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तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना लिरिक्स (Teen Baad Ke Dhari Teeno Baad Chalao Na Lyrics in Hindi)

वीरता और विश्वास का प्रतीक, 'तीन बाण के धारी' भजन संकट में सहायता का मार्गदर्शन करता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

श्याम कृपा: संकटों का निवारण

आपके संकटों का निवारण करने हेतु शक्ति देने वाला अद्भुत भजन। भक्ति में डूबकर इसे गाएं।

तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना लिरिक्स (Teen Baad Ke Dhari Teeno Baad Chalao Na Lyrics in Hindi) - अंधेरो की नगरी से कैसे मैं पार जाऊं श्याम अब लेने आया, हौसला हार ना जाऊं, तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना, मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना, हारे के सहारे मेरे हारे के सहारे, हारे के सहारे, मेरी हार हराओ ना, तीन बाण के धारी तीनों बाण चलाओ ना, मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना।। तूफानों ने घेर लिया, मुझे राह नजर ना आए, तुम बिन कौन मेरा जो मेरी बांह पकड़ ले जावे, भटक रहा राहों में बाबा पार लगाओ ना, तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना, मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना।। किसको रिश्ते गिनवाऊँ, किसे जात बताऊँ मैं, क्या क्या जख्म दिए जग ने, किसे घात दिखाऊं मैं, बिन कुछ पूछे श्याम हमारा, कष्ट मिटाओ ना, तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना, मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना।। अनजानी नगरी में सब, अनजाने लगते हैं, हम तो तेरी याद में रो रो रातें जगते हैं, बहता इन आँखों से बाबा, नीर थमाओ ना, तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना, मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना।। कृष्ण को जिसने दान दिया, उस दानी के आगे, हमने सुना तेरी नाम लिए से संकट सब भागे, छोटू की विपदा को बाबा, आग लगाओ ना, तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना, मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना।। तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना, मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना, हारे के सहारे मेरे हारे के सहारे, हारे के सहारे, मेरी हार हराओ ना, तीन बाण के धारी तीनो बाण चलाओ ना, मुश्किल में है दास तेरा अब जल्दी आओ ना।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का प्रमुख विषय है संकटों की घड़ी में भगवान की सहायता की याचना करना। 'तीन बाण के धारी' का संदर्भ उस सर्वोच्च शक्ति से है, जो जीवन के अंधकार में प्रकाश लेकर आती है। यहां 'तीन बाण' से तात्पर्य तीन प्रमुख गुणों से है: धैर्य, साहस, और श्रद्धा। प्रवचन का आरंभ 'अंधेरो की नगरी' से होता है, जो जीवन की कठिनाइयों का प्रतीक है। भक्ति का भाव यह है कि भक्त सर्वशक्तिमान श्याम से सहायता की गुहार कर रहा है। विशेषकर 'हारे के सहारे' का अर्थ है कि भक्त सच्चे हृदय से प्रभु से अनुप्रह (निवेदन) कर रहा है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति को केवल ईश्वर पर विश्वास करना चाहिए, चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो।

भावार्थ की दृष्टि से, गीत में भक्त की पीड़ा और उसकी विनम्र प्रार्थना का उल्लेख किया गया है। भक्त कहता है 'तूफानों ने घेर लिया', जो कि जीवन में आने वाली समस्याओं का प्रतीक है। यहां पर 'भगवान' से न केवल संकट से मुक्ति की अपील की जा रही है, बल्कि उनकी कृपा और सहारा भी माँगा जा रहा है। भक्त ने अपने हृदय में भावुकता के साथ इस गीत को गाया है, क्योंकि वह जानता है कि केवल श्याम ही सभी दुखों का उपचार कर सकते हैं। भावनात्मक रूप से, यह गीत एक आत्मिक यात्रा को दर्शाता है, जो विविध संघर्षों और त्रासदियों से भरी होती है।

इस भजन में भक्तिभाव की गहराई और ईश्वर के प्रति समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। 'कृष्ण को जिसने दान दिया' का उल्लेख उन भक्तों की कथा को याद दिलाता है, जिन्होंने अपने सच्चे भाव से भगवान को समर्थ किया। यहां भक्ति मार्ग का अर्थ है कि भक्त अपनी आत्मा को ईश्वर के चरणों में समर्पित करता है और विश्वास करता है कि वह निश्चित रूप से उसकी सहायता करेगा। यह भजन न केवल धार्मिक भावना को जगाता है, बल्कि समर्पण, विश्वास, और साहस का प्रतीक भी है। यह दर्शाता है कि कैसे सच्चे हृदय से प्रार्थना करने से दीन-दुखियों की मुसीबतें दूर हो सकती हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन की महत्ता धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अनमोल है। यशोदानंदन कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हुए, यह भजन भक्त की आशा और भक्ति की प्रेरणा को व्यक्त करता है। महाभारत में कृष्ण का उल्लेख विशेष स्थान रखता है, जहां उन्होंने अपने भक्तों की सहायता की। यह भजन भक्तों को याद दिलाता है कि संकट की घड़ी में सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। पुराणों में भगवान कृष्ण की लीला का वर्णन किया गया है, जिसमें उन्होंने अपने भक्तों की रक्षा की है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक शांति, आंतरिक शक्ति, और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। यह भक्तों के मन में विश्वास और साहस भरता है, जिससे वे कठिनाइयों का सामना कर सकते हैं। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से भक्ति का अनुभव और ईश्वर की कृपा का आभास होता है, जिससे जीवन में सुख, शांति, और समाधान आता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या संध्या के समय करना श्रेष्ठ होता है। पूजन के समय दीप जलाना, पुष्प अर्पित करना, और मिठाई का भोग लगाना आकर्षक माना जाता है। सही दृष्टिकोण रखते हुए, भक्त को पूरे मन, श्रद्धा, और ध्यान के साथ इस भजन का पाठ करना चाहिए, ताकि आराधना के इस अनुभव का लाभ लिया जा सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

तीन बाण के धारी का अर्थ क्या है?

तीन बाण के धारी का अर्थ है भगवान श्री कृष्ण, जो अपने भक्तों के संकटों का समाधान करने वाले होते हैं। यह भगवान के तीन प्रमुख गुणों का प्रतीक है: धैर्य, श्रद्धा, और साहस।

इस भजन का सही समय कब है?

यह भजन सुबह या संध्या के समय गाना सबसे उत्तम माना जाता है, जब भक्त हृदय से ईश्वर के प्रति ध्यान लगाते हैं और उन्हें आंतरिक शांति का अनुभव होता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष लाभ हैं?

इस भजन का नियमित जाप मानसिक शांति और आत्मबल को बढ़ाता है, साथ ही भक्त को कठिन परिस्थितियों में साहस और दृढ़ता प्रदान करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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