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Shyam Sharan Mein Rehne Wale Kabhi Nahi Ghabrate Hain Lyrics (श्याम शरण में रहने वाले कभी नही घबराते है) – Kailash Sharma Shyam Bhajan 2026 | Hum Khatu Chale Jate Hain

406 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 श्याम शरण में रहने वाले – कभी नही घबराते है

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Shyam Sharan Mein Rehne Wale Kabhi Nahi Ghabrate Hain Lyrics In Hindi) – Kailash Sharma Shyam Bhajan 2026 | Hum Khatu Chale Jate Hain

गायक एवं गीतकार: कैलाश शर्मा || तर्ज: क्या मिलिए ऐसे लोगो से

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: कैलाश शर्मा (Kailash Sharma)
✍️ गीतकार: कैलाश शर्मा (Kailash Sharma)
📞 संपर्क: 9608722111
🎵 तर्ज: क्या मिलिए ऐसे लोगो से
🏷️ श्रेणी: खाटू श्याम भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

श्याम शरण में रहने वाले,
कभी नही घबराते है,
अगर कभी मन भारी हो तो,
हम खाटू चले जाते है॥

तर्ज – क्या मिलिए ऐसे लोगो से

॥ अंतरा १ ॥

लिखे विधी का लेख प्रभु जो,
उसका क्या कर पायेंगे,
सुख दुख से भगवान बचे ना,
हम कैसे बच पायेंगे,
जब दिल भर आता है कभी तो,
दो आंसू छलकाते है,
अगर कभी मन भारी हो तो,
हम खाटू चले जाते है॥

॥ अंतरा २ ॥

माना ये माया का चक्कर,
जीवन भर ना छूटेगा,
असल खुशी के पल वो होंगे,
जो खाटू में बीतेगा,
भुल के दुनियादारी हम,
खाटू में मौज उड़ाते है,
अगर कभी मन भारी हो तो,
हम खाटू चले जाते है॥

॥ अंतरा ३ ॥

दुनियां वाले पूछते हमसे,
क्या है ऐसा खाटू में,
हम कहते है प्यारे हमारा,
बाप है बैठा खाटू में,
अपने जीवन की उलझन को,
खाटू में सुलझाते है,
अगर कभी मन भारी हो तो,
हम खाटू चले जाते है॥

॥ अंतरा ४ ॥

हारे हुए का साथ निभाना,
बाबा की पहचान है,
भटके हुए को राह दिखाना,
श्याम धनी का काम है,
यूँ ही नहीं 'कैलाश' द्वार,
कोई बेमतलब से आते है,
अगर कभी मन भारी हो तो,
हम खाटू चले जाते है॥

श्याम शरण में रहने वाले,
कभी नही घबराते है,
अगर कभी मन भारी हो तो,
हम खाटू चले जाते है॥

🎤 गायक एवं गीतकार :- कैलाश शर्मा (Kailash Sharma)

📞 संपर्क :- 9608722111

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह सुंदर भजन "श्याम शरण में रहने वाले कभी नही घबराते है" कैलाश शर्मा की सुरीली आवाज़ में खाटू श्याम बाबा की शरण में रहने वालों के निडर जीवन का वर्णन करता है। भजन का मूल स्वर यह है कि जिन्होंने श्याम की शरण ले ली, वे कभी घबराते नहीं, और जब भी मन भारी होता है, वे खाटू चले जाते हैं।

"श्याम शरण में रहने वाले, कभी नही घबराते है" – भक्त कहते हैं कि जो लोग श्याम बाबा की शरण में रहते हैं, वे जीवन में कभी घबराते नहीं हैं। और अगर कभी मन भारी हो जाए, तो वे सीधे खाटू चले जाते हैं।

"लिखे विधी का लेख प्रभु जो, उसका क्या कर पायेंगे" – भक्त कहता है कि विधाता ने जो कुछ लिख दिया है, उसका कोई क्या कर सकता है। जब भगवान स्वयं सुख-दुख से बचे नहीं, तो हम कैसे बच सकते हैं? जब दिल भर आता है, तो दो आंसू छलक जाते हैं, और फिर हम खाटू चले जाते हैं।

"माना ये माया का चक्कर, जीवन भर ना छूटेगा" – यह सच है कि माया का चक्कर जीवन भर नहीं छूटेगा। लेकिन असली खुशी के पल वही होंगे जो खाटू में बितेंगे। दुनियादारी को भूलकर, हम खाटू में मौज उड़ाते हैं।

"दुनियां वाले पूछते हमसे, क्या है ऐसा खाटू में" – दुनिया वाले पूछते हैं कि आखिर खाटू में ऐसा क्या है? हम जवाब देते हैं कि हमारा प्यारा बाप (श्याम बाबा) खाटू में बैठा है। अपने जीवन की उलझनों को हम खाटू में जाकर सुलझाते हैं।

"हारे हुए का साथ निभाना, बाबा की पहचान है" – यह बाबा की पहचान है कि वे हारे हुए का साथ निभाते हैं। भटके हुए को राह दिखाना श्याम धनी का काम है। गीतकार कैलाश कहते हैं कि यूँ ही नहीं कोई बेमतलब उनके द्वार पर आता है।

🔍 श्याम भजन का विशेष महत्त्व

"श्याम शरण" का महत्व: यह भजन श्याम बाबा की शरण में रहने के महत्व को बताता है। जो भी उनकी शरण में आ जाता है, वह जीवन की सभी कठिनाइयों में निडर हो जाता है। यह शरणागति का सिद्धांत है।

तर्ज "क्या मिलिए ऐसे लोगो से": यह भजन लोकप्रिय गीत "क्या मिलिए ऐसे लोगो से" की धुन पर बनाया गया है। यह धुन बहुत ही मधुर और भावपूर्ण है, जो इस भजन के संदेश को और गहरा करती है।

"बाप है बैठा खाटू में": यह पंक्ति बहुत ही सरल और हृदयस्पर्शी है। भक्त श्याम बाबा को अपना पिता (बाप) मानता है और कहता है कि उसका पिता खाटू में बैठा है। यह अटूट विश्वास और आत्मीयता को दर्शाता है।

हारे हुए का साथ: "हारे हुए का साथ निभाना, बाबा की पहचान है" – यह पंक्ति खाटू श्याम बाबा की सबसे बड़ी पहचान "हारे का सहारा" को दर्शाती है। जो हार चुके हैं, जिनका कोई नहीं है, उनका साथ निभाना ही बाबा का स्वभाव है।

कैलाश शर्मा की रचना: गायक और गीतकार कैलाश शर्मा ने इस भजन के माध्यम से श्याम भक्ति के प्रति अपने गहरे लगाव को व्यक्त किया है। अंतिम अंतरे में "यूँ ही नहीं कैलाश द्वार" कहकर उन्होंने स्वयं को भी इस भजन का हिस्सा बना लिया है। उनके संपर्क नंबर के साथ यह भजन और भी व्यक्तिगत हो जाता है।

💖 श्याम की शरण में निडरता

🎯 संदेश

इस भजन का मूल संदेश यह है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, जो लोग श्याम बाबा की शरण में हैं, वे कभी घबराते नहीं। माया का चक्कर भले ही जीवन भर न छूटे, लेकिन असली खुशी के पल वही हैं जो खाटू में बितते हैं। जब दिल भर आता है, मन भारी होता है, तो भक्त सीधे खाटू चला जाता है क्योंकि वह जानता है कि वहाँ उसका बाप बैठा है, जो हारे हुए का साथ निभाता है और भटके हुए को राह दिखाता है।

✨ खाटू का महत्व

श्याम शरण में रहने वाले कभी नही घबराते है केवल एक भजन नहीं, बल्कि खाटू धाम के प्रति अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यह भजन हर उस श्याम भक्त के दिल की आवाज़ है जो जीवन की उलझनों में, मन के भारी होने पर, बस एक ही जगह जाना चाहता है – खाटू, अपने बाबा के पास। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची शरण वही है जहाँ जाकर सारी उलझनें सुलझ जाएँ, सारा दर्द दूर हो जाए, और मन को असली सुकून मिले।

🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। हारे का सहारा, श्री श्याम उद्धारा।।

॥ कैलाश शर्मा कृत श्याम भजन ॥
॥ अगर कभी मन भारी हो तो, हम खाटू चले जाते है ॥

गायक एवं गीतकार: कैलाश शर्मा | Kailash Sharma | 📞 9608722111

तर्ज: क्या मिलिए ऐसे लोगो से | Tune: Kya Milie Aise Logo Se

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "Shyam Sharan Mein Rehne Wale Kabhi Nahi Ghabrate Hain Lyrics (श्याम शरण में रहने वाले कभी नही घबराते है) – Kailash Sharma Shyam Bhajan 2026 | Hum Khatu Chale Jate Hain" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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