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माँ मेरी माँ से मिला दे मुझे लिरिक्स (Maa Meri Maa Se Mila De Mujhe Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

345 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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माँ शक्तिशाली: भक्तों का आश्रय

माँ मेरी माँ से मिला दे मुझे भजन हृदय की गहराई से प्रेम और भक्ति का संचार करता है।

 माँ मेरी माँ से मिला दे मुझे लिरिक्स (Maa Meri Maa Se Mila De Mujhe Lyrics in Hindi) - माँ मेरी माँ से मिला दे मुझेममता का मैं वास्ता दे तुझेदर से ना तेरे जाऊँगा खालीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीओ माँ शेरोंवाली ओ माँ शक्तिशालीमाँ मेरी माँ से मिला दे मुझेममता का मैं वास्ता दे तुझेदर से ना तेरे जाऊँगा खालीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीमाँ चुप है बेटा रोता हैऐसा जग में कब होता हैमाँ चुप है बेटा रोता हैऐसा जग में कब होता हैपत्थर के मंदिर में रहकरदिल भी क्या तेरा माँ हो गया पत्थरदिल भी क्या तेरा माँ हो गया पत्थरतेरी दया को जगा दूंगारोकर मैं तुझको रुला दूंगापिघलेगी कब तू पहाड़ोंवालीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीसब की माता तब तुझे मानूमेरा दुःख पहचाने तोह जानूसब की माता तब तुझे मानूमेरा दुःख पहचाने तोह जानूजो ना दिखाई माँ की सूरतउठा ले जाऊंगा मैं तेरी मूरतउठा ले जाऊंगा मैं तेरी मूरतसब कुछ है धनवानो कानिर्धन के बस मात-पितादौलत येह मेरी क्यूँ तुने छुपा लीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीअपने भक्तों की तुझको कसमदिल के सच्चों की तुझको कसमतेरे बच्चों की तुझको कसमना अपनो को दे ये सजाहो अपने भक्तों की तुझको कसमदिल के सच्चों की तुझको कसमतेरे बच्चों की तुझको कसमना अपनो को दे ये सजाओ माँ शेरोंवाली ओ माँ शक्तिशालीत्रिशूल तेरा उठा लूँगाचरणों पे सर को चढ़ा दूंगारंग देगी तुझको लहू की लालीमाँ शेरोंवाली ओ माँ शेरोंवालीदुरी मिटा दे माँ से मिला देया मेरी माँ का रूप धर लेरूप धर ले, रूप धर लेओ ओ ओ ओओ ओ ओ ओओ ओ ओ ओ

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय माँ की अपार ममता और उनके प्रति अपनी उपासना है। गीत में भक्त अपनी माँ से मिलने की प्रार्थना कर रहा है, जिसमें वे माँ को 'शेरोंवाली' के रूप में संबोधित करते हैं। इसकी पंक्तियाँ 'ममता का मैं वास्ता दे तुझे' यह दर्शाती हैं कि भक्त माँ की कृपा के लिए आह्वान करते हैं, क्योंकि माता का प्रेम ही सच्ची सुरक्षा का आधार है। माँ की शक्तियों का उल्लेख करते हुए इसे 'माँ शक्तिशाली' कहा गया है, जिससे यह प्रतीत होता है कि माँ हर संकट से अपने भक्तों का रक्षा करती हैं। भजन की पंक्ति 'पत्थर के मंदिर में रहकर दिल भी क्या तेरा माँ हो गया पत्थर' यह दर्शाती है कि केवल मूर्तियों की पूजा करने से आध्यात्मिकता नहीं मिलती, बल्कि मन और हृदय की शुद्धता आवश्यक है।

भावार्थ में, यह भजन माँ के प्रति गहरी और सूक्ष्म भावनाओं को प्रदर्शित करता है। 'माँ चुप है बेटा रोता है' इस पंक्ति में यह दर्शाया गया है कि जब भक्त कठिनाइयों से गुजरता है, तो ऐसा प्रतीत होता है कि माँ की दया में कोई कमी है, और ये सवाल औऱ व्यथा भक्त की हृदय की गहराइयों से निकलते हैं। यहाँ एक प्रकार का द्वंद्व है - एक ओर भक्त की पीड़ा और दूसरी ओर माँ की स्तब्धता। भक्त चाहता है कि माँ की दया उन्हें अपने आंचल में ले ले, जो उनके प्रति सच्चा प्रेम दर्शाती है। यह अकेलापन और दुःख, और माँ की अदृश्यता का संकेत है, यह जीवन के वास्तविक संघर्षों का प्रतिनिधित्व करता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, यह भजन भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) की सिखावन देता है, जिसमें अनुयायी को अपनी भावनाओं का सही दिशा में प्रवाह करना का प्रेरणा मिलता है। यह बताता है कि कठिनाइयों में जब मनुष्य ने अपने प्रभु पर भरोसा बनाए रखा, तो वह सच्ची भक्ति को समझ सकता है। 'सब की माता तब तुझे मानूं' का अर्थ है कि माता की कृपा समस्त जीवों पर है, जिससे यह दर्शाता है कि भक्ति केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सर्वजन हिताय है। यहाँ पूजा और भक्ति की भावना को समानता की दृष्टि से देखा गया है, जिससे भक्त को आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में माँ के प्रति श्रद्धा के भाव को दर्शाता है। देवी माता को शेरोंवाली और शक्तिशाली के रूप में स्वीकार किया गया है, जो भक्तों की भक्ति और श्रद्धा के अनुभव को मन में प्रक्रियाशील करती हैं। पुराणों में माता सुंदरिका की विशेषता और शक्ति को व्यक्त किया गया है, जो इस प्रकार के भजन में व्यक्त की गई भावनाओं का गहराई में चित्रण करती है। इसलिए यह भजन केवल भक्ति नहीं, बल्कि साहस और संजीवनी शक्ति की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित गान मानसिक शांति और आत्म संतोष लाने में मदद करता है। यह भक्त में समर्पण और भक्ति की भावना को जागृत करता है, जिससे व्यक्ति कठिन समय में भी माँ के प्रति विश्वास बनाए रखता है। भक्ति से मन की शांति, सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्फूर्ति मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह या शाम के समय करना विशेष फलदायी होता है। भक्तों को दीये जलाने, फूल अर्पित करने और ध्यान की मुद्रा में बैठकर जप करने की सलाह दी जाती है। मन को एकाग्र करना और अपने हृदय में माँ के प्रति प्रेम की भावना को जगाना आवश्यक है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस देवी को समर्पित है?

यह भजन माँ दुर्गा को समर्पित है, जिन्हें 'माँ शेरोंवाली' के नाम से भी जाना जाता है। माँ दुर्गा शक्ति और संजीवनी की प्रतीक हैं।

भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश है माँ की अपार ममता और उनके प्रति भक्ति एवं श्रद्धा का भाव। भक्त अपनी कठिनाइयों में माँ की कृपा की कामना करता है।

इस भजन का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

इस भजन का पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और आंतरिक बल की प्राप्ति होती है, जिससे भक्त कठिनाईयों का सामना अधिक साहस से कर सकता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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