bholenath bhajan lyrics

ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

59 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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Bholenath Bhajan Lyrics

ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

देवादिदेव महादेव भगवान शिव को समर्पित यह पावन भजन "ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना" शिव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय और हृदय को स्पर्ष करने वाला संकीर्तन है। सनातन धर्म में भगवान शिव को 'आशुतोष' अर्थात अतिशीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। इस भजन के माध्यम से एक भक्त अपनी समस्त सांसारिक चिंताओं को त्यागकर देवाधिदेव महादेव को अपने गृहस्थ जीवन में आमंत्रित करता है, जिससे उसका घर-परिवार शिवमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाए। जब कोई साधक सच्चे प्रेम, विरह, और समर्पण के भाव से भोलेनाथ का आह्वान करता है, तो शिवजी अपने भक्तों की पुकार सुनकर कैलाश पर्वत से उतरकर उनके समीप आते हैं। यह भजन न केवल संगीतमय संकीर्तन का उत्तम माध्यम है, बल्कि यह मानव मन को वैराग्य, पवित्रता और परम शांति की ओर अग्रसर करने वाली एक दिव्य आध्यात्मिक यात्रा है। प्रातःकालीन वेला या संध्या वंदन के समय इस भजन का गान करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और सकारात्मक स्पंदनों का संचार होता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

(स्थायी - Mukhda)

ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना,
आकर के मेरे भोले बाबा भाग्य जगा जाना।
ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना...॥

(अंतरा 1 - First Antara)

डमरू वाले डमरू अपना बजाते आना,
नंदी पर चढ़कर भोले धूम मचाते आना।
गले में सर्प की माला गले लगाना,
ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना...॥

(अंतरा 2 - Second Antara)

भस्म रमाया तन पे जटा में गंगा धारी,
दर्शन देकर के मेरे संकट को काटो सारी।
प्रेम की गंगा मन में तुम भी बहा जाना,
ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना...॥

(अंतरा 3 - Third Antara)

भांग धतूरा भोग मैं तुमको लगाऊंगा,
चरण पखार के भोले तुमको रिझाऊंगा।
भक्तों की इस टोली में तुम भी समा जाना,
ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना...॥

(समापन - Refrain)

ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना,
आकर के मेरे भोले बाबा भाग्य जगा जाना।
हर हर महादेव शंभू, शंभू शंभू शंभू...॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस सुंदर भजन का प्रत्येक शब्द भक्त और भगवान के बीच के अनन्य प्रेम का प्रतीक है। 'ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना' पंक्ति में साधक का आर्त भाव झलकता है, जो यह निवेदन करता है कि हे कल्याणकारी शिव! आप मेरे साधारण से घर को अपने चरणों की धूल से पवित्र कर दीजिए। जब जीवन में बाधाएं और कष्ट बढ़ जाते हैं, तब भक्त अपनी सांसारिक तिजोरियों को संवारने की बजाय भगवान के भाग्य जगाने वाले आशीर्वाद की कामना करता है।

भजन के अंतरा में शिव के स्वरूप का सुंदर वर्णन किया गया है। 'डमरू वाले डमरू अपना बजाते आना'—यहाँ डमरू की ध्वनि ब्रह्मांड के नाद (ॐ) और सृजन का प्रतीक है। जब शिव अपनी जटा में गंगा और गले में नागराज को धारण करके आते हैं, तो वे साधक को यह सिखाते हैं कि विषैली परिस्थितियों को भी कैसे गले लगाना चाहिए और पवित्रता को कैसे जीवन में उतारना चाहिए। भांग और धतूरे का भोग इस बात का द्योतक है कि भगवान शिव को किसी महंगे आभूषण या पकवान की नहीं, बल्कि केवल सच्चे प्रेम और समर्पण की आवश्यकता होती है। यह भजन साधक के भीतर छिपे अहंकार को मिटाकर उसे भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • देवाधिदेव महादेव की महिमा: यह भजन भगवान शिव के सौम्य और आशुतोष स्वरूप का गुणगान करता है, जो अपने भक्तों के एक लोटा जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
  • नकारात्मकता का नाश: शिव के संकीर्तन मात्र से घर की नकारात्मक ऊर्जा, वास्तु दोष और मानसिक संताप दूर होते हैं।
  • वैराग्य और गृहस्थ का समन्वय: यह भजन सिखाता है कि कैसे गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी शिव की भक्ति के माध्यम से परम शांति प्राप्त की जा सकती है।
  • ग्रह दोष निवारण: शिव उपासना से कुंडली में उपस्थित चंद्र दोष, शनि की साढ़ेसाती एवं महामृत्युंजय मंत्र के प्रभाव से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
  • अधिक जानकारी के लिए आप हमारा शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र का पावन पाठ भी देख सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

शिव भजनों का संकीर्तन करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:00 से 6:00 बजे तक) या प्रदोष काल (संध्या के समय) को सबसे उत्तम माना गया है। सोमवार के दिन और महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस भजन का सामूहिक गान विशेष फलदायी होता है।

विधि: स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। अपने घर के पूजा स्थल या शिवालय में दीपक प्रज्वलित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और कच्चा दूध अर्पित करें। इसके पश्चात मन को शांत करके इस भजन का सस्वर पाठ करें। संकीर्तन के अंत में भगवान शिव की आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें। आप हमारी शिव आरती लिरिक्स पोस्ट से संपूर्ण आरती पढ़ सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु भगवान शिव (भोलेनाथ) और जगत जननी माता पार्वती हैं। सनातन परंपरा में आदि गुरु शंकराचार्य, संत तुलसीदास और विभिन्न नाथ योगियों ने शिव भक्ति की इस धारा को जन-जन तक पहुँचाया है। शिव को योगियों के आदि गुरु और संगीत एवं नृत्य (नटराज) के देवता के रूप में पूजा जाता है। इस भजन का गायन करने से साधक को शिव-पार्वती दोनों का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह पारंपरिक लोक भजन (Traditional Folk Bhajan) भारतीय सनातन संस्कृति और ग्रामीण अंचलों की भजन मंडलियों से उत्पन्न हुआ है। समय-समय पर विभिन्न लोक कलाकारों और प्रसिद्ध संकीर्तन गायकों ने इसे अपनी मधुर वाणी से सजाया है। इस प्रकार के भजनों की कोई एक निश्चित रचना तिथि नहीं होती, बल्कि यह मौखिक परंपरा (Shruti Tradition) के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी भक्तों के हृदय में जीवित रहे हैं और आज भी हर शिव भक्त की जुबान पर प्रयुक्त होते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी, ब्रज और अवधी के सहज मिश्रण से रचित है, जिसे सामान्य से सामान्य भक्त भी आसानी से समझ सकता है और गा सकता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहित और लयात्मक है। भजन में 'डमरू', 'भस्म', 'गंगा धारी', और 'नंदी' जैसे पारंपरिक प्रतीकों का बहुत ही सुंदर रूपक के रूप में प्रयोग किया गया है, जो श्रोताओं के मन में भगवान शिव के सजीव स्वरूप का चित्र अंकित कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • समर्पण का भाव: भगवान को प्रसन्न करने के लिए बाह्य दिखावे की नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धता और समर्पण की आवश्यकता होती है।
  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य: जिस प्रकार शिव ने हलाहल विष को अपने गले में धारण किया, उसी प्रकार मनुष्य को जीवन के संकटों में धैर्य नहीं खोना चाहिए।
  • सांसारिक मोह से मुक्ति: भस्म का लेप यह संदेश देता है कि यह संसार नश्वर है, अतः आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानना ही जीवन का परम लक्ष्य है।
  • समान आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए आप भगवद गीता सार का अध्ययन कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद (Word/Phrase) सरल अर्थ (Simple Meaning) आध्यात्मिक संदर्भ (Context)
भोलेनाथ जो बहुत भोले और दयालु हैं भगवान शिव का नाम, जो शीघ्र प्रसन्न होते हैं
डमरू शिव का वाद्य यंत्र ब्रह्मांड के प्रथम नाद और सृजन का प्रतीक
भस्म राख जीवन की नश्वरता और वैराग्य का प्रतीक
नंदी शिव का वाहन (वृषभ) धर्म और अटूट निष्ठा का प्रतीक
चरण पखारना चरण धोना भगवान के प्रति अगाध श्रद्धा और सेवा भाव

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना..."
भक्त का यह आह्वान केवल एक गीत नहीं, बल्कि आत्मा की वह पुकार है जिसमें वह परमात्मा को अपने हृदय रूपी मंदिर और गृहस्थ जीवन में स्थायी निवास देने की प्रार्थना करता है।

"डमरू वाले डमरू अपना बजाते आना..."
डमरू की गूंज से साधक के जीवन में व्याप्त अज्ञानता का अंधकार दूर होता है और चेतना जागृत होती है। भक्त चाहता है कि शिव अपनी उपस्थिति से उसके जीवन को उत्सवमय बना दें।

"भस्म रमाया तन पे जटा में गंगा धारी..."
यह पंक्ति भगवान शिव के महान त्याग और पवित्रता को दर्शाती है। जो भौतिक सुखों से विरक्त हैं, वे ही साधक को आंतरिक सुख प्रदान कर सकते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

ॐ नमः शिवाय

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वा अपराधं। विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शंभो॥

शिव संकीर्तन के पश्चात इस क्षमा प्रार्थना श्लोक का पाठ करने से साधक के सभी प्रकार के मानसिक और शारीरिक पाप नष्ट होते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम (Bhajan Name) ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना
समर्पित देवता (Deity) भगवान शिव (महादेव / भोलेनाथ)
रचनाकार (Composer) पारंपरिक लोक रचना (Traditional Folk)
भाषा (Language) सरल हिंदी / ब्रज / अवधी
भक्ति भाव (Bhava) प्रेम, विनय, समर्पण एवं आनंद
उपयुक्त अवसर (Occasion) सोमवार व्रत, शिवरात्रि, सावन मास एवं सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. 'ओ शंकर भोलेनाथ हमारे घर आ जाना' भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन देवाधिदेव महादेव भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।

Q2. इस भजन को गाने का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, प्रदोष काल में या सोमवार के दिन विशेष रूप से गाया जाता है।

Q3. इस भजन के गायन से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?

इसके गायन से मन को शांति मिलती है, घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शिव जी की कृपा प्राप्त होती है।

Q4. क्या इस भजन को घर पर परिवार के साथ गाया जा सकता है?

हाँ, यह एक अत्यंत मधुर पारिवारिक और सत्संग भजन है जिसे सभी उम्र के लोग आसानी से गा सकते हैं।

Q5. भगवान शिव को कौन सा भोग सबसे प्रिय है?

भगवान शिव को भांग, धतूरा, मदार के पुष्प, बेलपत्र और पंचामृत का भोग अति प्रिय है।

Q6. क्या इस भजन को सावन मास में विशेष रूप से गाया जाता है?

हाँ, सावन के पवित्र महीने और महाशिवरात्रि पर शिव भजनों का संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

Q7. शिव भक्ति का मूल संदेश क्या है?

अहंकार का त्याग करना, सत्य को अपनाना और भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण रखना ही शिव भक्ति का मूल है।

Q8. इस भजन को याद रखने का सबसे आसान तरीका क्या है?

इसके स्थायी और अंतरों को लयबद्ध तरीके से बार-बार गुनगुनाने से यह आसानी से याद हो जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख पारंपरिक सनातन लोक साहित्य, शिव पुराण के कथा प्रसंगों और प्रामाणिक devotional परंपराओं के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध भक्ति साहित्य और उसके आध्यात्मिक अर्थ से अवगत कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव महापुराण - कोटि रुद्र संहिता एवं विद्यासंहिता
  • भारतीय लोक भजन परंपरा एवं सनातन संकीर्तन ग्रंथ
  • पारंपरिक शिव स्तोत्र एवं स्तुति संग्रह

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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