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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 22

अध्याय 18 · श्लोक 22

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यत्तु कृत्स्नवदेकस्मिन्कार्ये सक्तमहैतुकम्। अतत्त्वार्थवदल्पं च तत्तामसमुदाहृतम्॥२२॥

yat tu kṛtsnavad ekasmin kārye saktam ahaitukam | atattvārthavad alpaṃ ca tat tāmasam udāhṛtam ||22||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यत्: which; तु: but; कृत्स्नवत्: as if it were the whole; एकस्मिन्: in one; कार्ये: effect; सक्तम्: attached; अहैतुकम्: without reason; अतत्त्व-अर्थवत्: without knowledge of reality; अल्पम्: petty; च: and; तत्: that; तामसम्: tamasic; उदाहृतम्: is declared.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

किन्तु जो ज्ञान एक कार्य (शरीर आदि) में सम्पूर्ण की तरह आसक्त, बिना युक्ति के, वास्तविकता से रहित और तुच्छ है, वह तामस कहा गया है।

English Translation

That knowledge which is attached to one single effect as if it were the whole, without reason, without knowledge of reality, and petty – that is declared to be tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस ज्ञान अत्यन्त सीमित, तुच्छ और अयुक्तिपूर्ण होता है। यह किसी एक वस्तु या शरीर को ही सब कुछ मान लेता है और सत्य से परे नहीं जाता। यह अज्ञान का ही रूप है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।