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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 78

अध्याय 18 · श्लोक 78

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः। तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥७८॥

yatra yogeśvaraḥ kṛṣṇo yatra pārtho dhanur-dharaḥ | tatra śrīr vijayo bhūtir dhruvā nītir matir mama ||78||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यत्र: where; योग-ईश्वरः: the Lord of Yoga; कृष्णः: Krishna; यत्र: where; पार्थः: Partha; धनुः-धरः: the archer; तत्र: there; श्रीः: prosperity; विजयः: victory; भूतिः: opulence; ध्रुवा: certain; नीतिः: policy; मतिः: opinion; मम: my.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर अर्जुन हैं, वहाँ श्री (लक्ष्मी), विजय, भूति (ऐश्वर्य) और ध्रुव नीति (निश्चित नीति) है – ऐसा मेरा मत है।

English Translation

Wherever there is Krishna, the Lord of Yoga, and wherever there is Partha, the archer, there are prosperity, victory, opulence, and sound policy. Such is my conviction.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

गीता का यह अन्तिम श्लोक है। सञ्जय अपना अन्तिम कथन करते हैं कि जहाँ कृष्ण और अर्जुन हैं, वहाँ सम्पत्ति, विजय, ऐश्वर्य और नीति निश्चित है। यह धृतराष्ट्र के पक्ष की हार का संकेत भी है, क्योंकि कृष्ण-अर्जुन पाण्डव पक्ष में हैं।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।