Parvati Stotram

सबसे सुपरहिट छठ गीत छठी माई के परबिया भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

56 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सबसे सुपरहिट छठ गीत छठी माई के परबिया भक्ति इन हिंदी लिरिक्स

छठी मईया की उपासना और लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा सनातन संस्कृति में विशेष स्थान रखता है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों से शुरू हुआ यह पावन पर्व आज वैश्विक स्तर पर अपनी सांस्कृतिक भव्यता और अनुशासन के लिए जाना जाता है। इस महापर्व के दौरान गाए जाने वाले लोकगीत और भक्ति रचनाएं न केवल कर्णप्रिय होती हैं, बल्कि इनमें प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम, सूर्य नारायण की उपासना और छठी मईया के प्रति अनन्य समर्पण का भाव कूट-कूट कर भरा होता है। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय भजन है — "छठी माई के परबिया"। प्रसिद्ध गायक अंकुश राजा की मधुर वाणी में सजा यह गीत आज हर छठ घाट और घर-घर की गूंज बन चुका है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस सुपरहिट छठ गीत के संपूर्ण बोल, इसका गहरा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अर्थ, तथा छठ पर्व के महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यदि आप छठ महापर्व के दौरान अपने घरों और अनुष्ठानों में भक्ति रस का संचार करना चाहते हैं, तो यह गीत आपके लिए अत्यंत प्रेरणादायक सिद्ध होगा। आइए इस पावन भजन के माध्यम से छठी मईया के चरणों में अपनी निष्ठा अर्पित करें और इस महान व्रत के रहस्यों को समझें।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ छठी माई के परबिया भक्ति गीत ॥

उगी हे सुरुज देव भइले अरघ के बेर,
लहकऽ तऽ तपन तोहर लागे सुघरेर।
घाट पर उमड़ल बाटे भक्तन के भीड़,
सुनऽ छठी माई हरऽ सबकर पीर।
आइल बा परबिया छठी माई के, गूंजे गीत गवना के,
मिलल बा हमके आसीस छठी माई के दुलार के!

नदी किनारे सजेले सुघर अरघिया,
दउरा भरल बा सुथारो ठेकुआ अरुअरिया।
केरा के पात पर दीपक झगमगावे,
सारा परिवार मिलि छठी मईया के धियावे।
भोरहिन के बेरिया जगे सारा संसार,
छठी मईया देहिं सभके सुखी परिवार।

निर्मल मन आ उपवास चार दिन के व्रत इहे,
ना रहे कवनो दुःख, सुख मिले सब कहूँ इहे।
अंकुश राजा के सुर में गूंजे मइया के गान,
भक्तन के हिय में बसल बाटे छठी माई के स्थान।
जय छठी मईया! जय सुरुज देव! बोलिए छठी मइया की जय!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह लोकगीत छठ पर्व के दौरान भक्तों की आंतरिक भावनाओं, उमंग और श्रद्धा का सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है। गीत की पहली पंक्तियों में भगवान सूर्य नारायण से विनती की जा रही है कि हे सूर्य देव! अब अर्घ्य देने का समय हो गया है, आप अपनी किरणों से इस संसार को प्रकाशित करें और भक्तों की पुकार सुनें। छठ घाट पर उमड़ी भारी भीड़ और भक्तों का उत्साह यह दर्शाता है कि छठी मईया अपने हर सच्चे भक्त की पीड़ा का निवारण करती हैं।

मध्य भाग में छठ पूजा की अनुष्ठानिक भव्यता का वर्णन है। नदी और तालाबों के घाटों पर सजी हुई पूजा की दउरिया (बांस की टोकरी), जिसमें ठेकुआ, चावल के लड्डू, मौसमी फल और गन्ने सजाए जाते हैं, इस पर्व की सांस्कृतिक पहचान हैं। केले के पत्तों पर जलते हुए दीप और परिवारों का एक साथ मिलकर छठी मईया की आराधना करना हमारी संयुक्त परिवार प्रणाली और सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक है। भोर के समय जब पूरा संसार सोया होता है, तब छठ व्रती और उनके परिजन सूर्योदय की प्रतीक्षा में जल में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं।

अंतिम चरणों में चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत के अनुशासन और आत्मसंयम की महत्ता को दर्शाया गया है। निर्मल मन से किया गया यह व्रत अहंकार को मिटाकर अंतरात्मा को पवित्र करता है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का जीवंत दस्तावेज है, जो हमें प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञ होना सिखाता है। अधिक जानकारी के लिए आप छठी मईया की संपूर्ण पूजा विधि और विधान के बारे में भी पढ़ सकते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भक्ति गीत की मूल भावना कृतज्ञता, समर्पण और सामूहिक उल्लास है। छठ पर्व एकमात्र ऐसा लोक उत्सव है जिसमें अस्त होते सूर्य और उदय होते सूर्य दोनों की पूजा की जाती है। यह गीत हमें सिखाता है कि जीवन में केवल सफलता (उदय) ही नहीं, बल्कि कठिन समय (अस्त) का भी समान भाव से स्वागत करना चाहिए। प्रकृति के पांच महाभूतों—जल, अग्नि, वायु, आकाश और पृथ्वी—के प्रति आभार व्यक्त करना इस गीत और संपूर्ण पर्व का मुख्य संदेश है। इसके अलावा, सूर्य देव की स्तुति और उनके मंत्रों के जाप से जीवन में आरोग्यता और तेज की प्राप्ति होती है, जो इस गीत का आध्यात्मिक पक्ष है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम छठी माई के परबिया (Chhathi Maai Ke Karabia)
गायक / कलाकार अंकुश राजा (Ankush Raja)
भाषा भोजपुरी / हिंदी लोक भाषा
विषय / थीम छठी मईया की महिमा, सूर्य उपासना, लोक आस्था
भाव भक्ति, उल्लास, कृतज्ञता और समर्पण
संबंधित पर्व छठ महापर्व (Chhath Puja)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी संगीत जगत में लोक संस्कृति और पारंपरिक गीतों को आधुनिक शैली में पुनर्जीवित करने वाले कलाकारों में अंकुश राजा का नाम अत्यंत आदर के साथ लिया जाता है। उनकी आवाज में एक खास मिठास और ग्रामीण परिवेश की सौंधी खुशबू होती है, जो श्रोताओं के दिलों को छू लेती है। लोकगीतों के माध्यम से सनातन संस्कृति की परंपराओं को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने में ऐसे कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस गीत के संगीत संयोजन में पारंपरिक ढोल, झाल, मृदंग और लोक धुनों का सुंदर मिश्रण किया गया है, जो इसे और अधिक आकर्षक बनाता है। पारंपरिक पर्वों के गीतों के बारे में अधिक जानने के लिए आप भक्ति गीत संग्रह और लोक परंपराएं लेख का अवलोकन कर सकते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
परबिया पर्व या त्योहार छठ के पावन त्योहार के संदर्भ में
अरघिया सूर्य देव को दिया जाने वाला अर्घ्य (जल और दूध) घाट पर पूजा के समय
दउरा बांस से बनी टोकरी जिसमें पूजा सामग्री रखी जाती है छठ पूजा की सामग्री
ठेकुआ गेहूं के आटे और गुड़ से बना पारंपरिक प्रसाद छठ का मुख्य प्रसाद
भोरहिन भोर का समय या सुबह-सुबह प्रातःकालीन अर्घ्य का समय

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव है। यह गीत समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है। जाति, ऊंच-नीच के भेदों को भुलाकर सभी लोग एक ही घाट पर खड़े होकर सूर्य भगवान को अर्ق अर्पित करते हैं। इस गीत का सुनना और गाना हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा, सादगी और पर्यावरण के प्रति प्रेम जागृत करता है। सूर्य को आरोग्यता का देवता माना गया है, और उनकी उपासना से शारीरिक एवं मानसिक शुद्धि होती है। आप हमारे दीपावली से छठ तक के पावन उत्सवों की श्रृंखला लेख से भी जुड़ सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह गीत और छठ पर्व हमें जीवन के कई मूल्यवान पाठ सिखाते हैं:

  • कठोर अनुशासन: चार दिनों का यह व्रत आत्मसंयम, स्वच्छता और पवित्रता का संदेश देता है।
  • प्रकृति प्रेम: सूर्य, जल, नदी और कृषि उपज के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना जीवन का आधार है।
  • सामूहिक सद्भाव: घाट पर सभी का एक समान रूप से एकत्र होना सामाजिक समरसता को बढ़ावा देता है।
  • धैर्य और निष्ठा: उगते और डूबते दोनों सूर्यों की वंदना सिखाती है कि जीवन के हर दौर में ईश्वर के प्रति आस्था रखनी चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि के दौरान यानी छठ महापर्व के दिनों में सर्वाधिक सुना और गाया जाता है। इसके अलावा, घरों में होने वाले मांगलिक कार्यों, लोक उत्सवों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी इस प्रकार के पारंपरिक गीतों की विशेष धूम रहती है। महिलाएं जब छठ घाट पर जाने के लिए तैयार होती हैं या पकवान (ठेकुआ) बनाती हैं, तब ऐसे गीत वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

शीर्षक सबसे सुपरहिट छठ गीत छठी माई के परबिया
मुख्य गायक अंकुश राजा
संगीत शैली लोकगीत / भोजपुरी भक्ति संगीत
मुख्य आराध्य छठी मईया और सूर्य देव
सांस्कृतिक महत्व लोक आस्था, स्वच्छता और प्रकृति वंदना
विशेषता पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत का सुंदर मेल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय छठ गीत को प्रसिद्ध भोजपुरी गायक अंकुश राजा ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

छठ पूजा मूल रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बहुत धूमधाम से मनाई जाती है, हालांकि अब यह देश-विदेश के हर कोने में मनाई जाती है जहाँ पूर्वांचली लोग निवास करते हैं।

छठ महापर्व कुल चार दिनों तक चलता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इसके बाद खरना, संध्या अर्घ्य और अंत में उषा अर्घ्य (पारण) के साथ इसका समापन होता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठी मईया को भगवान सूर्य की बहन या प्रकृति देवी का रूप माना जाता है, जो संतानों की रक्षा, लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

छठ पूजा का मुख्य प्रसाद ठेकुआ (गेहूं के आटे और गुड़ से बना मिष्ठान) होता है, साथ ही इसमें विभिन्न मौसमी फल, कंदमूल और चावल के लड्डू भी चढ़ाए जाते हैं।

सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है जो समस्त जीवों को ऊर्जा, स्वास्थ्य, प्रकाश और जीवन प्रदान करते हैं। इसलिए उनकी कृपा प्राप्ति के लिए यह व्रत रखा जाता है।

हाँ, यह गीत बेहद कर्णप्रिय और पवित्र है। इसे छठ पूजा के दौरान अपने घरों, पूजा स्थलों और घाटों पर सुनकर भक्तिमय वातावरण बनाया जा सकता है।

छठ गीत भारतीय लोक संगीत की अनमोल धरोहर हैं, जो पीढ़ियों से मौखिक परंपरा के माध्यम से आगे बढ़ते आ रहे हैं और सनातन संस्कृति की गहरी जड़ों को प्रदर्शित करते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन संस्कृति, लोक परंपराओं और संगीत के प्रामाणिक स्रोतों का अध्ययन करके तैयार की गई है। इस लेख का उद्देश्य छठ महापर्व के सांस्कृतिक महत्व और इस लोकप्रिय भक्ति गीत के भावों को पाठकों तक सहज रूप से पहुँचाना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत सभी तथ्यों और गीतों के बोलों को पूरी शुद्धता के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि उपयोगकर्ताओं को सर्वोत्तम अनुभव प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक गाथाएं एवं क्षेत्रीय संगीत परंपरा
  • सूर्य पुराण एवं सनातन संस्कृति के पर्व विधान
  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं संगीत संग्रह
  • विभिन्न लोक उत्सवों और व्रत कथाओं के पारंपरिक ग्रंथ

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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