आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
Chaitra Navratri

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विधि, मंत्र और कथा (Chaitra Navratri Day 1: Maa Shailputri Puja Vidhi, Mantra and Katha)

679 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind | 2 मिनट पठन समय
आकार:
कंट्रास्ट:

🌺 चैत्र नवरात्रि 2026 – प्रथम दिन

माँ शैलपुत्री : पूजा विधि, मंत्र और कथा

शैलराज की पुत्री – आदिशक्ति का प्रथम स्वरूप

🌟 माँ शैलपुत्री का परिचय

चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। ये हिमालय राज की पुत्री होने के कारण "शैलपुत्री" कहलाती हैं। इनका वाहन वृषभ (नंदी) है, इसलिए इन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।

माँ शैलपुत्री अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल का पुष्प धारण करती हैं। ये पार्वती, सती एवं हैमवती के नाम से भी जानी जाती हैं। नवरात्रि की इस पहली बेला में माँ का ध्यान, पूजन और व्रत जीवन में सुख, शांति और मोक्ष प्रदान करता है।

📿 माँ शैलपुत्री पूजा विधि (Step-by-Step)

1

प्रातः स्नान एवं संकल्प

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें – "मम आध्यात्मिक उन्नति के लिए चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस माँ शैलपुत्री की पूजा करूँगा/करूँगी।"

2

कलश स्थापना (घट स्थापना)

पूर्व या उत्तर दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएँ। मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ और कलश स्थापित करें। कलश पर माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र रखें।

3

आवाहन, आसन एवं पाद्य

माँ का ध्यान करते हुए उनका आवाहन करें। उन्हें आसन प्रदान करें, पैर धोने के लिए जल (पाद्य) अर्पित करें।

4

पंचोपचार / षोडशोपचार पूजा

गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य (मीठा भोग), फल, ताम्बूल आदि अर्पित करें। माँ को लाल चुनरी, सिन्दूर, श्रृंगार सामग्री चढ़ाएँ।

5

मंत्र जाप एवं आरती

नीचे दिए गए मंत्रों का १०८ बार जाप करें। अंत में माँ शैलपुत्री की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।

🧺 आवश्यक पूजा सामग्री

  • 🔸 माँ शैलपुत्री की मूर्ति / चित्र
  • 🔸 लाल वस्त्र, चुनरी, सिन्दूर
  • 🔸 कलश, जौ, मिट्टी का पात्र
  • 🔸 गंगाजल, रोली, मौली, अक्षत
  • 🔸 पंचमेवा, फल, मिठाई (खीर/पूड़ी)
  • 🔸 धूप, दीपक, कपूर
  • 🔸 गुलाब या लाल फूल की माला
  • 🔸 पान, सुपारी, लौंग, इलायची
  • 🔸 नारियल (कलश पर)
  • 🔸 पंचपात्र, आचमनी, घंटी

🔱 माँ शैलपुत्री के मंत्र

मंत्रअर्थ / विशेष
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमःमूल मंत्र, पूजा में १०८ बार जाप करें
ॐ ह्रीं शैलपुत्र्यै नमःबीज मंत्र, साधना के लिए
या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥नवरात्रि प्रार्थना
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥ध्यान मंत्र

📖 माँ शैलपुत्री की कथा

माँ शैलपुत्री का पूर्व जन्म में सती के नाम से प्रसिद्ध था। उन्होंने दक्ष प्रजापति की पुत्री के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को पति रूप में पाया। एक बार दक्ष ने यज्ञ किया, परंतु उसमें शिव को आमंत्रित नहीं किया। फिर भी सती बिना निमंत्रण पिता के यज्ञ में पहुँच गईं। वहाँ उन्होंने अपने पति शिव का अपमान सुना और योगाग्नि में स्वयं को जलाकर भस्म कर दिया।

अगले जन्म में उन्होंने हिमालय राज की पुत्री के रूप में जन्म लिया और "शैलपुत्री" कहलाईं। कठोर तपस्या के बाद पुनः भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। यह कथा हमें सिखाती है कि सतीत्व, सम्मान और तपस्या का कभी नष्ट न होने वाला महत्व है।

🌿 वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण

चैत्र नवरात्रि प्रकृति के नवीनीकरण का काल है। माँ शैलपुत्री का ध्यान मूलाधार चक्र को जागृत करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो ध्यान और साधना को गहराई प्रदान करता है। माँ को अर्पित किया गया सात्विक भोग (विशेषतः गाय का घी, मिठाई) शरीर और मन को शुद्ध करता है।

✨ माँ शैलपुत्री की पूजा के लाभ

  • मूलाधार चक्र जाग्रत होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • भय, असुरक्षा और नकारात्मकता दूर होती है।
  • विवाह में आ रही बाधाएँ समाप्त होती हैं।
  • संतान सुख और पारिवारिक सुख-शांति मिलती है।
  • मानसिक दृढ़ता और एकाग्रता का विकास होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1 – क्या इस दिन विशेष भोग लगता है?
हाँ, माँ को दूध से बनी खीर या मालपुआ का भोग अत्यंत प्रिय है।

प्रश्न 2 – क्या बिना कलश स्थापना के पूजा कर सकते हैं?
हाँ, संक्षिप्त विधि से केवल माँ की प्रतिमा के सामने दीप जलाकर मंत्र जाप कर सकते हैं।

प्रश्न 3 – माँ शैलपुत्री का प्रिय रंग क्या है?
लाल और सफेद रंग माँ को अति प्रिय हैं, इसलिए लाल वस्त्र चढ़ाएँ।

🌈 निष्कर्ष

चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की आराधना जीवन में नव ऊर्जा, साहस और भक्ति का संचार करता है। विधिपूर्वक पूजन और कथा श्रवण से माँ की कृपा सहज ही प्राप्त होती है। इस नवरात्रि आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास हो।

🙏 ॐ शैलपुत्र्यै नमः। ॐ शांति शांति शांति।।

श्रेणियां: Chaitra Navratri

सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा विभिन्न धर्मग्रंथों, वैदिक संहिताओं और प्रामाणिक गायक प्रस्तुतियों के आधार पर समीक्षित एवं शुद्धीकृत किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 10 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
(function() { let voiceCounter = 0; const answers = { "ध्यान": "ध्यान मन को स्थिर करने और भीतर विद्यमान चैतन्य (आत्मा) से जुड़ने का वैज्ञानिक मार्ग है। दैनिक १०-१५ मिनट का ध्यान तनाव को कम करता है, मस्तिष्क की एकाग्रता बढ़ाता है और आत्मिक शांति प्रदान करता है। साधना खंड में हमारे 'श्लोक उच्चारण' व '४३२Hz ध्यान संगीत' का उपयोग करें।", "पंचांग": "वैदिक पंचांग काल-गणना की अत्यंत सटीक वैज्ञानिक प्रणाली है। यह मुख्य रूप से पांच अंगों: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण पर आधारित होती है। इसके माध्यम से सौर तथा चंद्र गतियों के अनुसार शुभ मुहूर्त और राहु काल की स्थिति की गणना की जाती है।", "चार धाम": "सनातन संस्कृति में चार धाम - उत्तर में श्री बद्रीनाथ, पश्चिम में द्वारकाधीश, पूर्व में जगन्नाथ पुरी और दक्षिण में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग हैं। इन चारों धामों की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य जी ने देश की भौगोलिक एवं आध्यात्मिक एकता को अक्षउन बना रखने के उद्देश्य से की थी।", "आज का पंचांग": "आज का पंचांग देखने के लिए कृपया हमारे 'आज का वैदिक पंचांग' विजेट को देखें। वर्तमान दिन के अनुसार तिथि तथा राहु काल की सटीक गणना वहां उपलब्ध है।", "गायत्री": "गायत्री महामंत्र (ॐ भूर्भुवः स्वः...) समस्त वेदों का सार माना गया है। यह सविता देव (सूर्य) की उपासना करता है ताकि हमारी बुद्धि सन्मार्ग की ओर प्रेरित हो। इसका नित्य उच्चारण बुद्धि तीव्र करता है।", "केदारनाथ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); if (btn) { btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; } utterance.onend = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { if (btn) btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function initChatbot() { const launcher = document.getElementById('chatLauncher'); const drawer = document.getElementById('chatDrawer'); const closeBtn = document.getElementById('chatClose'); const input = document.getElementById('chatInput'); const sendBtn = document.getElementById('chatSendBtn'); const body = document.getElementById('chatBody'); if (!launcher || !drawer || !closeBtn || !input || !sendBtn || !body) { return; } launcher.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.toggle('open'); }); closeBtn.addEventListener('click', function(e) { e.stopPropagation(); drawer.classList.remove('open'); }); input.addEventListener('keydown', e => { if (e.key === 'Enter') { submitGlobalMessage(); } }); sendBtn.addEventListener('click', submitGlobalMessage); window.sendGlobalSuggestion = function(text) { input.value = text; submitGlobalMessage(); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { if (body.contains(typingIndicator)) { body.removeChild(typingIndicator); } const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } } if (document.readyState === 'loading') { document.addEventListener('DOMContentLoaded', initChatbot); } else { initChatbot(); } })(); �थ": "केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के पवित्र हिमालय क्षेत्र में मन्दाकिनी नदी के तट पर स्थित है। यह शिव जी के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसकी स्थापना पांडवों द्वारा की गई मानी जाती है और आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पुनरुद्धार किया था।" }; function matchResponse(query) { query = query.toLowerCase(); if (query.includes("ध्यान") || query.includes("meditation") || query.includes("sadhana")) { return answers["ध्यान"]; } else if (query.includes("पंचांग") || query.includes("panchang")) { return answers["पंचांग"]; } else if (query.includes("धाम") || query.includes("dham")) { return answers["चार धाम"]; } else if (query.includes("गायत्री") || query.includes("gayatri")) { return answers["गायत्री"]; } else if (query.includes("केदारनाथ") || query.includes("kedarnath")) { return answers["केदारनाथ"]; } else { return "वत्स! आपका प्रश्न अत्यंत कल्याणकारी है। सनातन मार्ग ज्ञान, भक्ति और कर्म का मार्ग है। मन को शांत कर सत्यपथ पर चलें। क्या आप किसी विशिष्ट तीर्थ यात्रा अथवा दैनिक साधना के बारे में जानना चाहते हैं?"; } } let voiceCounter = 0; window.readGuruVoice = function(text, btnId) { window.speechSynthesis.cancel(); const utterance = new SpeechSynthesisUtterance(text); utterance.lang = 'hi-IN'; utterance.rate = 0.85; const btn = document.getElementById(btnId); btn.innerHTML = ' श्रवण जारी है...'; utterance.onend = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; utterance.onerror = () => { btn.innerHTML = ' सुनें (Listen)'; }; window.speechSynthesis.speak(utterance); }; function submitGlobalMessage() { const query = input.value.trim(); if (query === "") return; // User Message bubble const userMsg = document.createElement('div'); userMsg.className = 'chat-msg user'; userMsg.textContent = query; body.appendChild(userMsg); input.value = ""; body.scrollTop = body.scrollHeight; // Typing Indicator const typingIndicator = document.createElement('div'); typingIndicator.className = 'chat-msg guru typing-indicator-container'; typingIndicator.innerHTML = `
`; body.appendChild(typingIndicator); body.scrollTop = body.scrollHeight; // Response Delay setTimeout(() => { body.removeChild(typingIndicator); const responseText = matchResponse(query); const guruMsg = document.createElement('div'); guruMsg.className = 'chat-msg guru'; voiceCounter++; const btnId = `global-guru-speech-${voiceCounter}`; guruMsg.innerHTML = `
${responseText}
`; body.appendChild(guruMsg); body.scrollTop = body.scrollHeight; }, 1200); } });