गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – श्लोक 1

श्लोक १ में भगवान कृष्ण अर्जुन को सब ज्ञानों में उत्तम ज्ञान बताने का वचन देते हैं। Verse 1: Lord Krishna promises to reveal the supreme knowledge.

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवानुवाच । परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् । यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥ १॥

śrī-bhagavān uvāca | paraṃ bhūyaḥ pravakṣyāmi jñānānāṃ jñānam uttamam | yaj jñātvā munayaḥ sarve parāṃ siddhim ito gatāḥ ||1||

पदच्छेद / शब्दार्थ

श्रीभगवान् उवाच: भगवान् ने कहा; परम्: परम; भूयः: फिर से; प्रवक्ष्यामि: मैं कहूँगा; ज्ञानानाम्: सब ज्ञानों में; ज्ञानम्: ज्ञान; उत्तमम्: उत्तम; यत्: जिसे; ज्ञात्वा: जानकर; मुनयः: मुनि; सर्वे: सभी; पराम्: परम; सिद्धिम्: सिद्धि; इतः: इस (लोक) से; गताः: प्राप्त हुए।

हिंदी अनुवाद

श्रीभगवान् बोले: मैं फिर से उस परम ज्ञान को कहूँगा, जो सब ज्ञानों में उत्तम है, जिसको जानकर सब मुनि इस संसार से परम सिद्धि को प्राप्त हो गए।

English Translation

The Blessed Lord said: I shall again declare the supreme knowledge, the best of all knowledges, having known which all the sages have attained to supreme perfection from this world.

टीका / Commentary

भगवान अब तीसरे अध्याय में वर्णित कर्मयोग और अठारहवें अध्याय में वर्णित ज्ञानयोग के समन्वय के रूप में तीन गुणों का ज्ञान देते हैं। यह ज्ञान सर्वोत्तम है। The Lord now reveals the knowledge of the three gunas, which synthesizes karma yoga and jnana yoga.