काल चक्र

हिन्दू पंचांग कैलेंडर

हिन्दू कैलेंडर केवल दिनों की गिनती नहीं है, यह चन्द्रमा की गतियों (Lunar Phases) और ब्रह्मांडीय ऊर्जा संधियों का खगोलीय विवरण है। आने वाले प्रमुख पर्वों, पवित्र एकादशी तिथियों, पूर्णिमा और अमावस्या व्रतों की समय सारणी को विस्तार से जानें।

काल गणना: वैदिक ज्योतिष पंचांग अंग: ५ मुख्य अंग
04 Oct 2026 उत्सव (Festival)

रक्षा बन्धन (Raksha Bandhan)

भाई-बहन के पवित्र प्रेम का महापर्व। बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं।

फलाहार नियम: मिष्ठान्न व शुद्ध सात्विक भोजन। लहसुन-प्याज वर्जित।

हिन्दू पंचांग का वैज्ञानिक आधार (५ मुख्य अंग)

हिन्दू कैलेंडर सौर और चन्द्र दोनों गणनाओं का मिश्रण है (Lunisolar Calendar)। इसके पांच मुख्य अंग होते हैं, जिन्हें मिलाकर **पंचांग** कहा जाता है:

१. तिथि (Tithi)

चन्द्रमा और सूर्य के बीच के अंतर को १२ अंशों के भागों में बांटने से तिथि बनती है। कुल ३० तिथियां होती हैं (१५ शुक्ल पक्ष, १५ कृष्ण पक्ष)।

२. वार (Var)

सप्ताह के ७ दिन जो ७ सौर मंडल ग्रहों के नाम पर आधारित हैं (सोम, मंगल, बुध आदि)।

३. नक्षत्र (Nakshatra)

आकाश मंडल के २७ भागों में से चन्द्रमा आज जिस भाग में गोचर कर रहा है, वह नक्षत्र कहलाता है।

४. योग व ५. करण (Yoga & Karana)

सूर्य और चन्द्रमा के स्थान योग से कुल २७ योग बनते हैं, और तिथि के आधे भाग को 'करण' कहा जाता है (कुल ११ करण होते हैं)।

हिन्दू कैलेंडर शंका समाधान (FAQs)

विक्रम संवत महाराज विक्रमादित्य द्वारा शुरू किया गया था और यह ईसवी सन (Gregorian Calendar) से ५७ वर्ष आगे चलता है। उदाहरण के लिए, यदि वर्तमान में ईसवी सन २०२६ है, तो विक्रम संवत २०८३ होगा।

चन्द्र वर्ष ३५४ दिनों का होता है और सौर वर्ष ३६५ दिनों का। दोनों के बीच ११ दिनों के अंतर को पाटने के लिए हर ३२ महीने (लगभग ३ साल) में चन्द्र पंचांग में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है, जिसे 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहते हैं।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

कैलेंडर तिथि संपादन

भक्तिलोक पंचांग परिषद (Bhaktilok Panchang Council)

वैदिक गणित गणनाओं और स्थानिक गृह गोचर स्थितियों के आधार पर उत्सव और व्रत सूचियां सत्यापित करने वाली विंग।

ज्योतिषीय समीक्षा व सत्यापन

पं. देवदत्त शास्त्री (Pt. Devdutt Shastri)

वाराणसी पंचांग शोध केंद्र के अध्यक्ष। ३५+ वर्षों का वैदिक पंचांग लेखन व संपादन अनुभव।

कैलेंडर तिथियां सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें