Parvati Stotram

ॐ गं गणपतये नमो नम: नाड प्रतिष्ठित पीताम्बर हे रूद्र प्रिय विघ्न हर्ता भजन इन हिंदी लिरिक्स

47 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

ॐ गं गणपतये नमो नम:
नाड प्रतिष्ठित , पीताम्बर, हे रूद्र प्रिय , विघ्न हर्ता , गणेश !
सर्व देवों में प्रथम पूज्य हो तुम , हे विश्व राजा तुम सुपुत्र महेश !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: . गणपती बाप्पा मोरया ...
हे वीर गणपति, उमा पुत्र, हे सुमुख, स्वरुप, तुम्हे प्रिय मोदक !
तुम्हे प्रथम निमंत्रण हो जिसका, उस काज में ना कोई अवरोधक !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: गणपती बाप्पा मोरया ...
हे मुक्ति दाई, हे मनोमय, हे कृपा कर, कीर्ति, बुद्धि नाथ !
विघ्न बाधा सबकी हर्ता है , चाहे बल शाली हो या अनाथ !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: गणपती बाप्पा मोरया ...
हे कपिल, हरिद्र, गदाधर , तेरा नाम एक और है -एक दन्त !
बिगड़ी सबकी तूं बनाता है, चाहे हो गृहस्थी या हो वो संत !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: गणपती बाप्पा मोरया ...
विघ्न हर, विघ्न विनाशन , हे देवान्तक,तेरा नाम और इक- लंबोदर !
शंकर -पार्वती के पुत्र हो तुम, बलशाली कार्तिक है आपके सहोदर !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: गणपती बाप्पा मोरया ...
हे भाल चंद्र, हे धूम्र वर्ण, हे एकाक्षर ,तुम मंगल मूर्ति !
जो ध्याता तुमको निश दिन है, होती उनकी सर्व इच्छा पूर्ती !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: गणपती बाप्पा मोरया ...
तेरा नाम महाबल, मूषक वाहन, सर्व पूजा में तूं प्रथमेश्वर !
निदीश्वरम, हे भूप कर्ण , हे शुभम ,अखरथ परमेश्वर !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: गणपती बाप्पा मोरया ...
अमित, अलम्पता , अविघ्न ,तेरा नाम भीम और देवादेव !
हे गजानंद ,चतुर्भुज, भूपति, तेरे पिता का नाम है महादेव !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: गणपती बाप्पा मोरया ...
आओ करें आराधना गणपति की और लगाये प्रभु के भाल पर चन्दन !!
ओमकार, सर्वात्मन ,शशिवर्णम, तूं शिव पुत्र तेरा नाम है नंदन !
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: गणपती बाप्पा मोरया ...
हे तरुण, यज्ञकाय, यशष्कर, तूं है देवो में मुक्तिदाई !
जीवन में न कोई हो संकट ,जो ध्यावे उनका जीवन सुखदाई !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: . गणपती बाप्पा मोरया ...
विद्या वारिधि , तूँ विघ्नराज, हे विघ्नेश्वर, तूं है दुर्जा !
जो जो भी तुमको ध्याता है, उन्हें मिलती है शक्ति और ऊर्जा !!
ॐ गं गणपतये नमो नम:
श्री सिध्धीविनायक नमो नम: अष्टविनायक नमो नम: ... गणपती बाप्पा मोरया ...

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन " ॐ गं गणपतये नमो नम: नाड प्रतिष्ठित पीताम्बर हे रूद्र प्रिय विघ्न हर्ता भजन इन हिंदी लिरिक्स" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!