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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 4

अध्याय 8 · श्लोक 4

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अधिभूतं क्षरो भावः पुरुषश्चाधिदैवतम् । अधियज्ञोऽहमेवात्र देहे देहभृतां वर ॥ ४॥

adhibhūtaṃ kṣaro bhāvaḥ puruṣaś cādhidaivatam | adhiyajño 'ham evātra dehe deha-bhṛtāṃ vara ||4||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अधिभूतम्: Adhibhuta; क्षरः: perishable; भावः: nature; पुरुषः: the Purusha; च: and; अधिदैवतम्: Adhidaiva; अधियज्ञः: Adhiyajna; अहम्: I; एव: alone; अत्र: in this; देहे: body; देहभृताम्: of the embodied; वर: O best.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अधिभूत क्षर (नाशवान) प्रकृति (भौतिक जगत) है; अधिदैव पुरुष (हिरण्यगर्भ) है; और हे देहधारियों में श्रेष्ठ अर्जुन! इस शरीर में अधियज्ञ स्वयं मैं हूँ।

English Translation

Adhibhuta is the perishable nature (the physical world); Adhidaiva is the Cosmic Being (Hiranyagarbha); and I alone am Adhiyajna (the Lord of sacrifice) in this body, O best of the embodied.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक पूर्व में दिए गए उत्तर को दोहराता है, जोर देते हुए कि अधियज्ञ के रूप में भगवान ही शरीर में विद्यमान हैं। This verse repeats the previous answer, emphasizing that the Lord Himself exists as Adhiyajna within the body.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।