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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 3

अध्याय 8 · श्लोक 3

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते । भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञितः ॥ ३॥

akṣaraṃ brahma paramaṃ svabhāvo 'dhyātmam ucyate | bhūta-bhāvodbhava-karo visargaḥ karma-saṃjñitaḥ ||3||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अक्षरम्: imperishable; ब्रह्म: Brahman; परमम्: supreme; स्वभावः: own nature; अध्यात्मम्: Adhyatma; उच्यते: is called; भूतभावोद्भवकरः: that which causes the birth of beings; विसर्गः: creation; कर्मसंज्ञितः: is known as action.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

परम अक्षर (अविनाशी) ब्रह्म कहलाता है; जीव का स्वभाव अध्यात्म कहा जाता है; और प्राणियों के जन्म का कारण बनने वाली सृष्टि-शक्ति कर्म कहलाती है।

English Translation

The Supreme Imperishable Brahman is called the Akshara; the individual self's inherent nature is called Adhyatma; the creative force that brings beings into existence is known as Karma (action).

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

कृष्ण अब ब्रह्म, अध्यात्म और कर्म की परिभाषा देते हैं। अक्षर ब्रह्म सर्वोच्च अविनाशी तत्त्व है, अध्यात्म जीव का मूल स्वभाव है, और कर्म वह शक्ति है जो प्राणियों को उत्पन्न करती है। Krishna now defines Brahman, Adhyatma, and Karma. Akshara Brahman is the supreme imperishable reality, Adhyatma is the individual's inherent nature, and Karma is the creative force that generates beings.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।