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Hanuman Chalisa

श्री हनुमान चालीसा – Hanuman Chalisa Hindi Lyrics | संकट कटै मिटे सब पीरा

641 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🕉️ श्री हनुमान चालीसा

(Hanuman Chalisa) – संकट कटै मिटे सब पीरा

रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

📝 हनुमान चालीसा परिचय

📖 रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास
🎯 देवता: हनुमान जी
📿 चौपाइयाँ: 40

📜 श्री हनुमान चालीसा (हिन्दी में)

॥ दोहा ॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

॥ दोहा ॥

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

🕉️ गोस्वामी तुलसीदास कृत

🙏 हनुमान चालीसा का महत्व और संदेश

हनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित अत्यंत प्रसिद्ध और शक्तिशाली स्तोत्र है। इसमें 40 चौपाइयाँ हैं, इसलिए इसे चालीसा कहा जाता है। यह भगवान हनुमान की स्तुति, उनके गुणों, शक्तियों और उनके द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन करता है।

प्रमुख भाव:

  • प्रार्थना (दोहा): भक्त गुरु के चरणों में मन को शुद्ध करके श्रीराम के यश का वर्णन करने का संकल्प लेता है और हनुमान जी से बल, बुद्धि, विद्या और कष्टों के निवारण की प्रार्थना करता है।
  • हनुमान जी का स्वरूप: उन्हें ज्ञान और गुणों का सागर, तीनों लोकों में प्रसिद्ध, राम के दूत, अपार बल के धाम, अंजनी के पुत्र और पवन पुत्र के रूप में वर्णित किया गया है।
  • उनके गुण और कार्य: वे सोने के वर्ण वाले, सुंदर वस्त्र धारण करने वाले, कुंडल धारण किए, घुंघराले बालों वाले, हाथों में वज्र और ध्वजा धारण किए, कंधे पर जनेऊ सजाए, शंकर के अवतार और केसरी के नंदन हैं।
  • लीलाएँ: उन्होंने सीता जी को सूक्ष्म रूप में दर्शन दिए, विकराल रूप धारण कर लंका जलाई, भीम रूप धारण कर असुरों का संहार किया, संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवित किया, सुग्रीव और विभीषण की सहायता की, और सूर्य को मधुर फल समझकर निगल लिया था।
  • आशीर्वाद: उनकी शरण में आने वाले को सब सुख मिलते हैं। वे राम जी के द्वार के रखवाले हैं, बिना उनकी आज्ञा के कोई प्रवेश नहीं पा सकता। उनके नाम से भूत-प्रेत नहीं आते, रोग नष्ट होते हैं और सब पीड़ा मिटती है। संकट में हनुमान जी भक्त को छुड़ाते हैं।
  • महिमा: हनुमान जी अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता हैं। उनके भजन से राम जी की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्म के दुख दूर होते हैं।
  • फल: जो कोई सौ बार हनुमान चालीसा का पाठ करता है, वह बंधनों से मुक्त होकर परम सुख को प्राप्त करता है।

विशेष: अंतिम दोहे में प्रार्थना है कि पवन पुत्र हनुमान जो संकटों को हरने वाले और मंगलमूर्ति हैं, वे राम, लक्ष्मण और सीता सहित हमारे हृदय में निवास करें।

🕉️ हनुमान जी के प्रमुख नाम

  • हनुमान: जिनके हनु (जबड़ा) टूटा हुआ था (बाल्यकाल में)
  • पवनपुत्र: पवन देव के पुत्र
  • अंजनेय: अंजनी के पुत्र
  • महाबीर: महान वीर
  • बजरंगबली: वज्र के समान शरीर वाले बलशाली
  • कपीश्वर: वानरों के राजा
  • रामदूत: श्रीराम के दूत
  • संकटमोचन: संकटों को दूर करने वाले
  • मारुतिनंदन: मारुत (पवन) के पुत्र
  • केसरीनंदन: केसरी के पुत्र

🔍 हनुमान चालीसा का विशेष महत्त्व

⚡ शक्ति और सुरक्षा

हनुमान चालीसा का पाठ करने से भक्त को अपार शक्ति और सुरक्षा प्राप्त होती है। यह भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रुओं से रक्षा करता है।

🩺 रोग निवारण

"नासै रोग हरै सब पीरा" – इस चालीसा के नियमित पाठ से रोगों का नाश होता है और सभी प्रकार की पीड़ा दूर होती है।

🎯 संदेश : संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा। हनुमान चालीसा का पाठ करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं, सभी पीड़ाएँ मिटती हैं। हनुमान जी भक्तों के सच्चे रखवाले हैं, उनकी शरण में जाने वाले को किसी से भय नहीं रहता।

॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ॥
॥ जय कपीस तिहुं लोक उजागर ॥
श्रेणियां: Hanuman Chalisa hanuman Gatha

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा विभिन्न धर्मग्रंथों, वैदिक संहिताओं और प्रामाणिक गायक प्रस्तुतियों के आधार पर समीक्षित एवं शुद्धीकृत किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 09 Aug 2026

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