पौराणिक परिचय, उत्पत्ति एवं आध्यात्मिक महत्व
श्री हनुमत् पञ्चरत्नम् भगवान हनुमान की स्तुति का अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है। यह पाँच रत्नों के समान श्लोकों का संग्रह है, जो भक्त को भय, रोग, शोक और संकट से मुक्त करता है तथा हनुमान जी की कृपा प्रदान करता है।
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
॥ श्री हनुमत् पञ्चरत्नम् ॥
वीताखिलविषयेच्छं जातानन्दाश्रुपुलकमत्युच्छम् ।
सीतापतिदूताद्यं वन्दे श्रीरामपादसेवाढ्यम् ॥ १ ॥
भवभयहरमार्तत्राणकारं भुवि देवं
भक्तानां भयहरं वन्दे श्रीरामदूतं तम् ।
सकलभुवनजीवात्मानं रामं भजेऽहं
हनुमत्कृपया लभे श्रीरामपादसेवाम् ॥ २ ॥
नानाविधपरितापहरं नामामि रामदूतं तम् ।
सीतान्वेषणतत्परमतुलबलं वायुपुत्रमीडेऽहम् ॥ ३ ॥
रामायणकृतकार्यं रावणमुखदर्पहरमीशम् ।
सीतापतिचरणरतं भजे हनुमतं सदा भक्त्या ॥ ४ ॥
सकलसुखदं शरण्यं भवबन्धविमोचनं मुनीन्द्राणाम् ।
वन्दे श्रीरामदूतं हनुमन्तं सर्वदा शरणम् ॥ ५ ॥
॥ फलश्रुति ॥
यः पठेत् पञ्चरत्नाख्यं स्तोत्रं हनुमत्प्रियम् ।
सर्वान् कामानवाप्नोति श्रीरामकृपया ध्रुवम् ॥
इति श्री हनुमत् पञ्चरत्नं सम्पूर्णम् ॥
सम्पूर्ण पाठ विधि, नियम, शुभ मुहूर्त एवं सावधानियां
श्री हनुमत् पञ्चरत्नम्: Lyrics, Meaning, Benefits & Complete Stotram का श्रद्धापूर्वक नित्य पाठ करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
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