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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 8 · श्लोक 5

अध्याय 8 · श्लोक 5

अक्षर ब्रह्म योग (Aksara Brahma Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम् । यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः ॥ ५॥

anta-kāle ca mām eva smaran muktvā kalevaram | yaḥ prayāti sa mad-bhāvaṃ yāti nāsty atra saṃśayaḥ ||5||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अन्तकाले: at the time of death; च: and; माम्: Me; एव: alone; स्मरन्: remembering; मुक्त्वा: abandoning; कलेवरम्: the body; यः: who; प्रयाति: departs; सः: he; मद्भावम्: My nature; याति: attains; न: not; अस्ति: there is; अत्र: here; संशयः: doubt.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

और जो मनुष्य अन्तकाल में शरीर त्यागते समय केवल मेरा स्मरण करता हुआ प्राण त्यागता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है; इसमें कोई संशय नहीं है।

English Translation

And whoever, at the time of death, gives up the body and departs, remembering Me alone, attains My state; there is no doubt about this.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक मृत्यु के समय भगवान के स्मरण के महत्व को रेखांकित करता है। जो अन्तकाल में भी कृष्ण का स्मरण करता है, वह उनके धाम को प्राप्त होता है। This verse highlights the importance of remembering the Lord at the time of death. Whoever remembers Krishna even at the final moment attains His abode.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।