह ने अपनी गायकी से इस संदेश को अत्यंत सरल और प्रभावी ढंग से जन-जन तक पहुँचाया है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) स्वागत छठी माई के (Swagat Chhathi Mai Ke)
गायक (Singer) पवन सिंह (Pawan Singh)
रिलीज वर्ष (Release Year) 2021
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
श्रेणी (Category) छठ गीत (Chhath Geet)
मुख्य विषय (Theme) छठी मैया का स्वागत और सूर्य आराधना

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

यह गीत भोजपुरी संगीत उद्योग के पावर स्टार कहे जाने वाले पवन सिंह द्वारा गाया गया है। पवन सिंह अपनी दमदार आवाज और भावपूर्ण गायकी के लिए जाने जाते हैं। उनके छठ गीत हर साल करोड़ों लोगों द्वारा सुने जाते हैं। इस गीत के संगीतकार और गीतकार ने पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक संगीत के साथ इस प्रकार पिरोया है कि यह गीत युवाओं और बुजुर्गों दोनों को समान रूप से आकर्षित करता है। गीत का वीडियो भी अत्यंत भव्य और भक्तिमय तरीके से फिल्माया गया है, जो दर्शकों को सीधे छठ घाट के जीवंत अनुभव से जोड़ता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) सांस्कृतिक संदर्भ (Context)
बहंगिया (Bahangiya) बांस का बना हुआ ढांचा जिसमें दउरा रखकर कंधे पर ले जाया जाता है।
दउरा (Daura) बांस की बड़ी टोकरी जिसमें पूजा के फल और ठेकुआ प्रसाद रखा जाता है।
अरघ (Arghya) अर्घ्य देना सूर्य देव को जल या दूध अर्पित करने की क्रिया।
बरतिया (Baratiya) व्रत करने वाले छठ व्रत रखने वाले श्रद्धालु (व्रती)।
सुरुज देव (Suruj Dev) सूर्य भगवान प्रत्यक्ष देवता जिनकी पूजा की जाती है।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पूजा का त्योहार वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। "स्वागत छठी माई के" गीत इस पर्व के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। यह गीत दर्शाता है कि कैसे पूरा परिवार और समाज मिलकर इस महापर्व की तैयारी करता है।

  • प्रकृति की पूजा: इस गीत में बांस, केले के पत्ते और नदी के घाट का वर्णन है, जो यह दर्शाता है कि सनातन धर्म में प्रकृति को ही ईश्वर का रूप माना गया है।
  • समानता का संदेश: छठ घाट पर अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं होता। सभी लोग एक साथ मिट्टी के चूल्हे पर प्रसाद बनाते हैं और एक ही घाट पर अर्घ्य देते हैं।
  • कठिन साधना: यह व्रत 36 घंटों के निर्जला उपवास के साथ किया जाता है, जो मनुष्य की मानसिक और शारीरिक दृढ़ता को बढ़ाता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह पावन छठ गीत हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण जीवन सीख देता है:

  1. स्वच्छता और अनुशासन: छठ पर्व में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। यह हमें अपने दैनिक जीवन में भी आंतरिक और बाहरी स्वच्छता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
  2. सामूहिकता की भावना: गीत में "सभ मिलि गावे गीत" पंक्ति हमें सिखाती है कि सुख-दुख और त्योहारों में समाज के सभी वर्गों को साथ मिलकर चलना चाहिए।
  3. धैर्य और प्रतीक्षा: सूर्य देव के उदित होने की प्रतीक्षा करना हमें सिखाता है कि जीवन के अंधकार के बाद प्रकाश का आना निश्चित है, बस हमें धैर्य रखना चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलने वाले चार दिवसीय महापर्व छठ के दौरान सुना जाता है। इसे निम्नलिखित अवसरों पर बजाया और गाया जाता है:

  • नहाय-खाय और खरना के दिन: जब व्रती प्रसाद बनाने की तैयारी करते हैं।
  • संध्या अर्घ्य के समय: जब पूरा परिवार घाट की ओर प्रस्थान करता है।
  • उषा अर्घ्य (सुबह का अर्घ्य): जब उगते हुए सूर्य देव का स्वागत किया जाता है।

आप इस पावन पर्व के बारे में अधिक जानने के लिए हमारी वेबसाइट पर छठ पूजा व्रत कथा भी पढ़ सकते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु (Key Point) संक्षिप्त विवरण (Brief Description)
मुख्य कलाकार पवन सिंह (Pawan Singh)
गीत का प्रकार भोजपुरी भक्ति लोकगीत
समर्पित देवता छठी मैया एवं सूर्य देव
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी और सिंथेसाइज़र
उपयुक्त अवसर छठ पूजा महापर्व

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय छठ गीत के गायक भोजपुरी फिल्म उद्योग के सुप्रसिद्ध गायक और अभिनेता पवन सिंह हैं।

यह गीत वर्ष 2021 में छठ पूजा के पावन अवसर पर रिलीज किया गया था और तब से यह हर साल छठ के दौरान बजाया जाता है।

बहंगी बांस से बना एक ढांचा होता है जिसके दोनों सिरों पर टोकरियां (दउरा) लटकाई जाती हैं। इसमें पूजा का पवित्र प्रसाद और फल रखकर पुरुष सदस्य अपने कंधे पर उठाकर घाट तक ले जाते हैं।

छठ पूजा में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य और उनकी मानस बहन या शक्ति "छठी मैया" (उषा और प्रत्युषा) की पूजा-अर्चना की जाती है।

छठ पूजा का व्रत कुल चार दिनों का होता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और समापन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है।

इस गीत का मुख्य संदेश छठी मैया के प्रति अटूट श्रद्धा, भक्ति, पवित्रता और सामूहिक रूप से त्योहार मनाने की खुशी को प्रकट करना है।

हाँ, यह लोकगीत की शैली में है और छठ पूजा के दौरान महिलाएं सामूहिक रूप से घाट पर या घर में पूजा की तैयारी करते समय इसे गा सकती हैं।

अर्घ्य देना सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का तरीका है, जो हमें जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य प्रदान करते हैं। डूबते और उगते सूर्य दोनों को अर्घ्य देना जीवन के उतार-चढ़ाव के प्रति समभाव को दर्शाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस गीत के बोलों की शुद्धता, इसके सांस्कृतिक संदर्भों और आध्यात्मिक भावों का गहन विश्लेषण कर इसे तैयार किया है। इस सामग्री का उद्देश्य पाठकों को लोक आस्था के महापर्व छठ और उससे जुड़े लोकगीतों के गहरे आध्यात्मिक अर्थों से परिचित कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भोजपुरी लोक साहित्य और पारंपरिक छठ गीत संग्रह।
  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं भविष्य पुराण में वर्णित सूर्य उपासना के नियम।
  • पवन सिंह के आधिकारिक संगीत एल्बम और डिजिटल प्लेटफॉर्म।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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