Chhath Puja Geet

आदित्य उगी भोरे भिनुसार (Aadity UgiBhore Bhinusar) - Rajani Shakya Chhath Puja Geet - Bhaktilok

133 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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आदित्य उगी भोरे भिनुसार (Aadity Ugi Bhore Bhinusar) - रजनी शाक्य का पावन छठ पूजा गीत

लोक आस्था, प्रकृति की उपासना और सूर्योपासना के महापर्व छठ की पावन बेला में लोक गायिका रजनी शाक्य द्वारा स्वरबद्ध भजन "आदित्य उगी भोरे भिनुसार (Aadity Ugi Bhore Bhinusar)" पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के घर-घर में गूंजने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय और कर्णप्रिय गीत है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह सूर्य भगवान (दिग्पाल भगवान भास्कर) के प्रति एक अंचल विशेष की अटूट निष्ठा, श्रद्धा और भोर की उस पहली किरण के स्वागत का जीवंत दस्तावेज है, जिसके लिए व्रती महिलाएँ और समस्त परिवार पूरे साल प्रतीक्षा करते हैं। सुशील सिंह के मर्मस्पर्शी शब्दों, पवन बांजो के मधुर संगीत और रजनी शाक्य की सुरीली और भावपूर्ण आवाज ने इस रचना को अमर बना दिया है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पारंपरिक छठ गीत के संपूर्ण बोल, इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व, सूर्योपासना की महिमा, और जीवन में इसके संदेश का गहन विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

स्थाई (मुखड़ा):

आदित्य उगी भोरे भिनुसार, अरघिया ले ले खड़ा बानी तोहरे दुआरे...

उगी हे आदितमल, सुरुज देव, ताकs ना नजरिया हमार हे...

अरघिया ले ले खड़ा बानी तोहरे दुआरे...

प्रथम अंतरा:

चारों पहर तोहरा महिमा गाई, भूखे-प्यासे व्रत तोहरा हम राखी...

निर्मल मन से तोहरा धियावे, कसुमल चुनरिया हम ओढ़ के आनी...

सुनी पुकार हे छठी मैया, सुनी पुकार हे सुरुज देवता...

अरघिया ले ले खड़ा बानी तोहरे दुआरे...

द्वितीय अंतरा:

घाटवा पे भीड़ लगल भारी, दर्शन पावे के बाड़ी दुनिया सारी...

केरा के घवदवा पियउर सोहे, नारियल सेव सुपा में मोहे...

भिनुसारिया के बेरिया जगमग, चमके तोहर उजियार हे...

अरघिया ले ले खड़ा बानी तोहरे दुआरे...

अंतिम चरण (समापन):

रजनी गावे तोहर सुनिधि गान, सेवक चरण पड़े तोहरे प्राण...

भव से तारs हे दीनानाथ, रखs सिर पर सदा हाथ...

अरघिया ले ले खड़ा बानी तोहरे दुआरे...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

लोक गायिका रजनी शाक्य द्वारा गाए गए इस छठ गीत का भावार्थ अत्यंत गहन और भक्ति रस से ओत-प्रोत है। गीत के मुखड़े में व्रती भक्त भगवान सूर्य (आदित्य) से प्रार्थना करती है कि हे सूर्य देव! भोर भिनुसार (प्रातःकाल की बेला) हो चुकी है, आप अपनी महिमा के साथ प्रकट हों। मैं अपने दोनों हाथों में अर्घ्य से भरी सूप और दउरा लिए आपके द्वार पर निर्जल और निराहार खड़ी हूँ। हे आदित्यमल! हे सुरुज देव! एक बार हमारी तरफ भी अपनी कृपा दृष्टि डालिए, हमारी भक्ति को स्वीकार कीजिए।

प्रथम अंतरे में भक्त अपनी साधना और तपस्या का वर्णन करते हुए कहती है कि हमने आपके व्रत को अत्यंत नियम-निष्ठा के साथ रखा है, चारों पहर आपके ही गुणों का गान किया है। शरीर भूखा और प्यासा है, परंतु मन में आपकी ज्योति जल रही है। तन पर कसुमल (लाल-पीले रंग की पवित्र) चुनरी ओढ़े हुए हम आपके घाट पर उपस्थित हैं। हे छठी मैया और हे सुरुज देवता, हमारी इस दीन पुकार को सुनिए और हमारी पूजा को स्वीकार कीजिए।

द्वितीय अंतरे में छठ घाट के सुंदर और अलौकिक दृश्य का वर्णन किया गया है। नदी या तालाब के घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी है, संसार भर के लोग आपके दर्शन के लिए व्याकुल हैं। बांस की सूप और दउरे में सजे हुए पीले केले के घवद, पानी वाला नारियल, सेब, नींबू और ठेकुआ प्रसाद आपकी शोभा बढ़ा रहे हैं। भोर की पहली किरण जब जल पर पड़ती है, तो सारा वातावरण जगमग हो उठता है। यह दृश्य आत्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला होता है।

अंतिम चरणों में गायिका रजनी शाक्य कहती हैं कि हे दीनानाथ! हम आपके चरणों के सेवक हैं, हमारे सिर पर अपना वरद हस्त बनाए रखें और इस भवसागर से हमारा उद्धार करें। यह गीत सूर्योपासना के दौरान व्रतियों के भीतर की उस ऊर्जा और समर्पण को बाहर लाता है जो उन्हें कठिन 36 घंटे के निर्जल व्रत को पूरा करने की शक्ति देता है। ऐसे अन्य पावन पर्वों और अनुष्ठानों के बारे में जानने के लिए आप छठ पूजा की संपूर्ण विधि और सूर्य देव स्तोत्र का अध्ययन कर सकते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मूल भावना प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, सूर्य देव के प्रति अगाध श्रद्धा और नारी शक्ति के तप का सम्मान करना है। सूर्य इस सृष्टि के एकमात्र प्रत्यक्ष देवता हैं, जो बिना किसी भेदभाद के सभी जीवों को ऊर्जा, जीवन और प्रकाश प्रदान करते हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि जीवन की हर कठिन परिस्थिति (चाहे वह व्रत का कठोर अनुशासन हो) में ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। यह पारिवारिक और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है, जहाँ पूरा समाज मिलकर नदी के घाट पर एक साथ सूर्य की उपासना करता है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name) आदित्य उगी भोरे भिनुसार (Aadity Ugi Bhore Bhinusar)
गायिका (Singer) रजनी शाक्य (Rajani Shakya)
गीतकार (Lyricist) सुशील सिंह (Sushil Singh)
संगीतकार (Music Composer) पवन बांजो (Pawan Banjo)
वीडियो निर्देशक (Video Director) रामबाबू यादव (Rambabu Yadav)
संपादन (Editor) शिवपूजन कुमार (Shivpujan Kumar)
रिकॉर्डिंग स्टूडियो तरंग स्टूडियो, पटना (Tarang Studio, Patna)
निर्माता एवं निर्देशक उमेश कुमार (Umesh Kumar)
संगीत लेबिल (Label) तरंग म्यूजिक (Tarang Music)
श्रेणी (Category) छठ पूजा गीत / लोक भजन

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस अमर लोकगीत के पीछे एक समर्पित कलात्मक टीम का हाथ है। तरुण म्यूजिक के बैनर तले उमीश कुमार के निर्देशन में बनी यह रचना बिहारी लोक संस्कृति की गहराई को छूती है। सुशील सिंह के अर्थपूर्ण गीत, जिन्हें पवन बांजो के लोक-सम्मत संगीत ने सजाया और रजनी शाक्य की सुरीली, सधी हुई आवाज ने जीवंत किया, आज हर छठ महापर्व की अनिवार्य पहचान बन चुके हैं। रजनी शाक्य ने अपनी गायकी से यह सिद्ध कर दिया है कि पारंपरिक लोक गीतों में आधुनिक संगीत के साथ कैसे अपनी मिट्टी की खुशबू को बरकरार रखा जा सकता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
आदित्य सूर्य देव / भगवान भास्कर सूर्य भगवान को संबोधित करते हुए
भिनुसार भोर का समय / प्रातःकाल सूर्य उदय से ठीक पहले का समय
अरघिया अर्घ्य / जल और दूध अर्पित करना सूर्य को सूप से जल देना
आदितमल आदित्य महाराज / सूर्य देव का आत्मीय संबोधन भक्त द्वारा प्रेम से पुकारना
कसुमल लाल या गहरे केसरिया रंग की पवित्र चुनरी व्रती महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला वस्त्र
घवदवा केले का पूरा गुच्छा छठ पूजा की मुख्य प्रसाद सामग्री
दउरा / सुपा बांस से बना पवित्र दपिया / सूप पूजा सामग्री रखने का पात्र

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व भारतीय सनातन संस्कृति में एकमात्र ऐसा अनुष्ठान है जहाँ अष्टगामी (डूबते) और उदीयमान (उगते) दोनों सूर्यों की पूजा की जाती है। "आदित्य उगी भोरे भिनुसार" गीत इसी दूसरी संध्या यानी सप्तमी की भोर के सूर्य को समर्पित है। आध्यात्मिक दृष्टि से, उगते सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का प्रतीक है कि मनुष्य अपने जीवन में अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान और प्रकाश के मार्ग पर अग्रसर हो। सांस्कृतिक दृष्टि से यह गीत पूर्वांचल की लोक परंपराओं, मातृ शक्ति के त्याग, और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने की अनूठी संस्कृति को संरक्षित करता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  1. कठिन परिश्रम और संयम: छठ व्रत का 36 घंटे का निर्जल उपवास यह सिखाता है कि जीवन के बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अटूट संयम और तपस्या की आवश्यकता होती है।
  2. प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: यह गीत हमें याद दिलाता है कि हमारा जीवन जल, वायु और सूर्य जैसे प्राकृतिक तत्वों पर निर्भर है, जिनका सम्मान करना हमारा परम कर्तव्य है।
  3. समर्पण और निष्ठा: भगवान के प्रति सच्ची निष्ठा हो तो सारी कठिनाइयां स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
  4. सामूहिकता और भाईचारा: घाट पर सभी जातियों और वर्गों के लोग एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं, जो सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा संदेश है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी और सप्तमी तिथि को यानी छठ महापर्व के दौरान नदी, तालाब या घाटों पर गूंजता है। इसके अलावा, प्रातकालीन दैनिक पूजा के समय, सूर्य भगवान को जल अर्पित करते समय, या किसी भी मांगलिक अवसर पर जब सूर्य उपासना की जाती है, इसे श्रद्धा के साथ सुना और गाया जाता है। यह भजन मन को अलौकिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

विषय (Topic) विवरण (Details)
गीत का शीर्षक आदित्य उगी भोरे भिनुसार
प्रमुख कलाकार रजनी शाक्य
संबंधित पर्व छठ पूजा (Chhath Puja)
देवता भगवान सूर्य (Surya Dev / Chhathi Maiya)
भाषा भोजपुरी / हिंदी लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, प्रातकालीन सूर्य वंदना
प्लेटफॉर्म तरंग म्यूजिक

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस पावन छठ गीत की प्रसिद्ध गायिका रजनी शाक्य (Rajani Shakya) हैं, जिनकी सुरीली आवाज ने इस भजन को अमर बना दिया है।

यह गीत महान लोक आस्था के पर्व 'छठ पूजा' (Chhath Puja) से संबंधित है, जिसमें भगवान सूर्य और छठी मईया की आराधना की जाती है।

इस गीत के बोल सुशील सिंह (Sushil Singh) द्वारा लिखे गए हैं और इसका संगीत पवन बांजो (Pawan Banjo) ने तैयार किया है।

सूर्य देव इस पृथ्वी पर प्रत्यक्ष देवता हैं जो समस्त जीवों को ऊर्जा, आरोग्य और जीवन प्रदान करते हैं। उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए छठ पर्व पर अर्घ्य दिया जाता है।

'भिनुसार' एक लोक शब्द है जिसका अर्थ प्रातःकाल, भोर का समय या सूर्योदय से ठीक पहले का समय होता है।

यह गीत 'तरंग म्यूजिक' (Tarang Music) के लेबल के तहत रिलीज किया गया है, जिसके निर्माता उमेश कुमार हैं।

छठ पूजा में ठेकुआ, कसार, केला, नारियल, सेब, सिंघाड़ा और विभिन्न मौसमी फल प्रसाद के रूप में बांस के सूप और दउरे में सजाए जाते हैं।

इस गीत को मुख्य रूप से कार्तिक छठ पर्व के दौरान, सुबह के अर्घ्य के समय या किसी भी सूर्य वंदना और भक्ति आयोजन में सुना जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस आलेख में प्रस्तुत छठ गीत के बोल, भावार्थ और सांस्कृतिक संदर्भ को प्रामाणिक लोक परंपराओं और कलाकरों के आधिकारिक डेटा के आधार पर संकलित किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को भारतीय लोक संस्कृति और सूर्योपासना के इस महान पर्व से गहराई से जोड़ना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक छठ लोकगीत संग्रह एवं पूर्वांचल लोक संस्कृति परंपरा।
  • तरंग म्यूजिक ऑफिशियल ऑडियो-विजुअल आर्काइव, पटना।
  • सूर्य पुराण एवं वैदिक सूर्योपासना ग्रंथ।
  • भक्ति लोक संपादकीय शोध दल द्वारा संकलित तथ्य।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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