भक्ति रस काव्य व भजन

श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली - 108 पावन नाम जप एवं महिमा

19 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

पौराणिक परिचय एवं आध्यात्मिक रहस्य

सनातन संस्कृति में भगवान हनुमान को अष्टचिवंजीवी, बल, बुद्धि, विद्या और पराक्रम के देवता के रूप में पूजा जाता है। हनुमान जी केवल कलिकाल में जागृत रहने वाले प्रत्यक्ष देवता ही नहीं हैं, बल्कि वे परम भक्त, रुद्रावतार और संकटमोचन भी हैं। जब भक्त अपने जीवन में विभिन्न प्रकार के भौतिक, मानसिक या आध्यात्मिक संकटों से घिर जाता है, तब भगवान हनुमान के नामों का स्मरण उसके जीवन में प्रकाश लेकर आता है। 'अष्टोत्तर शतनामावली' का अर्थ होता है किसी आराध्य देव के 108 पावन और पवित्र नाम। सनातन धर्म और पुराणों में हनुमान जी के सहस्रों नामों का वर्णन मिलता है, किंतु उनके 108 प्रमुख नामों का यह संग्रह अष्टोत्तर शतनामावली के रूप में अत्यधिक प्रसिद्ध और सिद्ध माना गया है।

इन 108 नामों का उद्गम विभिन्न पुराणों, जैसे पराशर संहिता, रुद्रयामल तंत्र, वाल्मीकि रामायण के संदर्भों और प्राचीन संतों की वाणियों से हुआ है। प्रत्येक नाम हनुमान जी के किसी विशेष गुण, उनके पराक्रम, उनकी सेवा भावना, उनके ब्रह्मचर्य, उनकी वाक्पटुता और उनके भगवान श्रीराम के प्रति अगाध प्रेम को प्रकट करता है। उदाहरण के लिए, 'आञ्जनेय' नाम उनकी माता अंजनी के पुत्र होने का बोध कराता है, तो 'महाबल' नाम उनकी उस असीम शारीरिक क्षमता को दर्शाता है जिसके बल पर उन्होंने सुमेरु पर्वत तक को हिला दिया था और लंका का दहन किया था। इसी प्रकार 'सीताशोकविनाशकाय' नाम उनकी उस करुणा को उजागर करता है जो उन्होंने अशोक वाटिका में बैठी माता सीता के दुखों को हरने के लिए दिखाई थी। इन नामों का जप करने से साधक के भीतर सात्विक ऊर्जा, आत्मविश्वास, निर्भयता और भगवद्भक्ति का संचार होता है।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, हनुमान जी का हर नाम एक मंत्र की तरह कार्य करता है। जब कोई साधक पूरी श्रद्धा, शुचिता और ध्यान के साथ इन 108 नामों का उच्चारण करता है, तो उसके शरीर के चक्र जागृत होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का शमन होता है। विशेष रूप से राहु, केतु और शनि के कुप्रभावों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए हनुमान जी के नामों का जप अत्यंत फलदायी माना गया है क्योंकि शनि देव ने हनुमान जी के शरणागत भक्तों को कभी भी कष्ट न देने का वचन दिया था। इस प्रकार, यह शतनामावली न केवल मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है, बल्कि इहलोक के सभी दुखों से मुक्ति दिलाकर साधक को अभय प्रदान करती है।

विनियोग, ध्यान एवं नामावली जप संकल्प

किसी भी देव अर्चना, स्तोत्र या शतनामावली के पाठ से पूर्व विनियोग और ध्यान का अत्यधिक महत्व होता है। विनियोग के माध्यम से हम उस मंत्र या स्तोत्र के ऋषि, छंद, देवता और उसके विनियोजन (उद्देश्य) को नमन करते हैं।

विनियोग:
अस्य श्री हनुमान अष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रमंत्रस्य श्रीरामचंद्र ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीहनुमान देवता, मरुत्सुतः इति बीजम्, अंजनीसुतः इति शक्तिः, वायुपुत्र इति कीलकम्, श्रीरामभक्त्यादि-सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः।

ध्यानम्:
ध्यायेद्बालार्कसंकाशं जगद्व्याप्सिकरं परम्।
लोहिताक्षं त्रिनयनं कल्पद्रुमसमप्रभम्॥
उत्तुंगतुण्डशोभाढ्यं हारकेयूरभूषितम्।
कुण्डलाभ्यां प्रदीप्तस्य गण्डक्षेत्रे विराजितम्॥
गदाहस्तं च बाहुभ्यां शोभितं च जितेन्द्रियम्।
सीतासुखकरं ध्यायेद्वायुपुत्रं महाबलम्॥

इस ध्यान श्लोक का अर्थ है कि हम बालार्क (प्रातःकाल के सूर्य) के समान कांतिमान, तीनों लोकों में व्याप्त, लाल नेत्रों वाले, त्रिनयन, कल्पवृक्ष के समान फल देने वाले, कुण्डलों से शोभायमान, हाथ में गदा धारण किए हुए, जितेन्द्रिय और माता सीता को सुख प्रदान करने वाले वायुपुत्र महाबल हनुमान जी का ध्यान करते हैं। जप से पूर्व मन में यह संकल्प लेना चाहिए कि मैं अपने समस्त मानसिक विकारों, भय और कष्टों की निवृत्ति के लिए तथा श्रीराम भक्ति की प्राप्ति के लिए श्री हनुमान जी के इन 108 नामों का जाप कर रहा हूँ।

श्री हनुमान के सम्पूर्ण 108 पावन नाम (100% सम्पूर्ण 108 नामावली तालिका)

108 दिव्य नामों का दार्शनिक भावार्थ एवं प्रमुख नाम रहस्य

श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली के ये 108 नाम केवल शब्दों का समूह नहीं हैं, बल्कि यह एक संपूर्ण साधना पद्धति और वेदान्त का सार हैं। जब हम हनुमान जी को 'रुद्ररूपिणे' कहते हैं, तो यह इस अकाट्य सत्य को स्थापित करता है कि वे स्वयं देवाधिदेव महादेव शिव के अंश हैं। शिव का अर्थ है कल्याण और हनुमान जी उसी कल्याणकारी ऊर्जा के सजीव विग्रह हैं। उनके नाम 'ब्रह्मचारिणे' और 'जितेन्द्रियाय' हमें यह सिखाते हैं कि आध्यात्मिक उन्नति और असीम शक्ति का अर्जन केवल इंद्रिय संयम और ब्रह्मचर्य के मार्ग पर चलकर ही संभव है। आज के आधुनिक युग में जहाँ मानसिक भटकाव और भोग-विलास चरम पर है, हनुमान जी का यह स्वरूप मनुष्य को आत्मसंयम और नैतिक दृढ़ता का संदेश देता है.

इसी प्रकार, 'रामभक्ताय' और 'श्रीरामहृदयालभाय' जैसे नाम यह दर्शाते हैं कि हनुमान जी का संपूर्ण अस्तित्व भगवान श्रीराम को समर्पित है। उनके हृदय को चीरकर जब वानरराज ने श्रीराम-सीता के दर्शन कराए थे, तो उसने यह सिद्ध कर दिया था कि एक सच्चे भक्त के रोम-रोम में केवल इष्टदेव का ही वास होना चाहिए। जब साधक इन नामों का उच्चारण करता है, तो उसके भीतर अहंकार का शमन होता है और दास्य भक्ति की भावना प्रबल होती है। 'संकटमोचनाय' और 'सर्वरोगहराय' नाम यह विश्वास दिलाते हैं कि जो व्यक्ति राम नाम का आश्रय लेकर हनुमान जी की शरण में जाता है, उसे भौतिक या दैवी आपदाएं कभी विचलित नहीं कर सकतीं। इस प्रकार, इन 108 नामों का दार्शनिक चिंतन मनुष्य को भयमुक्त, सेवाभावी और परोपकारी जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

108 नाम जप की प्रामाणिक विधि, नियम, शुभ मुहूर्त एवं सावधानियां

श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ शास्त्रीय नियमों और विधियों का पालन करना आवश्यक है। जप का उत्तम समय प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) अथवा संध्याकाल का माना जाता है। मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की विशेष आराधना का विधान है, इसलिए इन दो दिनों में इस शतनामावली का पाठ विशेष रूप से फलदायी होता है। पाठ करने से पूर्व स्नान करके लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थल पर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक और धूपबत्ती प्रज्वलित करें।

जप नियम एवं सावधानियां:
1. जप करते समय तुलसी की माला, रुद्राक्ष की माला अथवा लाल चंदन की माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ रहता है。
2. जप के दौरान पूर्ण पवित्रता, सात्विकता और ब्रह्मचर्य का पालन करें। तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) का सेवन वर्जित है।
3. आसन हमेशा कुश, कम्बल या ऊनी होना चाहिए, सीधे जमीन पर बैठकर जप न करें。
4. उच्चारण स्पष्ट और शुद्ध होना चाहिए। यदि संस्कृत में कठिनाई हो, तो हिंदी अर्थ का भाव रखते हुए भी इसका स्मरण किया जा सकता है।

संकल्प लेने के पश्चात एक माला (108 बार) या श्रद्धासुखद संख्या में इन नामों का जप करें। जप पूर्ण होने के बाद हनुमान जी को गुड़-चने, बूंदी के लड्डू या फलों का भोग लगाएं और आरती करें।

सम्पूर्ण फलश्रुति, नाम जप के दिव्य लाभ एवं आध्यात्मिक प्रभाव

शतनामावली के अंत में आने वाली फलश्रुति इस बात की गवाही देती है कि इन नामों का नियमित स्मरण करने से साधक को क्या-क्या महान उपलब्धियां प्राप्त होती हैं। जो व्यक्ति प्रतिदिन या विशेष पर्वों (जैसे हनुमान जयंती, मंगलवार, शनिवार) पर हनुमान जी के इन 108 नामों का पाठ करता है, उसे जीवन में कभी भी शत्रुओं का भय नहीं सताता। भूत, प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस या किसी भी प्रकार की ऊपरी नकारात्मक ऊर्जा उसके आस-पास भी नहीं फटकती। हनुमान जी की कृपा से उसकी बुद्धि तीव्र होती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और विद्या के क्षेत्र में अपार सफलता मिलती है।

शारीरिक दृष्टिकोण से यह जप प्राणशक्ति को बढ़ाता है और दीर्घायु, आरोग्य प्रदान करता है। जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या मंगल दोष चल रहा हो, उनके लिए हनुमान जी के 108 नामों का नित्य जप अचूक वैदिक उपाय माना गया है। यह मानसिक तनाव, अनिद्रा, अवसाद (Depression) और हीन भावना को दूर कर मन में अद्भुत साहस और ओज भर देता है। अंततः, इस लोक के सभी सुखों का भोग करते हुए साधक को अंत समय में भगवान श्रीराम के परम धाम (लोक) की प्राप्ति होती है और वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • Q1: श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ किस दिन करना सबसे उत्तम होता है?
    Ans: हनुमान जी के 108 नामों का पाठ करने के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा हनुमान जयंती और नित्य प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में भी इसका पाठ अत्यधिक फलदायी होता है।
  • Q2: क्या महिलाएं हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कर सकती हैं?
    Ans: हाँ, महिलाएं पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ हनुमान जी के नाम जप और स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं। वे मानसिक रूप से हनुमान जी का स्मरण और ध्यान कर सकती हैं।
  • Q3: इस शतनामावली के जाप के लिए कौन सी माला सबसे अच्छी होती है?
    Ans: हनुमान जी के मंत्र और नाम जप के लिए लाल चंदन, रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला का प्रयोग करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  • Q4: क्या बिना दीक्षा के कोई भी इन 108 नामों का जप कर सकता है?
    Ans: जी हाँ, हनुमान जी के नाम सर्वसाधारण के लिए खुले हैं। किसी विशेष गुरु दीक्षा के बिना भी कोई भी भक्त अपनी श्रद्धा और भक्ति भाव से इन 108 नामों का नित्य जप कर सकता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
क्र.सं.दिव्य नाम (मंत्र रूप)प्रमुख भावार्थ (सरल हिंदी अर्थ)
१ॐ आञ्जनेयाय नमःमाता अंजनी के पुत्र
२ॐ महाबलाय नमःअत्यंत पराक्रमी एवं बलवान
३ॐ सीताशोकविनाशकाय नमःमाता सीता का शोक दूर करने वाले
४ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमःलक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाले (संजीवनी लाने वाले)
५ॐ दशग्रीवकुलान्तकाय नमःरावण के कुल का नाश करने वाले
६ॐ महावीराय नमःमहान वीर
७ॐ चिरंजीविने नमःअमर (जो सदैव जीवित हैं)
८ॐ रामभक्ताय नमःश्रीराम के अनन्य भक्त
९ॐ दैत्यकार्यविघातकाय नमःराक्षसों के कार्यों को विफल करने वाले
१०ॐ अक्षहन्त्रे नमःराक्षस अक्षकुमार का वध करने वाले
११ॐ कांचनाभताय नमःसुवर्ण के समान कांति वाले
१२ॐ पिंगलाक्षाय नमःपिंगल (भूरे/सुनहरे) नेत्रों वाले
१३ॐ पविप्रमाथिने नमःवज्र के समान शरीर वाले
१४ॐ सर्वरोगहराय नमःसभी रोगों का नाश करने वाले
१५ॐ सर्वविद्याप्रदायकाय नमःसभी प्रकार की विद्याओं को प्रदान करने वाले
१६ॐ संकटमोचनाय नमःसंकटों से छुड़ाने वाले
१७ॐ गुरुवे नमःसबके मार्गदर्शक एवं गुरु
१८ॐ दीनबंधवे नमःदीनों और गरीबों के बंधु / सहायक
१९ॐ सुरारिमथनाय नमःदेवता के शत्रुओं (असुरों) को मथने वाले
२०ॐ शतक्रतुप्रहर्त्रे नमःइन्द्र के गर्व को चूर करने वाले (अथवा इन्द्र को प्रसन्न करने वाले)
२१ॐ सिंहिकासंहरणे नमःसिंहिका राक्षसी का वध करने वाले
२२ॐ लंकाश्रितविनाशकाय नमःलंका का आश्रय लेने वाले राक्षसों का नाश करने वाले
२३ॐ लंकारावणदाहकय नमःलंका और रावण की सोने की लंका को जलाने वाले
२४ॐ सुग्रीवसचिवाय नमःसुग्रीव के मंत्री एवं सलाहकार
२५ॐ धीराय नमःधैर्यवान एवं बुद्धिमान
२६ॐ शूराय नमःशूरवीर
२७ॐ वीराय नमःवीरता की प्रतिमूर्ति
२८ॐ जितेन्द्रियाय नमःइंद्रियों को जीतने वाले
२९ॐ बुद्धिमतां वरिष्ठाय नमःबुद्धिमानों में श्रेष्ठ
३०ॐ वातात्मजाय नमःवायुदेव के पुत्र (पवनसुत)
३१ॐ तत्तवज्ञाननिधये नमःतत्वज्ञान के अपार भंडार
३२ॐ शौर्याय नमःशौर्य के प्रतीक
३३ॐ सुग्रीवमन्त्रिणे नमःसुग्रीव के मंत्री
३४ॐ भूतावासाय नमःसमस्त भूतों और प्राणियों में निवास करने वाले
३५ॐ वाग्मिने नमःउत्कृष्ट वक्ता (वाक्पटु)
३६ॐ तत्वरूपिणे नमःपरमतत्व के रूप
३७ॐ पिंगलाय नमःपिंगल वर्ण वाले
३८ॐ पवित्राय नमःपरम पवित्र
३९ॐ समरप्रियकारिणे नमःधर्मयुद्ध में प्रियता रखने वाले
४0ॐ पुण्यकीर्तये नमःपुण्यमयी कीर्ति वाले
४१ॐ दयानिधये नमःदया के सागर
४२ॐ शान्ताय नमःशांत स्वभाव वाले
४३ॐ निष्कपटाय नमःकपट रहित, सरल हृदय
४४ॐ सत्यपराक्रमाय नमःसत्य और अटल पराक्रम वाले
४५ॐ बृहत्काय नमःविशाल शरीर वाले
४६ॐ महाकायाय नमःविराट् स्वरूप वाले
४७ॐ सर्वलोकचम्पकाय नमःसमस्त लोकों में पूजनीय
४८ॐ शरणागतवत्सलाय नमःशरण में आए हुओं से वात्सल्य रखने वाले
४९ॐ अनादये नमःजिनका कोई आदि (प्रारंभ) नहीं है
५0ॐ अप्रमेयाय नमःजिन्हें मापा न जा सके (अपरिमित)
५१ॐ वरदाय नमःवरदान देने वाले
५२ॐ वायुपुत्राय नमःपवनदेव के पुत्र
५३ॐ अंजनीगर्भसंभूताय नमःअंजनी माता के गर्भ से प्रकट होने वाले
५४ॐ रामदूतस्य नमःश्रीराम के दूत
५५ॐ महातेजसे नमःमहान तेजपुंज वाले
५६ॐ फाल्गुनसहाय नमःअर्जुन (फाल्गुन) के रथ की ध्वजा पर सहायक रूप में रहने वाले
५७ॐ पिङ्गकेशाय नमःपिंगल रंग के बालों वाले
५८ॐ सर्वरोगापहारकाय नमःसभी रोगों का हरण करने वाले
५९ॐ सर्वदुःखहराय नमःसमस्त दुखों को दूर करने वाले
६0ॐ भूतेशानाय नमःभूत-प्रेतों और पिशाचों के स्वामी (नियंता)
६१ॐ भूतचेष्टाविनाशकाय नमःनकारात्मक शक्तियों एवं बाधाओं का नाश करने वाले
६२ॐ पिशाचगणसंहर्त्रे नमःपिशाच गणों का संहार करने वाले
६३ॐ बालार्कसदृशप्रभाय नमःप्रातःकालीन सूर्य के समान कांति वाले
६४ॐ गदाहस्ताय नमःहाथ में गदा धारण करने वाले
६५ॐ वज्रहस्ताय नमःवज्र के समान दृढ़ हाथों वाले
६६ॐ लवणोदधिधिमण्डकाय नमःलवण समुद्र को पार करने वाले
६७ॐ सीतादर्शनोत्कंठाय नमःमाता सीता के दर्शन के लिए उत्सुक रहने वाले
६८ॐ रामकाथप्रियाय नमःश्रीराम की कथा सुनने में प्रियता रखने वाले
६९ॐ सीतानंदकराय नमःमाता सीता को आनंदित करने वाले
७0ॐ वज्रांगाय नमःवज्र के समान कठोर और मजबूत अंगों वाले (बजंगबली)
७१ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमःकालनेमि राक्षस का वध करने वाले
७२ॐ हरिविश्रान्तये नमःवानर रूप में विश्राम करने वाले
७३ॐ सुषेणप्रियाय नमःसुषेण वैद्य के प्रिय
७४ॐ गंधमादनवासिने नमःगंधमादन पर्वत पर निवास करने वाले
७५ॐ लक्ष्मणप्राणरक्षकाय नमःलक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा करने वाले
७६ॐ महाबलपराक्रमाय नमःअसीम बल और पराक्रम वाले
७७ॐ सर्वपापहराय नमःसभी पापों को हरने वाले
७८ॐ सर्वसंपत्प्रदायकाय नमःसमस्त संपत्तियां प्रदान करने वाले
७९ॐ लोकपादाय नमःसमस्त लोकों द्वारा वंदनीय चरणों वाले
८0ॐ त्रैलोक्यरक्षकाय नमःतीनों लोकों की रक्षा करने वाले
८१ॐ धन्वन्तरये नमःवैद्य रूप में संजीवनी लाने वाले (धन्वन्तरि स्वरूप)
८२ॐ रुद्ररूपिणे नमःभगवान शिव (रुद्र) के अवतार
८३ॐ अमितौजसे नमःअमित ओज और तेज वाले
८४ॐ सर्वज्ञाय नमःसब कुछ जानने वाले (सर्वज्ञ)
८५ॐ सर्वदेवात्मने नमःसभी देवताओं की आत्मा स्वरूप
८६ॐ सर्वलोकहितेरताय नमःसभी लोकों के हित में लीन रहने वाले
८७ॐ ब्रह्मचारिणे नमःअखंड ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले
८८ॐ जितेन्द्रियाय नमःइंद्रियों को पूरी तरह वश में रखने वाले
८९ॐ सूक्ष्मतमदर्शकाय नमःअति सूक्ष्म रूप धारण करने वाले (लंका दहन पूर्व)
९0ॐ विराटरूपिणे नमःविशालकाय विराट रूप धारण करने वाले (समुद्र लांघते समय)
९१ॐ पातालनिधिपाय नमःपाताल लोक की निधियों की रक्षा करने वाले
९२ॐ सर्वरक्षाकराय नमःसबकी रक्षा करने वाले
९३ॐ सर्वव्यापिने नमःसर्वत्र व्याप्त रहने वाले
९४ॐ अचलाय नमःअचल, स्थिर और अडिग
९५ॐ सर्वार्चिताय नमःसमस्त देवताओं और मनुष्यों द्वारा पूजित
९६ॐ गगनगामिने नमःआकाश में गमन करने वाले (उड़ने वाले)
९७ॐ सर्वमन्त्रमयाय नमःसमस्त मंत्रों के स्वरूप
९८ॐ सर्वयन्त्रप्रभञ्जकाय नमःसभी प्रकार के यंत्र-तंत्र बाधाओं को तोड़ने वाले
९९ॐ सर्वतन्त्रस्वरूपिणे नमःसमस्त तंत्र शास्त्रों के स्वरूप
१00ॐ एकान्नभोजिने नमःएक बार भोजन करने वाले (अथवा शुद्ध शाकाहारी)
१01ॐ बालसूर्यनसंकाशाय नमःउगते हुए सूर्य के समान कांतिमान
१02ॐ सुग्रीवप्रियकारिणे नमःसुग्रीव के प्रिय कार्य करने वाले
१03ॐ भक्तवत्सलाय नमःभक्तों से प्रेम करने वाले
१04ॐ सर्वकल्याणकृते नमःसबका कल्याण करने वाले
१05ॐ शूरचूडामणये नमःशूरवीरों में मुकुटमणि
१06ॐ रामपादपंकजाय नमःश्रीराम के चरणकमलों में ध्यान लगाने वाले
१07ॐ सुमित्रासुतप्रियाय नमःसुमित्रा पुत्र लक्ष्मण के प्रिय
१08ॐ श्रीरामहृदयालभाय नमःश्रीराम के हृदय में निवास करने वाले