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श्री हनुमान साठिका सम्पूर्ण पाठ: अर्थ, विधि और लाभ

22 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री हनुमान साठिका: पौराणिक परिचय, उत्पत्ति एवं आध्यात्मिक महत्व

श्री हनुमान साठिका एक अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारिक हनुमान स्तोत्र है, जिसे साठ श्लोकों में संकलित किया गया है। यह स्तोत्र मुख्य रूप से हनुमान जी की स्तुति, उनके दिव्य गुणों का वर्णन और भक्तों की रक्षा के लिए समर्पित है। 'साठिका' शब्द का अर्थ है 'साठ श्लोकों का समूह'। यह स्तोत्र हनुमान जी के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और इसे संकट, रोग, भय, ग्रह दोष और शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए पढ़ा जाता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्री हनुमान साठिका की उत्पत्ति त्रेतायुग में हुई थी, जब हनुमान जी ने राम जी की सेवा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। कहा जाता है कि जब माता सीता ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया था, तब उन्होंने भक्तों के कल्याण के लिए इस स्तोत्र का वर्णन किया था। कुछ विद्वान इसे तुलसीदास जी द्वारा रचित मानते हैं, जबकि कुछ इसे वेदव्यास जी की रचना बताते हैं। लेकिन इसका मूल स्रोत चाहे जो भी हो, इसका आध्यात्मिक महत्व अपार है।

श्री हनुमान साठिका का पाठ करने से भक्त को हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र न केवल मानसिक और शारीरिक रोगों को दूर करता है, बल्कि आत्मविश्वास, साहस और शक्ति को भी बढ़ाता है। हनुमान जी को 'संकटमोचन' कहा जाता है, और यह स्तोत्र उनकी उसी शक्ति का प्रतीक है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करता है, उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

इस स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व यह है कि यह भक्त को हनुमान जी के चरणों में पूर्ण समर्पण करने की प्रेरणा देता है। हनुमान जी राम जी के परम भक्त हैं, और उनकी भक्ति हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में ही सच्ची शक्ति है। साठिका का पाठ करने से भक्त का मन शुद्ध होता है, बुद्धि तीव्र होती है और आत्मा को शांति मिलती है। यह स्तोत्र कलियुग में विशेष रूप से प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इस युग में हनुमान जी की उपासना सबसे सरल और फलदायी है।

विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्लोक

किसी भी स्तोत्र के पाठ से पूर्व विनियोग, ऋषि, छंद, देवता और ध्यान श्लोक का उच्चारण करना आवश्यक होता है। श्री हनुमान साठिका के पाठ से पूर्व निम्नलिखित विनियोग और ध्यान श्लोक का पाठ करना चाहिए।

ॐ अस्य श्री हनुमान साठिका स्तोत्रस्य।
ऋषिर्वाल्मीकिः।
छन्दोऽनुष्टुप्।
देवता श्री हनुमान्।
बीजं रामनाम।
शक्तिः सीतानाम।
कीलकं लक्ष्मणनाम।
हनुमत्प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।

ध्यान श्लोक:

ध्यायेद् हनुमतं देवं, रामदूतं महाबलम्।
सौम्यं सर्वगुणोपेतं, सर्वशत्रुनिषूदनम्।।

हिंदी अर्थ: जो राम के दूत हैं, महाबली हैं, सौम्य हैं, सभी गुणों से युक्त हैं और सभी शत्रुओं का नाश करने वाले हैं, ऐसे हनुमान जी का ध्यान करें।

इसके बाद करन्यास और अंगन्यास करें। करन्यास में ॐ हनुमते अंगुष्ठाभ्यां नमः, ॐ हनुमते तर्जनीभ्यां नमः, ॐ हनुमते मध्यमाभ्यां नमः, ॐ हनुमते अनामिकाभ्यां नमः, ॐ हनुमते कनिष्ठिकाभ्यां नमः, ॐ हनुमते करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः। इसी प्रकार अंगन्यास में ॐ हनुमते हृदयाय नमः, ॐ हनुमते शिरसे स्वाहा, ॐ हनुमते शिखायै वषट्, ॐ हनुमते कवचाय हुम्, ॐ हनुमते नेत्रत्रयाय वौषट्, ॐ हनुमते अस्त्राय फट्।

सम्पूर्ण मूल स्तोत्रम् पाठ (100% सम्पूर्ण संस्कृत श्लोक)

नीचे श्री हनुमान साठिका के सम्पूर्ण साठ श्लोक दिए गए हैं। इनका पाठ क्रमानुसार करना चाहिए।

श्लोक १
ॐ नमो हनुमते रुद्रवताराय।
अग्निगर्भाय सूर्यकुलाय।
वायुतनयाय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक २
ॐ नमो हनुमते महावीराय।
सर्वदुःखहराय सर्वरोगहराय।
सर्वविघ्ननाशाय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक ३
ॐ नमो हनुमते ब्रह्मचारिणे।
सर्वसिद्धिप्रदाय सर्वसम्पत्प्रदाय।
सर्वकामप्रदाय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक ४
ॐ नमो हनुमते सर्वज्ञाय।
सर्वशक्तिमते सर्वव्यापिने।
सर्वेश्वराय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक ५
ॐ नमो हनुमते सर्वदुःखविनाशाय।
सर्वभयहराय सर्वरक्षाकराय।
सर्वमंगलकराय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक ६
ॐ नमो हनुमते सर्वरोगहराय।
सर्वपापहराय सर्वदोषहराय।
सर्वक्लेशहराय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक ७
ॐ नमो हनुमते सर्वविघ्ननाशाय।
सर्वबाधाहराय सर्वशत्रुनाशाय।
सर्वसंकटहराय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक ८
ॐ नमो हनुमते सर्वसम्पत्प्रदाय।
सर्वऐश्वर्यप्रदाय सर्वविद्याप्रदाय।
सर्वबुद्धिप्रदाय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक ९
ॐ नमो हनुमते सर्वकामप्रदाय।
सर्वमनोरथप्रदाय सर्वसिद्धिप्रदाय।
सर्वसौभाग्यप्रदाय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक १०
ॐ नमो हनुमते सर्वरक्षाकराय।
सर्वमंगलकराय सर्वकल्याणकराय।
सर्वशुभकराय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक ११
ॐ नमो हनुमते सर्वदुःखहराय।
सर्वभयहराय सर्वरोगहराय।
सर्वशोकहराय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक १२
ॐ नमो हनुमते सर्वपापहराय।
सर्वदोषहराय सर्वक्लेशहराय।
सर्वबाधाहराय नमोऽस्तु ते।।

श्लोक १३
ॐ नमो हनुमते सर्वविघ्ननाशाय।
सर्वशत्रुनाशाय सर्वसंकटहराय।
सर्वरक्षाकराय नमोऽस्तु ते।।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 19 Sep 2026

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