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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 43

अध्याय 1 · श्लोक 43

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः | उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ||४३||

doṣairetaiḥ kulaghnānāṃ varṇasaṅkarakārakaiḥ | utsādyante jātidharmāḥ kuladharmāśca śāśvatāḥ ||43||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

दोषैः: दोषों से; एतैः: इन; कुलघ्नानाम्: कुलघातियों के; वर्णसङ्करकारकैः: वर्णसंकर उत्पन्न करने वाले; उत्साद्यन्ते: नष्ट हो जाते हैं; जातिधर्माः: जाति के धर्म; कुलधर्माः: कुल के धर्म; च: और; शाश्वताः: सनातन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

कुलघातियों के इन दोषों (वर्णसंकर उत्पन्न करने वाले) से जाति के धर्म और सनातन कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं।

English Translation

By these evil deeds of the destroyers of the family, which cause intermixture of castes, the eternal family traditions and the dharma of the race are destroyed.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन कहते हैं कि कुलघातियों के कार्यों से न केवल कुलधर्म, बल्कि जातिधर्म भी नष्ट हो जाते हैं। Arjuna says that the actions of family-destroyers annihilate both family traditions and societal duties.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।