Shyam Bhajan

राम कहो या श्याम मुरली वाला भजन इन हिंदी लिरिक्स

64 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भक्ति की अनंत और पावन धारा में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का रूप एक ही परम चेतना के दो सुंदर विग्रह माने गए हैं। "राम कहो या श्याम मुरली वाला भजन इन हिंदी लिरिक्स" सनातन संस्कृति के उस महान अद्वैत भाव का जीवंत प्रकटीकरण है, जो हमें यह सिखाता है कि कण-कण और रोम-रोम में व्याप्त ईश्वरीय शक्ति एक ही है, चाहे उसे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के रूप में पुकारा जाए अथवा बंसी वाले बांके बिहारी श्रीकृष्ण के रूप में। यह लोकप्रिय भजन भक्तों के मन में अनन्य समर्पण, अगाध प्रेम और संपूर्ण विश्वास का भाव जगाता है। इस विस्तृत एवं प्रामाणिक मार्गदर्शिका में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, दार्शनिक महत्व, गायन की विधि और जीवनोपयोगी आध्यात्मिक संदेशों को विस्तार से जानेंगे। यह भजन न केवल संगीतमय दृष्टि से मनमोहक है, बल्कि साधक के अंतःकरण को शुद्ध करने वाला एक उच्चकोटि का आध्यात्मिक साधन भी है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

राम कहो या श्याम मुरली वाला,
देता है एक राम देने वाला!
कितना है अनजान देखो लेने वाला,
देता है एक राम देने वाला!
राम कहो या श्याम मुरली वाला...

अंतरा 1:

इतनी बड़ी दुनिया में लाखों इंसान,
फिर भी सबकी झोली भरे भगवान!
मत घबराना ओ भोले इंसान,
देता है एक राम देने वाला!
राम कहो या श्याम मुरली वाला...

अंतरा 2:

कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर,
सौंप दे अपनी नैया प्रभु के हाथ!
वो ही पार लगाएगा नैया,
देता है एक राम देने वाला!
राम कहो या श्याम मुरली वाला...

अंतरा 3:

महल चौबारे तेरे काम न आएंगे,
खाली हाथ आया है खाली हाथ जाएगा!
कर ले भजन बंदे जीवन संवारने वाला,
देता है एक राम देने वाला!
राम कहो या श्याम मुरली वाला...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन सनातन धर्म के मूल सिद्धांत 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति' (सत्य एक ही है, ज्ञानी उसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं) पर आधारित है। भजन का मुख्य संदेश यह है कि परमात्मा एक ही है, चाहे हम उसे 'राम' कहें या 'श्याम'। वह परमेश्वर ही संपूर्ण सृष्टि का एकमात्र दाता (देने वाला) है।

भजन के मुखड़े में कवि कहते हैं कि मनुष्य कितना अज्ञानी है जो यह सोचता है कि वह अपनी मेहनत या चतुराई से सब कुछ प्राप्त कर रहा है। वास्तव में, देने वाला तो केवल वह एक ही ईश्वर है। मनुष्य तो केवल याचक (लेने वाला) है, जो अपनी संकीर्ण बुद्धि के कारण इस परम सत्य को समझ नहीं पाता।

प्रथम अंतरे में ईश्वर की असीम कृपा और उनकी सर्वव्यापकता का वर्णन है। इस विशाल संसार में अरबों जीव-जंतु और मनुष्य हैं, लेकिन प्रभु बिना किसी भेदभाव के सबकी झोली भरते हैं। इसलिए मनुष्य को कभी भी जीवन की कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिए।

द्वितीय अंतरे में श्रीमद्भगवद्गीता श्लोक के निष्काम कर्मयोग का संदेश दिया गया है। मनुष्य को केवल अपना कर्तव्य करना चाहिए और परिणाम की चिंता ईश्वर पर छोड़ देनी चाहिए। जब हम अपनी जीवन-रूपी नैया भगवान के हाथों में सौंप देते हैं, तो वे स्वयं पतवार बनकर हमें भवसागर से पार उतार देते हैं।

तृतीय अंतरे में जीवन की नश्वरता और वैराग्य का सुंदर चित्रण है। भौतिक सुख-सुविधाएं, महल और धन-दौलत यहीं धरे रह जाएंगे। मनुष्य इस संसार में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है। इसलिए, वास्तविक धन तो केवल प्रभु का नाम और भजन ही है, जो आत्मा का कल्याण करता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह वेदांत और भक्ति मार्ग का एक अद्भुत समन्वय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • अद्वैत भाव का संदेश: यह भजन राम और कृष्ण के बीच के कृत्रिम भेद को समाप्त करता है। यह वैष्णव संप्रदाय के भीतर एकता और समरसता का संदेश देता है।
  • शरणगति और समर्पण: भजन का मूल स्वर पूर्ण समर्पण (शरणगति) का है। जब साधक यह स्वीकार कर लेता है कि सब कुछ देने वाला वही एक ईश्वर है, तो उसका अहंकार स्वतः ही समाप्त हो जाता है।
  • कर्मयोग का व्यावहारिक उपदेश: यह भजन साधक को कर्म करने की प्रेरणा देता है, लेकिन साथ ही फल के प्रति आसक्ति को छोड़ने की सीख भी देता है।
  • वैराग्य और विवेक: संसार की नश्वरता को याद दिलाकर यह भजन मनुष्य को भौतिकता की अंधी दौड़ से बाहर निकालता है और आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण मन को शांति देने वाला और भक्ति भाव को जाग्रत करने वाला है। इसे निम्नलिखित विधियों और अवसरों पर गाया जा सकता है:

  • प्रातःकाल की प्रार्थना: सुबह के समय इस भजन को सुनने या गाने से दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर पर अटूट विश्वास के साथ होती है।
  • संध्या आरती और सत्संग: पारिवारिक सत्संग या संध्या वंदन के समय सामूहिक रूप से इस भजन का कीर्तन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • विशेष पर्व: रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी, और अन्य वैष्णव उत्सवों के अवसर पर इस भजन का गायन विशेष रूप से किया जाता है।
  • गायन की विधि: इस भजन को शांत चित्त होकर, ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम की मधुर ध्वनि के साथ मध्यम लय में गाना चाहिए। गाते समय मन में राम और कृष्ण दोनों के दिव्य स्वरूपों का ध्यान करना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के दो सबसे लोकप्रिय और पूर्ण अवतारों—मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है।

सनातन परंपरा में भगवान राम को धर्म का साक्षात विग्रह (रामो विग्रहवान धर्मः) माना गया है, जो मर्यादा, कर्तव्य और आदर्श जीवन की सीख देते हैं। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण प्रेम, आनंद, ज्ञान और निष्काम कर्म के प्रतीक हैं। यह भजन इन दोनों रूपों को एक ही परमेश्वर के दो पहलू के रूप में प्रस्तुत करता है।

यद्यपि इस भजन के मूल रचयिता का नाम अज्ञात है, लेकिन यह कबीरदास, तुलसीदास और सूरदास जैसे महान संतों की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है जिन्होंने सदैव नाम-स्मरण और ईश्वर की एकरूपता पर बल दिया।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन भारतीय लोक चेतना और पारंपरिक भजनों का हिस्सा रहा है। इसकी रचना की पृष्ठभूमि अत्यंत सरल और जन-साधारण को समझ आने वाली भाषा में की गई है। भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में होने वाले कीर्तनों में यह भजन दशकों से गाया जा रहा है।

इसकी पृष्ठभूमि में वह दार्शनिक संघर्ष भी समाप्त होता दिखाई देता है जो कभी-कभी राम-भक्तों और कृष्ण-भक्तों के बीच संकीर्ण सोच के कारण उत्पन्न हो जाता था। यह भजन दोनों संप्रदायों को एक सूत्र में पिरोता है और यह स्थापित करता है कि दोनों ही रूप एक ही सच्चिदानंद परमात्मा के हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है। इसमें कहीं-कहीं ब्रजभाषा और अवधी का पुट भी देखने को मिलता है।

काव्य शैली की दृष्टि से यह एक 'पद' या 'गीत' है, जिसमें अंत्यानुप्रास (Rhyming) का सुंदर प्रयोग किया गया है। "इंसान-भगवान", "हाथ-साथ", "आएगा-जाएगा" जैसे शब्द तुकबंदी को सहज और कर्णप्रिय बनाते हैं। इसकी सरल शब्दावली के कारण ही यह भजन बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें अपने दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:

  1. संतोष और धैर्य: जब हम यह मान लेते हैं कि हमारी झोली भरने वाला वह परमेश्वर है, तो हमारे भीतर असंतोष और ईर्ष्या की भावना समाप्त हो जाती है।
  2. अहंकार का त्याग: "देता है एक राम देने वाला" पंक्ति हमें सिखाती है कि हम केवल निमित्त मात्र हैं। कर्तापन का अहंकार ही हमारे दुखों का कारण है।
  3. संसार की असारता: "खाली हाथ आया है खाली हाथ जाएगा" यह शाश्वत सत्य हमें याद दिलाता है कि भौतिक संग्रह के पीछे भागने के बजाय हमें परोपकार और भगवद-भक्ति रूपी वास्तविक धन का संचय करना चाहिए।
  4. समभाव: राम और श्याम में भेद न करना हमें जीवन में हर परिस्थिति और हर व्यक्ति के प्रति समभाव रखने की प्रेरणा देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
राम / श्याम भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण एक ही परम चेतना के दो रूप
मुरली वाला बांसुरी बजाने वाले श्रीकृष्ण आनंद और प्रेम बिखेरने वाले प्रभु
अनजान अज्ञानी, नासमझ माया के वशीभूत जीव जो स्वयं को कर्ता मानता है
झोली पात्र, जीवन की झोली मनुष्य की पात्रता और उसकी आवश्यकताएं
नैया नाव संसार रूपी सागर में मनुष्य का जीवन
महल चौबारे ऊंचे भवन, धन-दौलत नश्वर भौतिक सुख-सुविधाएं

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"राम कहो या श्याम मुरली वाला, देता है एक राम देने वाला!"
चाहे आप मर्यादा पुरुषोत्तम राम का नाम लें या मुरलीधर श्याम का, दोनों में कोई अंतर नहीं है। संपूर्ण जगत को जीवन, श्वास और सुख देने वाला वह एक ही परमेश्वर है।

"कितना है अनजान देखो लेने वाला, देता है एक राम देने वाला!"
मनुष्य कितना नासमझ है जो सोचता है कि वह अपनी योग्यता से सब कुछ पा रहा है, जबकि वह केवल उस परम दाता की कृपा का उपभोग कर रहा है।

"इतनी बड़ी दुनिया में लाखों इंसान, फिर भी सबकी झोली भरे भगवान!"
इस अनंत ब्रह्मांड में अनगिनत जीव हैं, लेकिन वह परमात्मा इतना कृपालु है कि वह किसी को भी भूखा नहीं सुलाता। वह सबकी आवश्यकताओं को पूर्ण करता है।

"मत घबराना ओ भोले इंसान, देता है एक राम देने वाला!"
हे सीधे-साधे मनुष्य! तू जीवन के संकटों और अभावों से मत डर। जब वह ईश्वर सबके साथ है, तो वह तेरी भी रक्षा करेगा और तेरी झोली भी भरेगा।

"कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर, सौंप दे अपनी नैया प्रभु के हाथ!"
तू केवल अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से कर और फल की चिंता छोड़ दे। अपने जीवन की बागडोर भगवान को सौंप दे, वे तुझे हर संकट से पार निकाल लेंगे।

"महल चौबारे तेरे काम न आएंगे, खाली हाथ आया है खाली हाथ जाएगा!"
मृत्यु के पश्चात यह भौतिक ऐश्वर्य यहीं छूट जाएगा। तू इस धरा पर रिक्त हाथ आया था और रिक्त हाथ ही प्रस्थान करेगा। इसलिए केवल सत्कर्म ही तेरे साथ जाएंगे।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के अद्वैत और समर्पण भाव को पुष्ट करने वाले कुछ पावन मंत्र और श्लोक निम्नलिखित हैं:

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।
सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥

अर्थ: भगवान शिव पार्वती जी से कहते हैं—हे सुमुखि! राम-राम इस प्रकार रमण करना सहस्र विष्णुनाम के समान है। राम नाम अत्यंत मनोहर है।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥

अर्थ: (श्रीमद्भगवद्गीता १८.६६) भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं—सभी धर्मों को छोड़कर केवल मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूंगा, शोक मत करो।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण बिंदु महत्वपूर्ण जानकारी
भजन का नाम राम कहो या श्याम मुरली वाला
मुख्य विषय ईश्वर की एकरूपता, समर्पण और निष्काम कर्म
संबद्ध देवी-देवता भगवान श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण
भाषा सरल हिंदी (खड़ी बोली)
भक्ति का भाव (Bhava) समर्पण भाव, शांत रस, अद्वैत भाव
उपयुक्त अवसर दैनिक प्रार्थना, सत्संग, रामनवमी, जन्माष्टमी
मुख्य संदेश परमात्मा एक है, वही सबका पालनहार है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण एक ही परमेश्वर के दो रूप हैं। ईश्वर ही इस सृष्टि का एकमात्र दाता है और मनुष्य को अहंकार छोड़कर पूर्ण रूप से ईश्वर की शरण में आ जाना चाहिए।

इस भजन में "देने वाला" उस एक ही परमेश्वर (राम/श्याम) को कहा गया है जो संपूर्ण सृष्टि का पालन-पोषण करता है और सभी जीवों की आवश्यकताओं को पूरा करता है।

हाँ, इस भजन का दूसरा अंतरा "कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर" सीधे तौर पर श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्मयोग (कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन) के सिद्धांत से प्रेरित है।

इस भजन को प्रातःकाल की प्रार्थना के समय या संध्याकालीन सत्संग के दौरान गाना सबसे उत्तम माना जाता है। यह मन को शांत करता है और दिनभर के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

इस पंक्ति का अर्थ है कि मनुष्य इस संसार में बिना किसी भौतिक वस्तु के जन्म लेता है और मृत्यु के बाद भी कुछ साथ नहीं ले जा सकता। इसलिए भौतिक वस्तुओं के प्रति अत्यधिक मोह व्यर्थ है; केवल सत्कर्म और भक्ति ही आत्मा के साथ जाते हैं।

यह भजन मुख्य रूप से सुगम संगीत और लोक धुन पर आधारित है। इसे सामान्यतः कहरवा ताल में गाया जाता है, जिससे यह अत्यंत सुरीला और आसानी से गाया जाने वाला बन जाता है।

हाँ, इसकी सरल भाषा और मधुर लय के कारण यह बच्चों को सिखाने के लिए एक आदर्श भजन है। इससे बच्चों में नैतिक मूल्य, संतोष और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का विकास होता है।

यह भजन हमें यह विश्वास दिलाता है कि हमारी चिंता करने वाला ईश्वर मौजूद है। जब हम अपनी चिंताओं को भगवान को सौंप देते हैं, तो हमारा मानसिक तनाव दूर होता है और गहरी शांति का अनुभव होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "राम कहो या श्याम मुरली वाला" भजन के आध्यात्मिक, दार्शनिक और व्यावहारिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस भजन के माध्यम से प्रस्तुत अद्वैत दर्शन और निष्काम कर्म का संदेश आधुनिक जीवन के तनावों को दूर करने में अत्यंत प्रासंगिक है। यह सामग्री पूरी तरह से शोधपरक और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री — भक्तिलोक टीम द्वारा संकलित और व्याख्यायित।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भगवद्गीता: निष्काम कर्मयोग और समर्पण के श्लोक (अध्याय २ और अध्याय १८)।
  • श्रीमद्भागवत महापुराण: भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं और अनन्य भक्ति का वर्णन।
  • सनातन भक्ति परंपरा: पारंपरिक वैष्णव भजन संग्रह और संतों की वाणी।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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