Sai Baba

मिट जायेंगे कष्ट तमाम | Mit Jayenge Kasht Tamam | Rinky Vishwakarma | Sai Baba Bhajan| Sai Palanhar - BhaktiLok

63 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह अत्यंत पावन और कर्णप्रिय भजन "मिट जायेंगे कष्ट तमाम | Mit Jayenge Kasht Tamam" प्रसिद्ध गायिका रिंकी विश्वकर्मा (Rinky Vishwakarma) की मधुर वाणी में सज़ा हुआ है। 'साईं पालनहार' के रूप में बाबा की महिमा का गुणगान करने वाला यह भजन भक्तों के जीवन में आने वाले सभी प्रकार के भौतिक, मानसिक और आध्यात्मिक दुखों को हरने वाला माना जाता है। साईं बाबा का जीवन और उनके वचन संपूर्ण मानवता के लिए प्रेम, सहिष्णुता, करुणा और 'सबका मालिक एक' के शाश्वत संदेश का प्रतीक हैं। जब कोई भक्त पूरी श्रद्धा और 'सबूरी' (धैर्य) के साथ बाबा के चरणों में शरण लेता है, तो उसके सारे कष्ट स्वतः ही दूर हो जाते हैं। इस भजन के संकीर्तन से न केवल मन को असीम शांति मिलती है, बल्कि बाबा की दिव्य उपस्थिति और उदी (भस्म) का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। प्रातः काल या संध्या वंदन के समय इस भजन का श्रवण और गायन भक्तों को एक अलौकिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शिरडी वाले साईं बाबा के चरणों में समर्पित इस भजन के शुद्ध और पूर्ण बोल नीचे दिए गए हैं:


मंगलाचरण / मुखड़ा:

मिट जायेंगे कष्ट तमाम, साईं के दर पे आके तो देख,
मिलता है सबको आराम, साईं के दर पे आके तो देख।
सबका मालिक एक है भाई, इसकी महिमा न्यारी,
शिरडी वाले पालनहार की, सूरत लगे प्यारी।

अंतरा 1:

दुःख के बादल घिर आए हों, रास्ता कोई न सूझे,
बाबा की उदी को माथे लगा ले, मन से कुछ न तू बूझे।
भर झोली जो खाली आए, खाली कोई न जाए,
साईं बाबा के चरणों में, जो भी शीश झुकाए।

अंतरा 2:

जात-पांत का भेद मिटाकर, सबको गले लगाया,
दीन-दुखियों की सेवा करके, अपना धर्म निभाया।
जो पुकारे सच्चे मन से, दौड़े चले वो आते,
भक्तों के संकट को बाबा, पल में दूर भगाते।

समापन / टेक:

रंकी गाए महिमा इनकी, शीश झुकाए बारंबार,
साईं जैसा इस दुनिया में, नहीं कोई पालनहार।
मिट जायेंगे कष्ट तमाम, साईं के दर पे आके तो देख...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव शरणागति (Surrender), अटूट विश्वास और बाबा के प्रति समर्पण का है। पंक्तियों के माध्यम से यह समझाया गया है कि मनुष्य का जीवन संघर्षों और दुखों से घिरा हुआ है, परंतु यदि वह शिरडी वाले साईं बाबा के दरबार में अपनी पूरी आस्था के साथ उपस्थित हो जाए, तो उसके बड़े से बड़े कष्ट भी कपूर की तरह उड़ जाते हैं।

भजन की पहली पंक्ति "मिट जायेंगे कष्ट तमाम, साईं के दर पे आके तो देख" यह विश्वास दिलाती है कि साईं बाबा अपने दरबार में आने वाले किसी भी निराश भक्त को खाली हाथ नहीं लौटाते। बाबा की पवित्र 'उदी' और उनके वचनों का स्मरण मनुष्य के मन के अंधकार को दूर कर देता है। साईं बाबा ने अपने जीवनकाल में कभी किसी विशेष जाति या वर्ग का पक्ष नहीं लिया, बल्कि उन्होंने मानवता को ही सबसे बड़ा धर्म माना। यही कारण है कि जो भी भक्त सच्चे हृदय से उनका आह्वान करता है, बाबा उसकी पुकार अवश्य सुनते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

साईं बाबा के भजनों का संकीर्तन सनातन परंपरा में मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम माना गया है। इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति और सबूरी का संदेश: यह भजन बाबा के दो मुख्य उपदेशों—श्रद्धा और सबूरी—को गहराई से रेखांकित करता है।
  • सार्वभौमिक प्रेम: भजन 'सबका मालिक एक' की भावना को पुष्ट करता है, जो सभी धर्मों और जातियों के लोगों को एकजुट करता है।
  • कष्ट निवारण: मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और पारिवारिक बाधाओं से जूझ रहे भक्तों के लिए यह भजन संबल प्रदान करता है।
  • मधुर स्वर एवं संगीत: गायिका रिंकी विश्वकर्मा की भावपूर्ण और सरल शैली श्रोताओं को सीधे बाबा की भक्ति से जोड़ती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का गायन और श्रवण किसी भी समय किया जा सकता है, किंतु इसके आध्यात्मिक लाभ को बढ़ाने के लिए कुछ विशेष समय और नियम उत्तम माने गए हैं:

  • प्रातःकालीन वंदना: ब्रह्म बेला या सुबह स्नान के पश्चात साईं बाबा की तस्वीर के समक्ष दीपक प्रज्वलित कर इस भजन को सुनना दिनभर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
  • संध्या आरती: संध्या के समय धूप-दीप जलाकर साईं बाबा के ध्यान के साथ इसे गाना घर के वातावरण को पवित्र बनाता है।
  • गुरुवार व्रत एवं सत्संग: साईं बाबा के विशेष वार गुरुवार (Thursday) को आयोजित होने वाले सत्संग और व्रत पूजन में यह भजन विशेष रूप से गाया जाता है। अधिक जानकारी के लिए हमारे साईं बाबा भजन संग्रह को देखें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु शिरडी के महान संत साईं बाबा हैं। साईं बाबा को भगवान शिव, दत्तात्रेय और श्री राम का अवतार माना जाता है। महाराष्ट्र के शिरडी नगर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले बाबा ने जीवनभर लोगों को प्रेम, क्षमा, परोपकार और ईश्वर के प्रति समर्पण का मार्ग दिखाया। उनके आशीर्वाद से जुड़ी कई कथाएं और चमत्कार आज भी दुनिया भर के भक्तों में लोकप्रिय हैं। उनके भक्त नियमित रूप से साईं बाबा के 108 नामों का जाप करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन आधुनिक भक्ति संगीत परंपरा का एक सुंदर उदाहरण है, जिसे पारंपरिक लोक धुनों और सुगम संगीत के मिश्रण से तैयार किया गया है। गायिका रिंकी विश्वकर्मा ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से शिरडी के साईं दरबार के माहौल को जीवंत कर दिया है। रचना की पृष्ठभूमि शिरडी के उस सर्वसमावेशी दर्शन पर आधारित है जहाँ द्वारकामाई में सभी जातियों और धर्मों के लोग बिना किसी भेद-भाव के बाबा के दर्शन करते थे।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) है, जिससे यह आसानी से बच्चों से लेकर वृद्धों तक सबकी जुबान पर चढ़ जाता है। इसमें रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे 'दुःख के बादल घिर आए हों' और 'खाली झोली भरना'। काव्यात्मक लयबद्धता (Rhyme Scheme) इसे गाने में बेहद आनंददायक बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत का साधन नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने के गहरे दार्शनिक पाठ पढ़ाता है:

  • धैर्य और विश्वास: विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर और गुरु पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
  • समर्पण की भावना: अपने अहंकार को त्यागकर बाबा के चरणों में शरण लेने से सारे बोझ हल्के हो जाते हैं।
  • मानवता की सेवा: दीन-दुखियों की सहायता करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
कष्ट तमाम सभी प्रकार के दुःख और समस्याएं भौतिक और मानसिक बाधाएं जो साधना में बाधक हैं
उदी पवित्र भस्म (धूनी की राख) बाबा का प्रसाद जो रोगों और संकटों का निवारण करता है
पालनहार पालन-पोषण करने वाला रक्षक संपूर्ण ब्रह्मांड और भक्तों की देखभाल करने वाले परमात्मा
सबूरी धैर्य और संतोष कठिन समय में भी ईश्वर की इच्छा पर भरोसा रखना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "मिट जायेंगे कष्ट तमाम, साईं के दर पे आके तो देख..."
भावार्थ: कवि या गायक श्रोता को आश्वस्त कर रहा है कि यदि मनुष्य अपने जीवन के दुखों से त्रस्त होकर शिरडी वाले साईं बाबा की शरण में आ जाए, तो उसकी सारी पीड़ाएं नष्ट हो जाती हैं।

पंक्ति: "दुःख के बादल घिर आए हों, रास्ता कोई न सूझे, बाबा की उदी को माथे लगा ले..."
भावार्थ: जब जीवन में चारों तरफ निराशा छा जाए और कोई मार्ग न दिखाई दे, तब बाबा की पवित्र उदी को अपने मस्तक पर धारण करने से आंतरिक बल और संबल प्राप्त होता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

साईं बाबा के स्मरण के समय निम्नलिखित प्रसिद्ध मंत्र का जाप इस भजन के प्रभाव को और बढ़ा देता है:

"ॐ साईं श्री साईं जय जय साईं"
"सबका मालिक एक"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मिट जायेंगे कष्ट तमाम (Mit Jayenge Kasht Tamam)
गायक / कलाकार रंकी विश्वकर्मा (Rinky Vishwakarma)
आराध्य देव शिरडी के साईं बाबा (Sai Palanhar)
भाषा सरल हिंदी / बोलचाल की भाषा
मुख्य विषय भक्ति, शरणागति और संकट निवारण
उपयुक्त अवसर गुरुवार पूजा, दैनिक प्रार्थना, साईं सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन को लोकप्रिय गायिका रंकी विश्वकर्मा (Rinky Vishwakarma) ने अपनी मधुर वाणी में गाया है।

साईं बाबा के भजनों का संकीर्तन प्रातः काल, संध्या आरती के समय अथवा विशेष रूप से गुरुवार के दिन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

'पालनहार' वह है जो अपने भक्तों का पालन-पोषण करता है, उनकी रक्षा करता है और उनके जीवन के संकटों को दूर करता है। शिरडी के साईं बाबा को उनके भक्त पालनहार के रूप में पूजते हैं।

हाँ, इस भजन को घर पर अकेले व्यक्तिगत पूजा के दौरान या परिवार के साथ सामूहिक सत्संग में दोनों ही प्रकार से गाया और सुना जा सकता है।

उदी बाबा की धूनी से प्राप्त पवित्र भस्म है। इसे माथे पर लगाने से मानसिक शांति मिलती है और भक्तों का यह विश्वास है कि यह शारीरिक व आध्यात्मिक कष्टों से रक्षा करती है।

साईं बाबा के दो मुख्य उपदेश 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) हैं। इसके साथ ही 'सबका मालिक एक' उनका सार्वभौमिक संदेश है।

साईं बाबा के भक्तों के बीच साईं बाबा अष्टोत्तर शतनामावली, साईं चालीसा और श्री साईं सच्चरित्र का पाठ अत्यंत लोकप्रिय और पवित्र माना जाता है।

इस भजन को सुनने से मन का भटकाव दूर होता है, नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं और शिरडी वाले साईं बाबा के प्रति प्रेम और अटूट विश्वास में वृद्धि होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख शिरडी के साईं बाबा की महिमा और उनके भजनों के संकीर्तन के महत्व को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। सभी पंक्तियां, भावार्थ और सांस्कृतिक संदर्भ पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि पाठकों को सटीक, प्रेरणादायक और उच्च गुणवत्ता वाली जानकारी प्राप्त हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिरडी साईं बाबा संस्थान के पारंपरिक इतिहास और साहित्य पर आधारित
  • लोकप्रिय भक्ति संगीत परंपरा और संकीर्तन संग्रह
  • साईं सच्चरित्र एवं संबंधित संत साहित्य

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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