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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 44

अध्याय 1 · श्लोक 44

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन | नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ||४४||

utsannakuladharmāṇāṃ manuṣyāṇāṃ janārdana | narake'niyataṃ vāso bhavatītyanuśuśruma ||44||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

उत्सन्न: नष्ट; कुलधर्माणाम्: जिनके कुलधर्म नष्ट हो गए हैं; मनुष्याणाम्: ऐसे मनुष्यों का; जनार्दन: हे जनार्दन; नरके: नरक में; अनियतम्: अनिश्चित काल तक; वासः: निवास; भवति: होता है; इति: इस प्रकार; अनुशुश्रुम: हमने सुना है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे जनार्दन! हमने सुना है कि जिनके कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, उन मनुष्यों का नरक में अनिश्चित काल तक वास होता है।

English Translation

O Janardana, we have heard that those whose family traditions are destroyed dwell in hell for an indefinite period.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन शास्त्रों के प्रमाण देते हैं कि कुलधर्महीनों को नरक में रहना पड़ता है। Arjuna cites scriptural authority that those without family traditions go to hell.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।