"भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे" माता रानी की स्तुति में गाया जाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भजन है। यह भजन मुख्य रूप से माता वैष्णो देवी के भक्तों के बीच अत्यंत प्रचलित है। प्रातःकाल की बेला में जब भक्त माँ के चरणों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं, तब यह भजन श्रद्धा और भक्ति के भाव को जागृत करता है। इस भजन में माँ के दिव्य स्वरूप, उनके श्रृंगार, और उनके प्रति भक्त के समर्पण का सुंदर चित्रण किया गया है। यह न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि एक आह्वान है जो भक्त को माँ की ममतामयी गोद में ले जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे,
हो रही जय जय कार, मंदिर विच आरती जय माँ।
हे दरबारा वाली आरती जय माँ,
ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ।
काहे दी मैया तेरी आरती बनावा,
काहे दी पावां विच बाती, मंदिर विच आरती जय माँ।
सुहे चोले वाली आरती जय माँ,
ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ।
सर्व सोने दी आरती बनावा,
अगर कपूर पावां बाती, मंदिर विच आरती जय माँ।
हे माँ पिंडी रानी आरती जय माँ,
ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ।
कौन सुहागन दिवा बालेया मेरी मैया,
कौन जागेगा सारी रात, मंदिर विच आरती जय माँ।
सच्चिया ज्योतां वाली आरती जय माँ,
ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ।
सर्व सुहागिन दिवा बलिया मेरी अम्बे,
ज्योत जागेगी सारी रात, मंदिर विच आरती जय माँ।
हे माँ दुर्गा रानी आरती जय माँ,
ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ।
जुग जुग जीवे तेरा जम्मुए दा राजा,
जिस तेरा भवन बनाया, मंदिर विच आरती जय माँ।
हे मेरी अम्बे रानी आरती जय माँ,
ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ।
सिमर चरण तेरा ध्यानु यश गावे,
जो ध्यावे सो, यो फल पावे,
रख बाणे दी लाज, मंदिर विच आरती जय माँ।
सोहने मंदिरां वाली आरती जय माँ,
ओ पहाड़ा वाली आरती जय माँ।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त माँ से पूछता है कि माँ आपकी आरती किस प्रकार सजाऊं और किस प्रकार की बाती का उपयोग करूँ। माँ के प्रति अनन्य प्रेम के कारण भक्त उन्हें 'सर्व सोने' की आरती अर्पित करना चाहता है। भजन में 'ध्यानु' भक्त का उल्लेख है, जो माँ का अनन्य भक्त था। यह भजन हमें सिखाता है कि भक्ति में सामग्री से अधिक भाव का महत्व है। 'भोर भई' का अर्थ है कि जीवन का नया सवेरा हो गया है और अब समय है माँ की भक्ति में लीन होने का।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन माता वैष्णो देवी के दरबार में होने वाली आरती की परंपरा को दर्शाता है। इसमें माँ के विभिन्न रूपों जैसे 'पिंडी रानी', 'दुर्गा रानी' और 'पहाड़ा वाली' का आह्वान किया गया है। यह भजन प्रातःकाल की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को ब्रह्म मुहूर्त में या प्रातःकाल की पूजा के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे गाते समय मन में माँ के प्रति पूर्ण समर्पण और श्रद्धा होनी चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| भोर | प्रातःकाल / सुबह |
| सुहे चोले | लाल रंग के वस्त्र |
| पिंडी | माता का प्राकृतिक स्वरूप (पत्थर रूप) |
| ध्यानु | माता के एक प्रसिद्ध भक्त |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे |
|---|---|
| देवी | माँ दुर्गा / वैष्णो देवी |
| भाषा | हिंदी / पंजाबी मिश्रित |
| मुख्य भाव | समर्पण एवं भक्ति |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: यह भजन कब गाना चाहिए? उत्तर: इसे प्रातःकाल की पूजा या आरती के समय गाना चाहिए।
- प्रश्न: 'ध्यानु' कौन थे? उत्तर: ध्यानु माता के एक परम भक्त थे, जिनका उल्लेख पौराणिक कथाओं में मिलता है।
- प्रश्न: क्या इसे घर पर गा सकते हैं? उत्तर: हाँ, इसे घर पर माँ की पूजा करते समय श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
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