मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 कर दे रे आस पूरी कर दे – मैं आया खाटू में
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(Kar De Re Aas Poori Kar De Lyrics In Hindi) – Surbhi Sharma Shyam Bhajan 2026 | Main Aaya Khatu Mein
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
कर दे रे आस पूरी कर दे, कर दे,
मैं आया खाटू में, मैं आया खाटू में॥
तर्ज – रिमझिम के गीत
॥ अंतरा १ ॥
रूप तेरा मन बसाया,
गलियां तेरे लिए है सजाया,
नैना प्यासी करके छोड़ा,
ना तू आया ना बताया,
दर्शन की आस पूरी कर दे,
कर दे,
मैं आया खाटू में,
मैं आया खाटू में॥
॥ अंतरा २ ॥
है भंवर में फसी नैया,
तू तो है इस जगत का खिवैया,
मैं तो हारा तू सहारा,
तूने सबको गले से लगाया,
चरणों में दास को अब रख ले,
रख ले,
मैं आया खाटू में,
मैं आया खाटू में॥
॥ अंतरा ३ ॥
मैं दीवाना तेरा प्यारा,
श्याम छोडूं ना दर मैं तिहारा,
तू बुलाया मैं खाटू आया,
'सुरभी राहुल' को दिल में बसाया,
झूमूँ रे आज झूमु नाचू नाचू,
मैं आया खाटू में,
मैं आया खाटू में॥
कर दे रे आस पूरी कर दे, कर दे,
मैं आया खाटू में,
मैं आया खाटू में॥
🎤 गायिका :- सुरभि शर्मा (Surbhi Sharma)
✍️ गीतकार :- राहुल शर्मा (Rahul Sharma)
तर्ज: रिमझिम के गीत पर आधारित
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भजन "कर दे रे आस पूरी कर दे" सुरभि शर्मा की सुरीली आवाज़ में खाटू श्याम बाबा के प्रति एक भक्त की व्याकुलता और दर्शन की उत्कट अभिलाषा को दर्शाता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त की पुकार है जो खाटू धाम आया है और श्याम बाबा से दर्शन देने और उसकी आस पूरी करने की प्रार्थना कर रहा है।
"रूप तेरा मन बसाया, गलियां तेरे लिए है सजाया" – भक्त कहता है कि उसने अपने मन में श्याम बाबा के रूप को बसाया है और उनके स्वागत के लिए गलियों को सजाया है। लेकिन नैनों को प्यासा करके छोड़ दिया, न तो वे स्वयं आए और न ही कुछ बताया। इसलिए भक्त दर्शन की आस पूरी करने की प्रार्थना करता है।
"है भंवर में फसी नैया, तू तो है इस जगत का खिवैया" – भक्त की जीवन रूपी नैया भंवर में फंसी हुई है और श्याम बाबा इस संसार के खिवैया (नाविक) हैं जो नैया पार लगाते हैं। भक्त हारा हुआ है और बाबा ही उसका एकमात्र सहारा हैं। उन्होंने सबको गले से लगाया है, इसलिए भक्त प्रार्थना करता है कि उसे भी अपने चरणों में रख लें।
"मैं दीवाना तेरा प्यारा, श्याम छोडूं ना दर मैं तिहारा" – भक्त श्याम का दीवाना और प्यारा है और वह कसम खाता है कि वह श्याम का दर नहीं छोड़ेगा। बाबा ने बुलाया तो वह खाटू आ गया। अंत में गीतकार राहुल शर्मा और गायिका सुरभि शर्मा अपने नाम का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि बाबा ने 'सुरभी राहुल' को दिल में बसाया है और आज वे खुशी से झूम रहे हैं, नाच रहे हैं।
🔍 श्याम भजन का विशेष महत्त्व
तर्ज: रिमझिम के गीत: यह भजन प्रसिद्ध फिल्मी गीत "रिमझिम के गीत" की धुन पर बनाया गया है। यह धुन बहुत मधुर और लोकप्रिय है, जिससे यह भजन और भी आकर्षक और यादगार बन गया है।
"मैं आया खाटू में" की पुनरावृत्ति: पूरे भजन में "मैं आया खाटू में" की पंक्ति बार-बार आती है, जो भक्त के खाटू धाम पहुंचने की खुशी और उसके विश्वास को दर्शाती है। यह उस यात्रा का प्रतीक है जो हर श्याम भक्त करना चाहता है।
खिवैया के रूप में श्याम: "तू तो है इस जगत का खिवैया" – इस पंक्ति में श्याम बाबा को जगत का खिवैया (नाविक) कहा गया है। यह उनके उस स्वरूप को दर्शाता है जो संसार रूपी सागर में डूबते-उतराते भक्तों की नैया पार लगाते हैं।
सुरभि शर्मा का गायन: सुरभि शर्मा ने अपनी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ से इस भजन को जीवंत कर दिया है। उनके गायन में श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत संगम है।
राहुल शर्मा के बोल: गीतकार राहुल शर्मा ने इस भजन में श्याम प्रेम को बड़े ही सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में पिरोया है। अंतिम अंतरे में "सुरभी राहुल" का उल्लेख करके उन्होंने अपनी और गायिका की भक्ति को भी इस भजन में शामिल कर लिया है।
💖 श्याम दरबार में भक्त की पुकार
🎯 संदेश
इस भजन का मूल संदेश यह है कि श्याम बाबा के दरबार में आने वाला हर भक्त उनसे दर्शन की आस लगाए बैठा है। जब कोई सहारा नहीं होता, तब श्याम ही खिवैया बनकर नैया पार लगाते हैं। भक्त की व्याकुलता और प्रेम ही उसे श्याम के दर तक खींच लाता है, और वहाँ पहुंचकर वह झूम उठता है, नाच उठता है।
✨ खाटू आने की खुशी
कर दे रे आस पूरी कर दे केवल एक भजन नहीं, बल्कि हर उस श्याम भक्त की आवाज़ है जो खाटू धाम पहुंचने की खुशी और श्याम बाबा से मिलन की व्याकुलता को व्यक्त करता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे मन से पुकारने पर श्याम बाबा अपने भक्तों के दिल में बसते हैं और उनकी हर आस पूरी करते हैं।
🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। हारे का सहारा, श्री श्याम उद्धारा।।
गायिका: सुरभि शर्मा | गीतकार: राहुल शर्मा
तर्ज: रिमझिम के गीत | Tune: Rimjhim Ke Geet
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Kar De Re Aas Poori Kar De Lyrics (कर दे रे आस पूरी कर दे) – Surbhi Sharma Shyam Bhajan 2026 | Main Aaya Khatu Mein" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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