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श्री बाँकेबिहारी चालीसा (Shree Banke Bihari Chalisa Lyrics) - Bhaktilok

49 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

श्री बाँकेबिहारी चालीसा 


दोहा


बांकी चितवन कटि लचक, बांके चरन रसाल,

स्वामी श्री हरिदास के बांके बिहारी लाल ॥


।। चौपाई ।।


जै जै जै श्री बाँकेबिहारी ।

हम आये हैं शरण तिहारी ॥

स्वामी श्री हरिदास के प्यारे ।

भक्तजनन के नित रखवारे ॥


श्याम स्वरूप मधुर मुसिकाते ।

बड़े-बड़े नैन नेह बरसाते ॥

पटका पाग पीताम्बर शोभा ।

सिर सिरपेच देख मन लोभा ॥


तिरछी पाग मोती लर बाँकी ।

सीस टिपारे सुन्दर झाँकी ॥

मोर पाँख की लटक निराली ।

कानन कुण्डल लट घुँघराली ॥


नथ बुलाक पै तन-मन वारी ।

मंद हसन लागै अति प्यारी ॥

तिरछी ग्रीव कण्ठ मनि माला ।

उर पै गुंजा हार रसाला ॥


काँधे साजे सुन्दर पटका ।

गोटा किरन मोतिन के लटका ॥

भुज में पहिर अँगरखा झीनौ ।

कटि काछनी अंग ढक लीनौ ॥


कमर-बांध की लटकन न्यारी ।

चरन छुपाये श्री बाँकेबिहारी ॥

इकलाई पीछे ते आई ।

दूनी शोभा दई बढाई ॥


गद्दी सेवा पास बिराजै ।

श्री हरिदास छवी अतिराजै ॥

घंटी बाजे बजत न आगै ।

झाँकी परदा पुनि-पुनि लागै ॥


सोने-चाँदी के सिंहासन ।

छत्र लगी मोती की लटकन ।।

बांके तिरछे सुधर पुजारी ।

तिनकी हू छवि लागे प्यारी ।।


अतर फुलेल लगाय सिहावैं ।

गुलाब जल केशर बरसावै ।।

दूध-भात नित भोग लगावैं ।

छप्पन-भोग भोग में आवैं ।।


मगसिर सुदी पंचमी आई ।

सो बिहार पंचमी कहाई ।।

आई बिहार पंचमी जबते ।

आनन्द उत्सव होवैं तबते ।।


बसन्त पाँचे साज बसन्ती ।

लगै गुलाल पोशाक बसन्ती ।।

होली उत्सव रंग बरसावै ।

उड़त गुलाल कुमकुमा लावैं ।।


फूल डोल बैठे पिय प्यारी ।

कुंज विहारिन कुंज बिहारी ॥

जुगल सरूप एक मूरत में ।

लखौ बिहारी जी मूरत में ॥


श्याम सरूप हैं बाँकेबिहारी ।

अंग चमक श्री राधा प्यारी ॥

डोल-एकादशी डोल सजावैं ।

फूल फल छवी चमकावैं ॥


अखैतीज पै चरन दिखावैं ।

दूर-दूर के प्रेमी आवैं ॥

गर्मिन भर फूलन के बँगला ।

पटका हार फुलन के झँगला ॥


शीतल भोग , फुहारें चलते ।

गोटा के पंखा नित झूलते ॥

हरियाली तीजन का झूला ।

बड़ी भीड़ प्रेमी मन फूला ॥


जन्माष्टमी मंगला आरती ।

सखी मुदित निज तन-मन वारति ॥

नन्द महोत्सव भीड़ अटूट ।

सवा प्रहार कंचन की लूट ॥


ललिता छठ उत्सव सुखकारी ।

राधा अष्टमी की चाव सवारी ॥

शरद चाँदनी मुकट धरावैं ।

मुरलीधर के दर्शन पावैं ॥


दीप दीवारी हटरी दर्शन ।

निरखत सुख पावै प्रेमी मन ॥

मन्दिर होते उत्सव नित-नित ।

जीवन सफल करें प्रेमी चित ॥


जो कोई तुम्हें प्रेम ते ध्यावें।

सोई सुख वांछित फल पावैं ॥

तुम हो दिनबन्धु ब्रज-नायक ।

मैं हूँ दीन सुनो सुखदायक ॥


मैं आया तेरे द्वार भिखारी ।

कृपा करो श्री बाँकेबिहारी ॥

दिन दुःखी संकट हरते ।

भक्तन पै अनुकम्पा करते ॥


मैं हूँ सेवक नाथ तुम्हारो ।

बालक के अपराध बिसारो ॥

मोकूँ जग संकट ने घेरौ ।

तुम बिन कौन हरै दुख मेरौ ॥


विपदा ते प्रभु आप बचाऔ ।

कृपा करो मोकूँ अपनाऔ ॥

श्री अज्ञान मंद-मति भारि ।

दया करो श्रीबाँकेबिहारी ॥


बाँकेबिहारी विनय पचासा ।

नित्य पढ़ै पावे निज आसा ॥

पढ़ै भाव ते नित प्रति गावैं ।

दुख दरिद्रता निकट नही आवैं ॥


धन परिवार बढैं व्यापारा ।

सहज होय भव सागर पारा ॥

कलयुग के ठाकुर रंग राते ।

दूर-दूर के प्रेमी आते ॥


दर्शन कर निज हृदय सिहाते ।

अष्ट-सिध्दि नव निधि सुख पाते ॥

मेरे सब दुख हरो दयाला ।

दूर करो माया जंजाल ॥


दया करो मोकूँ अपनाऔ ।

कृपा बिन्दु मन में बरसाऔ ॥


दोहा


ऐसी मन कर देउ मैं ,

निरखूँ श्याम-श्याम ।

प्रेम बिन्दु दृग ते झरें,

वृन्दावन विश्राम ॥


जय श्री बाँकेबिहारी जी महाराज की

जय श्रीराधिका रानी महारानी की जय

जय श्री हरिदास जी महाराज की जय



वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "श्री बाँकेबिहारी चालीसा (Shree Banke Bihari Chalisa Lyrics) - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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