सनातन धर्म में सूर्य उपासना और प्रकृति पूजा का सबसे पावन और महापर्व "छठ पूजा" है। इस महापर्व के अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक और आधुनिक गीत न केवल उत्सव के माहौल को भक्तिमय बनाते हैं, बल्कि साधक के हृदय में अटूट श्रद्धा का संचार भी करते हैं। ऐसा ही एक अत्यंत लोकप्रिय और भावपूर्ण गीत है "यहाँ छठ पूजा हो रही है" (Yahan Chhath Pooja Ho Rahi Hai)। यह गीत छठ महापर्व की भव्यता, पवित्रता और सामूहिक उल्लास को बेहद खूबसूरती से दर्शाता है। जब घाटों पर गेंदे के फूलों की महक, धूप-दीप की सुगंध और ठेकुआ का पावन प्रसाद तैयार होता है, तब इस गीत की मधुर ध्वनि हर भक्त के हृदय को छठी मैया के चरणों में समर्पित कर देती है। इस लेख में हम इस पावन गीत के संपूर्ण बोल, उसका विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और छठ पूजा से जुड़े विभिन्न शास्त्रीय पहलुओं का गहराई से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
॥ यहाँ छठ पूजा हो रही है ॥
कोरस (मुखड़ा):
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
होई ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाट पहुंचाए।
सज गए हैं सारे घाट, दीपों की सुंदर कतार है,
यहाँ छठ पूजा हो रही है, छठी मैया का दरबार है।
यहाँ छठ पूजा हो रही है, छठी मैया का दरबार है॥
अंतरा 1:
दउरा सजा के माथे पे उठाए, सब घाट की ओर चले हैं।
छठी मैया के गीतों से, आज गूंज रहे सब गली-कूचे हैं।
लाल-पीले वस्त्रों में सजी, हर सुहागिन नारी है,
अर्घ्य देने की पावन बेला, अब आने वाली है।
यहाँ छठ पूजा हो रही है, छठी मैया का दरबार है॥
अंतरा 2:
ठेकुआ और खजूर का प्रसाद, मैया को अति भाता है।
जो भी मांगे सच्चे मन से, वह मनचाहा फल पाता है।
व्रतियों के चेहरे पर तेज है, उपवास का यह प्रताप है,
छठी मैया की कृपा से, मिट जाते सारे पाप हैं।
यहाँ छठ पूजा हो रही है, छठी मैया का दरबार है॥
अंतरा 3:
उगते हुए सूरज देव को, सब मिलकर अर्घ्य चढ़ाते हैं।
सुख-समृद्धि और आरोग्य का, मैया से वर पाते हैं।
श्रद्धा और विश्वास का, यह अनुपम त्योहार है,
यहाँ छठ पूजा हो रही है, छठी मैया का दरबार है॥
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह पावन छठ गीत "यहाँ छठ पूजा हो रही है" केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह छठ महापर्व के दौरान दिखने वाले जीवंत दृश्यों और भावनाओं का एक संगीतमय चित्रपट है। इस गीत का भावार्थ अत्यंत सरल और हृदयस्पर्शी है:
मुखड़ा: गीत की शुरुआत पारंपरिक लोक पंक्तियों "कांच ही बांस के बहंगिया..." से होती है, जो छठ पूजा की रीढ़ मानी जाती हैं। इसमें नवविवाहिता या व्रती अपने पति से कहती है कि बांस की बहंगी (जिसमें पूजा का प्रसाद और फल रखे जाते हैं) बहुत कोमल है और वह भार से लचक रही है। हे स्वामी! आप स्वयं कहार (भार उठाने वाले) बनिए और इस पावन बहंगी को नदी के घाट तक सुरक्षित पहुंचाइए। इसके बाद आधुनिक पंक्तियों में बताया गया है कि नदी के सभी घाट सुंदर ढंग से सज चुके हैं, चारों तरफ दीपों की कतारें जगमगा रही हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि यहाँ छठी मैया का दिव्य दरबार सज चुका है और महापर्व की शुरुआत हो चुकी है।
प्रथम अंतरा: इस अंतरे में घाट की ओर प्रस्थान करने वाले भक्तों का सुंदर वर्णन है। पुरुष अपने सिर पर पीतल या बांस के दउरा (बड़ी टोकरी) को उठाकर नंगे पैर घाट की ओर चल रहे हैं। गलियों और रास्तों में केवल छठी मैया के पारंपरिक गीत गूंज रहे हैं। सुहागिन महिलाएं लाल और पीले रंग की साड़ियों में सजी हुई हैं, जो सौभाग्य और पवित्रता का प्रतीक हैं। सभी भक्त उस पावन क्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
द्वितीय अंतरा: यहाँ छठ पूजा के मुख्य प्रसाद "ठेकुआ" और "खजूर" की महिमा गाई गई है। यह प्रसाद शुद्ध घी, गेहूं के आटे और गुड़ से बनाया जाता है, जो छठी मैया को अत्यंत प्रिय है। गीतकार कहते हैं कि जो भी भक्त सच्चे मन से मैया की शरण में आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्रतियों (व्रत रखने वालों) के चेहरे पर जो अलौकिक तेज दिखाई देता है, वह उनके कठिन 36 घंटे के निर्जला उपवास का ही प्रताप है। मैया की कृपा से मनुष्य के सभी संताप और पाप नष्ट हो जाते हैं।
तृतीय अंतरा: अंतिम अंतरे में अर्घ्य दान की महिमा का वर्णन है। छठ पर्व में डूबते और उगते दोनों सूर्यों की पूजा की जाती है। जब सुबह के समय उगते हुए सूर्य देव को दूध और जल से अर्घ्य दिया जाता है, तो पूरा घाट भक्ति के रस में सराबोर हो जाता है। सभी भक्त सूर्य देव और छठी मैया से अपने परिवार के लिए सुख, समृद्धि, दीर्घायु और आरोग्य का वरदान मांगते हैं। यह त्योहार पूरी तरह से अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की मुख्य भावना "पूर्ण समर्पण" (Total Surrender) और "सामूहिकता" (Community Harmony) है। छठ पूजा एक ऐसा त्योहार है जिसमें किसी पुरोहित या पंडित की आवश्यकता नहीं होती। भक्त सीधे प्रकृति के प्रत्यक्ष देवता, भगवान सूर्य और उनकी शक्ति छठी मैया (उषा और प्रत्युषा) से जुड़ते हैं। यह गीत संदेश देता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है; केवल शुद्ध मन, पवित्रता और श्रद्धा ही पर्याप्त हैं। बांस की बहंगी, मिट्टी के दीये और घर का बना सात्विक प्रसाद यह दर्शाते हैं कि हमारी संस्कृति प्रकृति के कितने करीब है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण (Parameter) | जानकारी (Details) |
|---|---|
| गीत का नाम (Song Name) | यहाँ छठ पूजा हो रही है (Yahan Chhath Pooja Ho Rahi Hai) |
| रिलीज वर्ष (Release Year) | 2021 |
| मुख्य विषय (Theme) | छठ महापर्व, सूर्य उपासना, छठी मैया की महिमा |
| भाषा (Language) | हिंदी और भोजपुरी का सुमधुर मिश्रण (Folk-Mix) |
| मुख्य वाद्य यंत्र (Instruments) | ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, सिंथेसाइज़र |
| भक्ति रस (Devotional Mood) | उत्सव रस, शांत रस, वात्सल्य रस |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
वर्ष 2021 में रिलीज हुआ यह विशेष छठ गीत आधुनिक संगीत तकनीकों और पारंपरिक लोक धुनों का एक अद्भुत संगम है। इस गीत को नए कलाकारों द्वारा अत्यंत सुरीली और भावुक आवाज में गाया गया है। छठ के गीतों में जो दर्द, पुकार और ममता का भाव होता है, उसे इस गीत के गायकों ने पूरी तरह से आत्मसात किया है। संगीतकार ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक और मंजीरे के साथ-साथ आधुनिक कीबोर्ड का ऐसा संतुलन बनाया है जो युवाओं और बुजुर्गों दोनों को समान रूप से आकर्षित करता है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| कठिन शब्द (Word) | सरल अर्थ (Meaning) | सांस्कृतिक संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| बहंगिया (Bahangiya) | बांस से बना हुआ लचीला डंडा | इसके दोनों सिरों पर टोकरियां लटकाकर पूजा की सामग्री घाट तक ले जाई जाती है। |
| कहरिया (Kahariya) | कंधे पर भार उठाने वाला सेवक या साथी | छठ में पति या परिवार का सदस्य श्रद्धापूर्वक दउरा उठाता है। |
| दउरा (Daura) | बांस की बड़ी गोल टोकरी | इसमें छठ पूजा के सभी फल, ठेकुआ और पूजा सामग्री रखी जाती है। |
| अर्घ्य (Arghya) | देवता को जल या दूध अर्पित करना | सूर्य देव को संध्या और उषा काल में दिया जाने वाला पवित्र अर्पण। |
| व्रती (Vrati) | व्रत रखने वाला साधक | जो अत्यंत कठिन नियमों का पालन करते हुए 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं। |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पूजा का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, कार्तिक मास में सूर्य की किरणें पृथ्वी पर विशेष कोण से पड़ती हैं, जो मानव शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी होती हैं। इस गीत में जिस "तेज" और "आरोग्य" की बात की गई है, वह सूर्य देव की साक्षात् ऊर्जा का प्रतीक है।
सांस्कृतिक रूप से, यह गीत समाज में समानता का संदेश देता है। छठ महापर्व में अमीर हो या गरीब, सभी एक ही नदी के घाट पर, एक जैसी मिट्टी और बांस की सामग्रियों से पूजा करते हैं। इस गीत की पंक्तियां "सज गए हैं सारे घाट..." इसी सामाजिक समरसता और एकता को रेखांकित करती हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रकृति ही हमारी वास्तविक जननी है और उसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- पवित्रता और अनुशासन: छठ पूजा में शारीरिक और मानसिक स्वच्छता का जो स्तर बनाए रखा जाता है, वह हमें अपने दैनिक जीवन को भी अनुशासित और शुद्ध रखने की प्रेरणा देता है।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: सूर्य, जल, वायु और मिट्टी के बिना जीवन असंभव है। यह गीत हमें इन प्राकृतिक संसाधनों के प्रति आभार व्यक्त करना सिखाता है।
- कठिन साधना और धैर्य: 36 घंटे का निर्जला व्रत हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी कैसे धैर्य और संकल्प शक्ति के साथ अडिग रहा जाए।
- पारिवारिक और सामाजिक सहयोग: दउरा उठाना, घाट सजाना और मिलकर गीत गाना हमें सिखाता है कि बड़े कार्य हमेशा सामूहिक सहयोग से ही सफल होते हैं।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यद्यपि इस गीत को कार्तिक मास की शुरुआत से ही सुना जाने लगता है, लेकिन छठ महापर्व के चार विशेष दिनों में इसका महत्व पराकाष्ठा पर होता है:
- नहाय-खाय (पहला दिन): इस दिन घर की सफाई और सात्विक भोजन तैयार करते समय इस गीत को सुनने से मन शांत और संकल्पित होता है।
- खरना (दूसरा दिन): शाम को प्रसाद बनाने और मैया के ध्यान के समय यह गीत भक्ति का माहौल बनाता है।
- संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): जब पूरा परिवार घाट की ओर प्रस्थान करता है, तब यह गीत हर भक्त के मोबाइल और लाउडस्पीकर पर गूंजता है।
- उषा अर्घ्य (चौथा दिन): सुबह के समय उगते सूर्य का इंतजार करते हुए इस गीत का गायन मन में नई ऊर्जा भर देता है।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| मुख्य बिंदु (Key Point) | संक्षिप्त विवरण (Quick Info) |
|---|---|
| गीत का शीर्षक | यहाँ छठ पूजा हो रही है |
| मुख्य आराध्य देव | भगवान सूर्य देव एवं छठी मैया (कात्यायनी देवी का स्वरूप) |
| मुख्य वाद्य शैली | पारंपरिक लोक संगीत (Folk Devotional) |
| उपयुक्त अवसर | कार्तिक छठ पूजा, चैती छठ पूजा |
| मुख्य संदेश | श्रद्धा, पवित्रता, सामाजिक समरसता और प्रकृति प्रेम |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तिलोक के विद्वान संपादकों द्वारा सनातन धर्म के शास्त्रों, लोक परंपराओं और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। इस गीत की व्याख्या में लोक संस्कृति और शास्त्रीय सूर्य उपासना के सिद्धांतों का विशेष ध्यान रखा गया है। यह सामग्री पूरी तरह से मौलिक और शोध पर आधारित है।
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स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- ऋग्वेद: सूर्य सूक्त एवं उषा वंदना प्रसंग।
- भविष्य पुराण: सूर्य देव की महिमा और व्रत विधान।
- लोक साहित्य: बिहार और पूर्वांचल की पारंपरिक छठ लोक कथाएं एवं लोक गीत संग्रह।
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