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श्री मेंहदीपुर बालाजी चालीसा व आरती – Lyrics, Meaning, Vidhi

30 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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Lyrics, Meaning, Vidhi परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री मेंहदीपुर बालाजी (हनुमान जी) की पवित्र चालीसा एवं आरती का सम्पूर्ण पाठ, सरल हिंदी भावार्थ, पाठ विधि, नियम एवं फलश्रुति। बालाजी महाराज की कृपा से भय, रोग, ग्रह दोष एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

सम्पूर्ण मूल पाठ

श्री मेंहदीपुर बालाजी चालीसा

॥ श्री मेंहदीपुर बालाजी चालीसा ॥

॥ दोहा ॥
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

॥ चौपाई ॥
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥२॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥४॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥५॥
संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥६॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥७॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥१०॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥११॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥१२॥
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥१७॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥२२॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥२४॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥२८॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥
साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥३१॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै॥३३॥
अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥३४॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥३५॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥३६॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥४०॥

॥ दोहा ॥
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

श्री बालाजी आरती

॥ श्री बालाजी आरती ॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज।
संकट हरन सुख करन, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

जय हनुमान बलवीर, जय हनुमान बलवीर।
संकट कटे मिटे सब पीर, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

जय बालाजी की जय, जय बालाजी की जय।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

जय बालाजी दयाल, जय बालाजी दयाल।
रोग दोष हर लेते हो, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

जय बालाजी सुखदायी, जय बालाजी सुखदायी।
भक्तों के तुम रखवारे, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

जय बालाजी अविनाशी, जय बालाजी अविनाशी।
कृपा करो महाराज, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

जय बालाजी भक्त वत्सल, जय बालाजी भक्त वत्सल।
दर्शन दो महाराज, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

जय बालाजी दीन दयाला, जय बालाजी दीन दयाला।
हाथ जोड़ कर प्रार्थना, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज।
संकट हरन सुख करन, तुम हो प्रभु के राज॥
जय बालाजी महाराज, जय बालाजी महाराज॥

आध्यात्मिक लाभ एवं नित्य पाठ विधि

श्री मेंहदीपुर बालाजी चालीसा व आरती – Lyrics, Meaning, Vidhi का श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

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