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Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि के दौरान वास्तु उपाय: घर में सकारात्मक ऊर्जा कैसे लाएं? (Chaitra Navratri Vastu Tips: Bring Positive Energy Home)

226 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
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🏠 चैत्र नवरात्रि में वास्तु उपाय

घर में सकारात्मक ऊर्जा कैसे लाएं? (Vastu Tips for Positive Energy)

नवरात्रि के पावन अवसर पर वास्तु दोष दूर करें, सौभाग्य बढ़ाएं

🌟 नवरात्रि और वास्तु का संगम

चैत्र नवरात्रि वर्ष की पहली नवरात्रि होती है, जब प्रकृति नवीन ऊर्जा से भर जाती है। इस समय किए गए वास्तु उपाय न केवल घर के वातावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। वास्तु शास्त्र और नवरात्रि की साधना का यह संगम घर में सुख-समृद्धि और शांति लाने का सर्वोत्तम अवसर है।

इस लेख में हम जानेंगे कि चैत्र नवरात्रि के दौरान किन वास्तु उपायों को अपनाकर आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा सकते हैं, वास्तु दोषों का निवारण कर सकते हैं, और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

🔬 वैज्ञानिक दृष्टि से वास्तु के ये उपाय क्यों कारगर हैं?

वास्तु उपायों का वैज्ञानिक आधार भी है। नवरात्रि के समय वातावरण में विशेष परिवर्तन होते हैं जो इन उपायों को अधिक प्रभावी बनाते हैं:

  • ऊर्जा का प्रवाह: नवरात्रि में पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र अधिक सक्रिय हो जाता है। सही दिशा में किए गए उपाय ऊर्जा के संतुलन को बढ़ाते हैं।
  • वायु शुद्धि: अगरबत्ती, दीपक और हवन से वायु शुद्ध होती है और नकारात्मक आयन बढ़ते हैं, जो मानसिक शांति के लिए आवश्यक हैं।
  • रंगों का प्रभाव: नवरात्रि के नौ रंगों का प्रयोग वातावरण में सकारात्मक कंपन पैदा करता है और मनोदशा को प्रभावित करता है।
  • दिशा का विज्ञान: प्रत्येक दिशा का अपना तत्व और ऊर्जा होती है। सही दिशा में वस्तुओं को रखने से लाभ होता है।
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ऊर्जा प्रवाह
दिशा और तत्व

📌 ध्यान दें: नवरात्रि के नौ दिनों में की गई वास्तु शुद्धि पूरे वर्ष के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

🕉️ आध्यात्मिक दृष्टि से नवरात्रि में वास्तु उपाय

🕉️ 🏠

नवरात्रि में देवी की उपासना के साथ वास्तु सुधार का विशेष महत्व है:

  • देवी का आवास: माँ दुर्गा को घर में स्थापित करने से पूरे भवन में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। वास्तु दोष समाप्त होते हैं।
  • नौ दिनों की साधना: प्रत्येक दिन किसी न किसी दिशा के अधिष्ठात्री देवी की पूजा होती है, जिससे उस दिशा के वास्तु दोष दूर होते हैं।
  • घटस्थापना का महत्व: घटस्थापना से वातावरण में सकारात्मक तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो वास्तु के अशुभ प्रभावों को निष्क्रिय करती हैं।
  • कुंभ और कलश: जल से भरा कलश ऊर्जा का केंद्र होता है, जो घर के वास्तु दोषों को संतुलित करता है।

"नवरात्रि में वास्तु के नियमों का पालन करने से माँ दुर्गा की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।" – वास्तु शास्त्र

✨ ज्योतिषीय दृष्टि: नवरात्रि और ग्रहों का प्रभाव

चैत्र नवरात्रि का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है, जो नववर्ष का प्रारंभ भी है। इस समय सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, जिससे नई ऊर्जा का संचार होता है।

🌞 ग्रहों की स्थिति

  • सूर्य (आत्मा) मेष में – नेतृत्व और साहस बढ़ता है
  • चंद्रमा (मन) – नवरात्रि में मन शांत और पवित्र होता है
  • मंगल (ऊर्जा) – उत्साह और सक्रियता बढ़ती है
  • गुरु (ज्ञान) – वास्तु संबंधी ज्ञान का लाभ मिलता है

🏠 वास्तु पर प्रभाव

  • पूर्व (सूर्य) – स्वास्थ्य और करियर में लाभ
  • उत्तर (चंद्रमा) – धन और मानसिक शांति
  • दक्षिण (मंगल) – शक्ति और सुरक्षा
  • पश्चिम (गुरु) – ज्ञान और संतान सुख

ज्योतिषीय सुझाव: नवरात्रि के दौरान जिस दिशा के ग्रह कमजोर हों, उस दिशा में विशेष वास्तु उपाय करने से ग्रह दोष भी शांत होते हैं।

📜 पौराणिक कथा: वास्तु पुरुष और देवी दुर्गा

एक प्राचीन कथा के अनुसार, वास्तु पुरुष एक असुर था जिसने तपस्या करके वरदान प्राप्त किया कि वह सभी भवनों में वास करेगा। लेकिन उसके अत्याचारों से देवता परेशान हो गए। तब देवी दुर्गा ने वास्तु पुरुष को पराजित किया और उसे आदेश दिया कि वह केवल उन्हीं भवनों में रहेगा जहां वास्तु के नियमों का पालन नहीं होता।

देवी दुर्गा की कृपा से वास्तु पुरुष ने यह वरदान दिया कि जो भी व्यक्ति नवरात्रि के दौरान वास्तु उपाय करेगा और देवी की पूजा करेगा, उसके भवन में वह कभी अशुभ प्रभाव नहीं डालेगा। तभी से नवरात्रि में वास्तु सुधार की परंपरा चली आ रही है।

इस कथा से हमें सीख मिलती है कि नवरात्रि की साधना और वास्तु उपाय एक साथ करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

🏹

माँ दुर्गा

🏡 नवरात्रि के दौरान वास्तु उपाय (Step-by-Step)

1

प्रवेश द्वार की सफाई और सजावट

नवरात्रि के पहले दिन मुख्य द्वार को गंगाजल से साफ करें। रंगोली बनाएं, आम के पत्तों का तोरण लगाएं और स्वास्तिक बनाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

2

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) की सफाई

ईशान कोण को पवित्र और खाली रखें। यहां देवी-देवताओं की मूर्तियां रखें। इस स्थान पर कूड़ा-कचरा बिल्कुल न रखें। यहां घी का दीपक जलाएं।

3

पूजा स्थल का विशेष श्रृंगार

पूजा स्थान को भली-भांति साफ करें। माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। लाल या पीले वस्त्र चढ़ाएं। नौ दिनों तक अखंड दीप जलाएं।

4

रंगों का चयन

नवरात्रि के नौ दिनों के नौ रंगों के अनुसार घर में सजावट करें। प्रत्येक दिन के रंग का प्रयोग वस्त्रों, फूलों और साज-सज्जा में करें। इससे घर में सात्विक ऊर्जा बढ़ती है।

5

दिशाओं का ध्यान

  • उत्तर दिशा (धन): यहां तुलसी का पौधा या शंख रखें।
  • पूर्व दिशा (स्वास्थ्य): यहां सूर्य को जल चढ़ाएं और लाल फूल रखें।
  • दक्षिण-पश्चिम (स्थिरता): यहां भारी फर्नीचर रखें, कोई उपाय न करें।
  • उत्तर-पश्चिम (वायु): यहां झाड़ू न रखें, हल्की वस्तुएं रखें।
6

जल और अग्नि का महत्व

उत्तर-पूर्व में जल का पात्र रखें। रसोई घर अग्नि कोण (दक्षिण-पूर्व) में होना चाहिए। नवरात्रि में रसोई की सफाई विशेष रूप से करें और यहां हवन करें।

7

क्रिस्टल और पौधे

घर में सकारात्मक ऊर्जा के लिए क्रिस्टल, स्फटिक या मनी प्लांट रखें। तुलसी, केले का पौधा विशेष लाभकारी होते हैं।

8

नकारात्मकता दूर करें

टूटे-फूटे सामान, पुराने अखबार, बेकार वस्तुएं घर से हटा दें। नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन लहसुन-प्याज का सेवन न करें, घर में शुद्धता बनाए रखें।

9

नौ दिनों का विशेष पाठ और भोजन

नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। घर में सात्विक भोजन बनाएं, कन्याओं को भोजन कराएं। इससे घर की वास्तु ऊर्जा शुद्ध होती है।

⚠️ सुझाव: नवरात्रि के पहले दिन से ही ये उपाय शुरू कर दें और नौ दिनों तक नियमित रूप से पालन करें। अष्टमी या नवमी के दिन हवन अवश्य करें।

🛏️ कमरे के अनुसार विशेष वास्तु टिप्स

🚪 मुख्य द्वार

  • स्वास्तिक, ओम या शुभ लेख लिखें।
  • तोरण में आम के पत्ते या गेंदे के फूल लगाएं।
  • दरवाजे की घंटी या घंटा अवश्य लगाएं।

🪑 बैठक कक्ष

  • दक्षिण-पश्चिम दिशा में भारी फर्नीचर रखें।
  • उत्तर-पूर्व दिशा खाली रखें या यहां देवी का चित्र लगाएं।
  • ताजे फूलों की सजावट करें।

🍽️ रसोई

  • चूल्हा दक्षिण-पूर्व में रखें।
  • पानी की टंकी उत्तर-पूर्व में।
  • नवरात्रि में रसोई को गंगाजल से पवित्र करें।

🛌 शयन कक्ष

  • बिस्तर दक्षिण-पश्चिम में रखें, सिर दक्षिण की ओर।
  • भगवान की मूर्ति शयन कक्ष में न रखें।
  • नवरात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें।

🧘 पूजा कक्ष

  • उत्तर-पूर्व कोण में हो।
  • माँ दुर्गा की प्रतिमा पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके रखें।
  • नौ दिनों तक अखंड दीप जलाएं।

🧹 भंडार कक्ष

  • दक्षिण-पश्चिम में हो।
  • अनाज और आवश्यक वस्तुएं व्यवस्थित रखें।
  • नवरात्रि में दान देना शुभ होता है।

✨ नवरात्रि में वास्तु उपाय के विशेष लाभ

  • सकारात्मक ऊर्जा: घर में सुखद वातावरण बनता है, मन प्रसन्न रहता है।
  • आर्थिक समृद्धि: उत्तर-पूर्व के उपायों से धन लाभ होता है।
  • स्वास्थ्य लाभ: पूर्व दिशा के सुधार से स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • पारिवारिक सुख: वास्तु दोष दूर होने से घर में कलह कम होती है।
  • करियर में उन्नति: सही दिशा में कार्य करने से सफलता मिलती है।
  • आध्यात्मिक विकास: पूजा-पाठ और वास्तु से आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
  • नींद में सुधार: शयन कक्ष के वास्तु से अच्छी नींद आती है।
  • सुरक्षा कवच: नवरात्रि में किए उपाय घर को नकारात्मक शक्तियों से बचाते हैं।

❓ नवरात्रि और वास्तु से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या नवरात्रि में वास्तु उपाय करने से वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं?

उत्तर: हां, नवरात्रि की ऊर्जा में किए गए वास्तु उपाय अधिक प्रभावी होते हैं और वास्तु दोषों को शांत करते हैं।

प्रश्न 2: क्या मकान के किराएदार भी ये उपाय कर सकते हैं?

उत्तर: बिल्कुल। किराएदार भी अपने कमरे और पूजा स्थान पर ये उपाय कर सकते हैं। मुख्य द्वार की सफाई और रंगोली बनाना सभी के लिए शुभ है।

प्रश्न 3: क्या नवरात्रि में गृह प्रवेश कर सकते हैं?

उत्तर: नवरात्रि के दौरान गृह प्रवेश शुभ माना जाता है, विशेषकर प्रतिपदा, अष्टमी और नवमी के दिन। वास्तु उपायों के साथ यह और लाभकारी होता है।

प्रश्न 4: यदि घर में पूजा स्थल उत्तर-पूर्व में न हो तो क्या करें?

उत्तर: नवरात्रि में आप उसी स्थान पर देवी की स्थापना कर सकते हैं। वास्तु दोष दूर करने के लिए वहां शंख, स्फटिक या तांबे का कलश रखें।

प्रश्न 5: क्या नवरात्रि में नए घर की खरीदारी करना शुभ है?

उत्तर: हां, नवरात्रि में नई संपत्ति खरीदना बहुत शुभ होता है। खरीदारी के बाद वास्तु पूजा अवश्य कराएं।

प्रश्न 6: क्या ये उपाय फ्लैट में भी काम करते हैं?

उत्तर: जी हां, फ्लैट में भी वास्तु के नियम लागू होते हैं। मुख्य द्वार, बालकनी और आंतरिक कमरों में बताए गए उपाय कर सकते हैं।

प्रश्न 7: नवरात्रि के बाद वास्तु उपाय जारी रखने चाहिए?

उत्तर: नवरात्रि में किए गए बदलाव (जैसे पौधे, क्रिस्टल, सजावट) स्थायी रखें। नियमित पूजा और सफाई से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

📝 नवरात्रि का सदुपयोग करें, सकारात्मक ऊर्जा पाएं

चैत्र नवरात्रि केवल उपासना का ही नहीं, बल्कि अपने रहन-सहन और घर के वातावरण को शुद्ध करने का भी पर्व है। वास्तु शास्त्र के इन सरल उपायों को अपनाकर आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा सकते हैं, पारिवारिक कलह समाप्त कर सकते हैं और माँ दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

याद रखें, वास्तु केवल भौतिक नियमों का समूह नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की विद्या है। नवरात्रि के नौ दिन इस सामंजस्य को स्थापित करने के लिए सर्वोत्तम समय हैं।

इस नवरात्रि अपने घर को देवी का मंदिर बनाएं, और हर कोने में सुख-शांति का वास कराएं।

🙏 ॐ दुर्गायै नमः ।। सर्वे भवन्तु सुखिनः ।।

🏠 चैत्र नवरात्रि में वास्तु उपाय
सकारात्मक ऊर्जा का संचार करें, जीवन में खुशहाली लाएं
श्रेणियां: Chaitra Navratri

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यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा विभिन्न धर्मग्रंथों, वैदिक संहिताओं और प्रामाणिक गायक प्रस्तुतियों के आधार पर समीक्षित एवं शुद्धीकृत किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 08 Aug 2026

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(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
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