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श्री हनुमान जंजीरा शाबर मंत्र: अर्थ, लाभ और जप विधि

21 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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पौराणिक परिचय, उत्पत्ति एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री हनुमान जंजीरा शाबर मंत्र सनातन धर्म की शाबर साधना परंपरा का एक अत्यंत गूढ़, प्रभावशाली और रहस्यमय मंत्र है। शाबर मंत्र मुख्यतः लोकभाषा, स्थानीय बोली और सरल शब्दों में होते हैं, जिनका उद्देश्य साधक की रक्षा, बाधा निवारण और इष्ट कार्य सिद्धि होता है। यह मंत्र हनुमान जी की वीरता, सेवा, भक्ति और रक्षा शक्ति पर आधारित है। 'जंजीरा' शब्द का अर्थ है 'जंजीर' या 'कवच' — अर्थात् जो साधक को चारों ओर से सुरक्षा प्रदान करे, शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों को बांध दे।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह मंत्र हनुमान जी ने स्वयं अपने भक्तों को वरदान स्वरूप प्रदान किया था। शाबर मंत्र परंपरा में इसे 'सिद्ध मंत्र' माना जाता है, जो गुरु कृपा से ही सिद्ध होता है। हनुमान जी को कलियुग का सर्वश्रेष्ठ देवता माना गया है, क्योंकि वे तुरंत फल देने वाले, भक्तवत्सल और संकटमोचन हैं। जंजीरा शाबर मंत्र उनकी उसी शक्ति का प्रतीक है जो भक्त को हर प्रकार के भय, रोग, शत्रु, जादू-टोना, नजर-दोष और ग्रह बाधाओं से मुक्त करता है।

इस मंत्र का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह मंत्र साधक के भीतर आत्मविश्वास, साहस, धैर्य और भक्ति को जागृत करता है। जब साधक इसे श्रद्धा और विश्वास से जपता है, तो उसके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा स्वतः ही सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित होने लगती है। हनुमान जी की कृपा से साधक को मानसिक शांति, शारीरिक बल, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। शाबर मंत्रों में 'जंजीरा' शब्द का प्रयोग विशेष रूप से रक्षा कवच के लिए किया जाता है, जो साधक को दसों दिशाओं से सुरक्षित रखता है।

यह मंत्र विशेष रूप से उन साधकों के लिए है जो जीवन में बार-बार बाधाओं, शत्रुओं, कर्ज, रोग और पारिवारिक कलह से परेशान हैं। शाबर परंपरा में इसे 'कलियुग का संजीवनी मंत्र' भी कहा जाता है, क्योंकि यह साधक को मानो मृत्यु के मुख से भी बाहर निकाल लाता है। हनुमान जी की भक्ति और शाबर मंत्र की शक्ति का संगम इस मंत्र को अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली बनाता है।

मंत्र का परिचय, ऋषि, देवता एवं बीज तत्व

श्री हनुमान जंजीरा शाबर मंत्र का ऋषि परंपरा के अनुसार 'श्री हनुमान' स्वयं हैं, छंद 'शाबर' (लोकभाषा) है, देवता 'हनुमान जी' हैं, और बीज 'हं' है। इस मंत्र का मुख्य बीज 'हं' हनुमान जी का वीर बीज है, जो साहस, बल और रक्षा का प्रतीक है। 'जंजीरा' शब्द का तात्त्विक अर्थ है 'बंधन' — अर्थात् जो शत्रु को बांधे और भक्त को मुक्त करे।

इस मंत्र में 'ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा' यह वैदिक बीज मंत्र भी समाहित है, जो हनुमान जी को रुद्र का अंश बताता है। शाबर मंत्र में लोकभाषा और संस्कृत का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह मंत्र मुख्यतः ११ या २१ बार जपा जाता है, लेकिन विशेष अनुष्ठान में १०८ बार या १००८ बार भी जप किया जाता है।

तत्वविवरण
ऋषिश्री हनुमान जी
छंदशाबर (लोकभाषा)
देवताहनुमान जी
बीजहं
शक्तिरक्षा, बल, विजय
जप संख्या११, २१, १०८, १००८

सम्पूर्ण मूल मंत्र पाठ, अन्वय एवं शुद्ध उच्चारण

ॐ नमो हनुमंत वीरा, जंजीरा बांधो मेरा।
जंजीरा बांधो चारों ओर, राखो हनुमंत निहोर।
जहाँ जाऊँ तहाँ जयकार, हनुमंत सदा रखवार।
शत्रु मित्र हो जाए, संकट सब मिट जाए।
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ नमो हनुमंत बलवान, जंजीरा करो कल्याण।
जंजीरा बांधो दसों दिशा, हनुमंत रखो मेरा विश्वास।
ॐ श्री हनुमते नमः, जंजीरा शाबर मंत्र सिद्ध करो।
ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा।

अन्वय: हे वीर हनुमान! आप मेरे चारों ओर जंजीरा (रक्षा कवच) बांध दें। मैं आपसे निहोरा करता हूँ कि आप मेरी रक्षा करें। जहाँ-जहाँ मैं जाऊँ, वहाँ आपकी जयकार हो और आप सदा मेरे रखवार बने रहें। मेरे शत्रु मित्र बन जाएं और सभी संकट मिट जाएं। ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा। हे बलवान हनुमान! आप मेरा कल्याण करें। दसों दिशाओं में जंजीरा बांधें और मेरे विश्वास की रक्षा करें। ॐ श्री हनुमते नमः, यह जंजीरा शाबर मंत्र सिद्ध हो।

शुद्ध उच्चारण: 'हं' का उच्चारण हल्के अनुनासिक के साथ करें। 'रुद्रात्मकाय' में 'रु' पर हल्का बल दें। 'हुं फट् स्वाहा' का उच्चारण स्पष्ट और दृढ़ता से करें। मंत्र जप के समय हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सम्मुख बैठें और लाल आसन का प्रयोग करें।

मंत्र का शब्दशः एवं गूढ़ दार्शनिक भावार्थ

ॐ नमो हनुमंत वीरा: 'ॐ' ब्रह्म का प्रतीक है, 'नमो' नमन है, 'हनुमंत' हनुमान जी, 'वीरा' वीरता। अर्थात् हे वीर हनुमान, आपको नमन है।

जंजीरा बांधो मेरा: मेरे चारों ओर रक्षा कवच बांध दें। 'जंजीरा' यहाँ सुरक्षा-चक्र का प्रतीक है।

जंजीरा बांधो चारों ओर, राखो हनुमंत निहोर: चारों दिशाओं में कवच बनाएं और मेरी रक्षा करें। 'निहोर' का अर्थ है विनती।

जहाँ जाऊँ तहाँ जयकार, हनुमंत सदा रखवार: जहाँ भी जाऊँ, वहाँ हनुमान जी की जय हो और वे मेरे रक्षक बने रहें।

शत्रु मित्र हो जाए, संकट सब मिट जाए: शत्रु भी मित्र बन जाएं और सभी संकट दूर हों। यह अहिंसा और सामंजस्य का संदेश है।

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा: यह वैदिक बीज मंत्र है। 'हं' हनुमान का बीज, 'रुद्रात्मकाय' रुद्र के अंश, 'हुं' क्रोध बीज, 'फट्' नाश बीज, 'स्वाहा' अर्पण। अर्थात् हे रुद्रस्वरूप हनुमान, मैं आपको समर्पित हूँ, मेरे शत्रुओं का नाश करें।

ॐ नमो हनुमंत बलवान, जंजीरा करो कल्याण: हे बलवान हनुमान, मेरा कल्याण करें।

जंजीरा बांधो दसों दिशा, हनुमंत रखो मेरा विश्वास: दसों दिशाओं में कवच बनाएं और मेरे विश्वास की रक्षा करें।

ॐ श्री हनुमते नमः, जंजीरा शाबर मंत्र सिद्ध करो: हे श्री हनुमान, यह जंजीरा शाबर मंत्र सिद्ध करें।

दार्शनिक दृष्टि से यह मंत्र साधक को यह सिखाता है कि जब तक भगवान की शरण में नहीं जाते, तब तक जीवन में भय बना रहता है। हनुमान जी की शरण में जाने से साधक निर्भय हो जाता है। 'जंजीरा' का गूढ़ अर्थ है — अज्ञानता की जंजीर को तोड़कर ज्ञान की ओर बढ़ना। यह मंत्र भक्ति, शक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम है।

मंत्र जप विधि, माला, दिशा एवं अनुष्ठान नियम

श्री हनुमान जंजीरा शाबर मंत्र का जप करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें:

  • समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (४:०० से ६:००) या सायंकाल संध्या के समय। मंगलवार और शनिवार इस मंत्र जप के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन हैं।
  • दिशा: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  • आसन: लाल या पीले रंग का आसन, ऊनी या कुशा आसन श्रेष्ठ है।
  • माला: लाल चंदन, मूंगा, या हकीक माला। तुलसी माला भी शुभ है।
  • स्नान: जप से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • संकल्प: हनुमान जी के सम्मुख दीपक और धूप जलाकर संकल्प लें।
  • जप संख्या: नित्य ११, २१ या १०८ बार। विशेष अनुष्ठान में १००८ बार ४१ दिन तक।
  • नैवेद्य: गुड़, चना, केला, बूंदी के लड्डू या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
  • आरती: जप के बाद हनुमान जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
विशेष नियम: जप के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें। मांस, मदिरा, तामसिक भोजन का त्याग करें। मंत्र को गुरु से दीक्षित होकर ही जपें तो अधिक फलदायी होता है। जप के समय मन में हनुमान जी का ध्यान करें।
सावधानी: मंत्र जप कभी भी अशुद्ध अवस्था में न करें। जप के बाद माला को पवित्र स्थान पर रखें। मंत्र का उपयोग किसी को हानि पहुँचाने के लिए न करें, अन्यथा विपरीत फल मिलता है।

मंत्र सिद्धि, फलश्रुति एवं मनोवैज्ञानिक व आध्यात्मिक लाभ

श्री हनुमान जंजीरा शाबर मंत्र की सिद्धि से साधक को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। शास्त्रों और लोक परंपरा के अनुसार, इस मंत्र के नियमित जप से:

भय एवं बाधा निवारण

सभी प्रकार के भय, जादू-टोना, नजर-दोष, ऊपरी बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

शत्रु पर विजय

शत्रु स्वयं मित्र बन जाते हैं या उनकी शक्ति क्षीण हो जाती है। मुकदमे और विवाद में विजय मिलती है।

आर्थिक समृद्धि

कर्ज से मुक्ति, धन-धान्य में वृद्धि और व्यापार में लाभ होता है।

स्वास्थ्य लाभ

रोग, दर्द और शारीरिक कमजोरी दूर होती है। मानसिक तनाव कम होता है।

पारिवारिक सुख

परिवार में प्रेम, एकता और शांति स्थापित होती है। कलह समाप्त होता है।

आध्यात्मिक उन्नति

भक्ति, श्रद्धा और आत्मविश्वास बढ़ता है। मोक्ष की ओर अग्रसर होते हैं।

मनोवैज्ञानिक दृष्टि से यह मंत्र साधक के अवचेतन मन में सकारात्मक ऊर्जा भरता है। 'जंजीरा' शब्द का उच्चारण मस्तिष्क में सुरक्षा की भावना जगाता है। हनुमान जी की भक्ति से साधक में आत्मविश्वास, साहस और धैर्य का संचार होता है। यह मंत्र तनाव, अवसाद और भय को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है।

फलश्रुति: शाबर परंपरा के अनुसार, जो साधक ४१ दिन तक नित्य १०८ बार इस मंत्र का जप करता है, उसके सभी संकट दूर होते हैं। हनुमान जी की कृपा से उसे राजभय, चोरभय, अग्निभय, जलभय और शत्रुभय से मुक्ति मिलती है। अंत में उसे हनुमान जी के सायुज्य की प्राप्ति होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह एक शाबर मंत्र है जो हनुमान जी की रक्षा शक्ति पर आधारित है। 'जंजीरा' का अर्थ है रक्षा कवच। यह मंत्र साधक को चारों ओर से सुरक्षा प्रदान करता है।

नित्य ११, २१ या १०८ बार जप करें। विशेष अनुष्ठान में ४१ दिन तक १०८ बार जप करने से मंत्र सिद्ध होता है।

शाबर मंत्र गुरु कृपा से ही सिद्ध होते हैं। यदि गुरु न मिले तो हनुमान जी को गुरु मानकर श्रद्धा से जप करें। किंतु दीक्षा लेना श्रेष्ठ है।

भय, बाधा, शत्रु, रोग, कर्ज और पारिवारिक कलह से मुक्ति मिलती है। आर्थिक समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

नहीं, शाबर मंत्र केवल रक्षा और कल्याण के लिए हैं। किसी को हानि पहुँचाने के लिए प्रयोग करने से विपरीत फल मिलता है और हनुमान जी अप्रसन्न होते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

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