Ganesh Bhajan

हम तुमको पूजते हैं गणराज सबसे पहले – गणेश वंदना | Ganpati Bhajan

128 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें।

🐘 हम तुमको पूजते हैं गणराज सबसे पहले – गणेश वंदना

(Hum Tumko Pujte Hain Ganraj Sabse Pehle) – Ganpati Bhajan

हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले ॥

विवरण एवं मुख्य बिंदु

🎤 गायक/लेखक:पारम्परिक
🏷️ श्रेणी:गणेश भजन, वंदना
🕉️ देवता:भगवान गणेश

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ वक्रतुण्ड गायत्री ॥

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

॥ स्थायी ॥

हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले॥

॥ अंतरा १ ॥

ऋद्धि और सिद्धि के दाता हो तुम,
हम सबके भाग्य-विधाता हो तुम।
है आपको पुकारा, सरताज सबसे पहले,
हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले॥

॥ अंतरा २ ॥

हे गौरी-नंदन, हे शंकर-तनय,
हम आपसे करते हैं विनय।
चरणों में है समर्पण, महाराज सबसे पहले,
हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले॥

॥ अंतरा ३ ॥

मुझको शरण आपकी मिल सके,
जीवन की बगिया मेरी खिल सके।
कल भी यही कहूँगा, और आज सबसे पहले,
हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले॥

🎵 गणेश वंदना | श्री गणेशाय नमः

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन भगवान गणेश की वंदना है, जिन्हें किसी भी शुभ कार्य से पहले पूजा जाता है। "हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले" – हम सबसे पहले आपको, गणों के राजा को पूजते हैं।

प्रारंभ में वक्रतुण्ड गायत्री मंत्र है – "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा" – अर्थ: हे वक्रतुण्ड (टेढ़ी सूंड वाले), महाकाय (विशाल शरीर वाले), करोड़ों सूर्यों के समान तेज वाले, हे देव, मेरे सभी कार्यों में निर्विघ्नता प्रदान करें।

"ऋद्धि और सिद्धि के दाता हो तुम, हम सबके भाग्य-विधाता हो तुम" – आप ऋद्धि-सिद्धि प्रदान करने वाले हैं, हम सबके भाग्य विधाता हैं।

"हे गौरी-नंदन, हे शंकर-तनय, हम आपसे करते हैं विनय" – हे गौरी के नंदन, शंकर के पुत्र, हम आपसे विनती करते हैं। "चरणों में है समर्पण, महाराज सबसे पहले" – सबसे पहले आपके चरणों में समर्पण है।

"मुझको शरण आपकी मिल सके, जीवन की बगिया मेरी खिल सके" – मुझे आपकी शरण मिल सके, मेरे जीवन की बगिया खिल सके। "कल भी यही कहूँगा, और आज सबसे पहले" – कल भी यही कहूँगा, और आज भी सबसे पहले आपकी स्तुति करता हूँ।

यह भजन सिखाता है कि हर शुभ कार्य की शुरुआत गणपति वंदना से करनी चाहिए। वे विघ्नहर्ता हैं, ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं, और उनकी शरण में जाने से जीवन खिल उठता है।

🐘 गणेश जी – विघ्नहर्ता एवं प्रथम पूज्य

भगवान गणेश को हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले पूजा जाता है। इन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धि के दाता और सिद्धि-ऋद्धि के स्वामी के रूप में जाना जाता है। इनके प्रमुख नाम हैं: गणपति, गणेश, वक्रतुण्ड, एकदन्त, गजानन, लम्बोदर, आदि।

इस भजन में गणेश जी को गौरी-नंदन (पार्वती के पुत्र) और शंकर-तनय (शिव के पुत्र) कहकर संबोधित किया गया है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🐘 प्रथम पूज्य

"हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले" – यह पंक्ति गणेश जी की प्रथम पूज्यता को दर्शाती है। किसी भी कार्य की शुरुआत में उनका स्मरण शुभ और विघ्न-मुक्ति का कारण होता है।

✨ ऋद्धि-सिद्धि के दाता

गणेश जी को ऋद्धि-सिद्धि का स्वामी माना जाता है। भक्त उनसे भौतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि की प्रार्थना करता है।

🎯 संदेश : गणराज सबसे पहले पूज्य हैं। वे ऋद्धि-सिद्धि के दाता, भाग्य-विधाता, गौरी-नंदन, शंकर-तनय हैं। उनकी शरण में जाने से जीवन खिल उठता है। आज भी और कल भी, हम सबसे पहले उन्हीं को पूजेंगे।

॥ हम तुमको पूजते हैं, गणराज सबसे पहले ॥
॥ निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का यह भजन "हम तुमको पूजते हैं गणराज सबसे पहले – गणेश वंदना | Ganpati Bhajan" सभी कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से गाया जाता है। विघ्नहर्ता गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देव हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और चूषक वाहन का सुंदर वर्णन है।

इस भजन की मूल भावना विघ्न विनाश और शुभ-लाभ की प्राप्ति की है। जीवन में जब भी कोई नया कार्य प्रारंभ करना हो, तो गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश संकीर्तन से मानसिक अशांति दूर होती है, बुद्धि कुशाग्र होती है और किसी भी कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सम्मुख दूर्वा और मोदक अर्पित कर इस भजन का संकीर्तन करें। गायन के समय सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की पूजा में 'दूर्वा' (दूब घास) क्यों चढ़ाई जाती है?

दूर्वा शीतलता प्रदान करने वाली है। अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें दूर्वा चढ़ाई थी। तब से गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।

गणेश जी के भजन किस दिन विशेष रूप से गाने चाहिए?

बुधवार का दिन और हर माह आने वाली संकष्टी व विनायक चतुर्थी की तिथियां गणेश आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।

क्या प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण हर पूजा से पहले जरूरी है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव से मिले वरदान के कारण किसी भी शुभ कार्य या देव पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन व स्मरण से ही की जाती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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