स्तोत्र संग्रह (Stotram)

महालक्ष्मी हृदय स्तोत्रम्: धन, सुख और समृद्धि का साधन

23 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

ॐ नमो भगवते महालक्ष्म्यै।

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे।

विष्णुपत्न्यै च धीमहि।

तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।

ॐ ह्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

ॐ ह्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

ॐ ह्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे।

विष्णुपत्न्यै च धीमहि।

तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।

ॐ नमो भगवते महालक्ष्म्यै।

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे।

विष्णुपत्न्यै च धीमहि।

तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।

ध्यानम्

श्रीं ह्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

श्रीं ह्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

श्रीं ह्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

सम्पूर्ण मूल स्तोत्रम् पाठ

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे।

विष्णुपत्न्यै च धीमहि।

तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।

ॐ नमो भगवते महालक्ष्म्यै।

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे।

विष्णुपत्न्यै च धीमहि।

तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।

ध्यानम्

श्रीं ह्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

श्रीं ह्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

श्रीं ह्लीं महालक्ष्म्यै नमः।

धन, सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और सम्पूर्णता की देवी महालक्ष्मी की आराधना के लिए यह स्तोत्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह भक्तों को समृद्धि और धन की प्राप्ति के लिए पढ़ा जाता है।

फलश्रुति

जो व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।

इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

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