🙏 गलती तेरी है सरकार – फागण दिखा दियो एक बार
(Galti Teri Hai Sarkar Lyrics In Hindi) – Jay Shankar Chaudhary Ji Shyam Bhajan 2026 | Fagan Mein Nahi Bulave
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार…गलती तेरी है,
अब फागण में नही बुलावे, हो जा सी टकरार…गलती तेरी है ॥
तर्ज – धमाल
॥ अंतरा १ ॥
अगर फागण देखियो नही होतो, यो मनडो नही ललचातो,
क्या ताई तेरे पाछे पड़ता, क्यों करता मनुहार…गलती तेरी है,
गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार…गलती तेरी है ॥
॥ अंतरा २ ॥
श्याम धणी अब सोच समज ले, चाले न तेरी मन मानी,
थोड़ी लाज शर्म तो बुलावो, भेज दे अब की बार…गलती तेरी है,
गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार…गलती तेरी है ॥
॥ अंतरा ३ ॥
अब यो फागण रहो न थारो, फागण हो गया भगता को,
तै तो बेठ्यो बेठ्यो बाबा, लगा तेरा दरबार…गलती तेरी है,
गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार…गलती तेरी है ॥
॥ अंतरा ४ ॥
'बनवारी' थाणे हर फागण को, देनो पड़े बुलावो जी,
थारी इक गलती से बाबा, हो गया में हकदार…गलती तेरी है,
गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार…गलती तेरी है ॥
गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार…गलती तेरी है,
अब फागण में नही बुलावे, हो जा सी टकरार…गलती तेरी है ॥
✍️ लेखक :- जय शंकर चौधरी जी (Jay Shankar Chaudhary Ji)
तर्ज: धमाल | Tune: Dhamal
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अनूठा और हास्य-व्यंग्य से भरा फागुन भजन "गलती तेरी है सरकार" जय शंकर चौधरी जी द्वारा रचित है। यह भजन एक भक्त की श्याम बाबा से अनूठी शिकायत को दर्शाता है। भक्त कहता है कि बाबा ने उसे एक बार फागण (होली) दिखा दिया, जिससे उसका मन ललचा गया, और अब वे उसे फागण में बुलाते ही नहीं – यह सब बाबा की गलती है।
"गलती तेरी है सरकार, फागण दिखा दियो एक बार" – भक्त सीधे श्याम बाबा (सरकार) से कह रहा है कि यह गलती आपकी है। आपने एक बार मुझे फागण (होली का त्यौहार) दिखा दिया, जिससे मेरा मन ललचा गया। अब आप फागण में मुझे बुलाते ही नहीं, यह तो टकरार (झगड़ा) की बात हो गई।
"अगर फागण देखियो नही होतो, यो मनडो नही ललचातो" – भक्त कहता है कि अगर मैंने फागण देखा ही नहीं होता, तो यह मन ललचाता नहीं। फिर मैं आपके पीछे क्यों पड़ता, आपकी मनुहार (मनाना) क्यों करता?
"श्याम धणी अब सोच समज ले, चाले न तेरी मन मानी" – हे श्याम धणी (मालिक), अब आप सोच-समझ लीजिए। आपकी मनमानी नहीं चलेगी। थोड़ी लाज-शर्म तो करिए, इस बार बुलावा भेज दीजिए।
"अब यो फागण रहो न थारो, फागण हो गया भगता को" – भक्त कहता है कि अब यह फागण आपका नहीं रहा, यह फागण तो भक्तों (भगता) का हो गया है। आप तो बैठे-बैठे बाबा, अपना दरबार लगाए हैं।
"'बनवारी' थाणे हर फागण को, देनो पड़े बुलावो जी" – लेखक बनवारी (अपने नाम का प्रयोग करते हुए) कहते हैं कि आपको हर फागण में बुलावा देना पड़ेगा। आपकी एक गलती से (फागण दिखा देने से) मैं हकदार (अधिकारी) हो गया हूँ।
🔍 इस अनूठे भजन का विशेष महत्त्व
भक्ति में हास्य और रूठना: यह भजन भक्ति के एक अनूठे पहलू को दर्शाता है – भक्त का अपने आराध्य से रूठना और उन पर गलती थोपना। यह भक्त और भगवान के बीच के प्रेमपूर्ण संबंध को दर्शाता है जहाँ भक्त बेझिझक अपनी बात रख सकता है।
तर्ज "धमाल": यह भजन लोकप्रिय "धमाल" तर्ज पर बनाया गया है। यह तर्ज बहुत ही उत्साहपूर्ण और नृत्य-प्रधान है, जो इस भजन को और भी जीवंत और मनोरंजक बनाती है।
"फागण" – होली का त्यौहार: फागण (फाल्गुन) महीने में होली का त्यौहार मनाया जाता है। खाटू श्याम बाबा का मेला भी इसी महीने में विशेष रूप से लगता है। भक्त को फागण में बाबा के दरबार में जाने की तीव्र इच्छा है।
"हो जा सी टकरार": यह पंक्ति भक्त के बेबाक अंदाज को दर्शाती है। वह कहता है कि अब तो यह टकरार (झगड़े) जैसी बात हो गई कि आपने एक बार दिखाया और अब बुलाते ही नहीं।
"बनवारी" – लेखक का नाम: लेखक ने "बनवारी" नाम का उल्लेख करके इस भजन को व्यक्तिगत स्पर्श दिया है। बनवारी कृष्ण का भी एक नाम है, और यहाँ यह लेखक के नाम के रूप में प्रयुक्त हुआ है। वे कहते हैं कि बाबा की एक गलती से वे हकदार हो गए हैं।
जय शंकर चौधरी जी की रचना: लेखक जय शंकर चौधरी जी ने इस भजन के माध्यम से भक्ति में हास्य और प्रेम का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है। उनकी सरल भाषा और अनूठा अंदाज इस भजन को विशेष बनाते हैं।
💖 भक्ति में रूठने का आनंद
🎯 संदेश
इस भजन का मूल संदेश यह है कि भक्त और भगवान का रिश्ता इतना घनिष्ठ होता है कि भक्त उनसे रूठ भी सकता है, उन पर गलती भी थोप सकता है। श्याम बाबा ने एक बार फागण का आनंद दिखा दिया, और अब भक्त हर फागण में उनके पास जाने का हकदार हो गया है। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में सिर्फ विनती ही नहीं, बल्कि प्रेमपूर्ण शिकायत और रूठना भी शामिल है।
✨ अनूठी शैली का भजन
गलती तेरी है सरकार केवल एक भजन नहीं, बल्कि भक्ति की उस अनूठी शैली का प्रतीक है जहाँ भक्त अपने आराध्य से बेबाकी से पेश आता है। यह भजन हमें बताता है कि श्याम बाबा के दरबार में दिखावा नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम और अपनापन चलता है। चाहे भक्त रूठे, चाहे मनुहार करे, बाबा सब सुनते हैं और अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।
🙏 ॐ श्री खाटू श्याम महाराज की जय। थोड़ी लाज शर्म तो बुलावो, भेज दे अब की बार।।
लेखक: जय शंकर चौधरी जी | Jay Shankar Chaudhary Ji | तर्ज: धमाल
॥ थारी इक गलती से बाबा, हो गया में हकदार ॥