🙏 मेरी मैया, तेरो कन्हैया – राधा संग ब्याह करवा दे
(Meri Maiya, Tero Kanhaiya – Radha Sang Byah Karwa De) – बाल लीला भजन
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
मेरी मैया, तेरो कन्हैया,
आज पाँव पूज रयो तेरे।
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥
देख, ब्याह मेरो करवाय दे,
कंगन मेरे बंधवाय दे,
छोटे-छोटे हाथन में,
मेंहदी मेरे लगवाय दे।
मेरो गठबंधन करवाय दे,
धरवाय दे मैया फेरे,
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥
छम-छम डोले री आँगना में,
वो लंबे घूँघट वारी,
घूँघट में से मुस्कावे,
कजरारे नैनन वारी।
वृषभानु की राज-दुलारी,
अरे घर आवेगी मेरे,
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥
जो ब्याह न करावे मेरो,
तेरी गैया नाय चराऊँ,
ले पकड़ लकुटिया तेरी,
मैं तोते न बतराऊँ।
बाबा की सौ मैं खाऊँ,
ए री मैया, जतन बहुत भए तेरे,
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥
सुन मेरे लाडले छैया,
समझावे तेरी मैया,
तू अभी उमर को बारो,
मत ठाने ब्याह की ठैया।
जब लाल बड़ो हो जायगो,
पर वाय देऊँ तेरे फेरे,
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥
🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / ब्रज लोकगीत
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत लोकप्रिय ब्रज लोकगीत बाल कृष्ण की मैया यशोदा से राधा के साथ विवाह करवाने की अनोखी प्रार्थना को दर्शाता है। “मेरी मैया, तेरो कन्हैया, आज पाँव पूज रयो तेरे” – बाल कृष्ण मैया के पैर पूज रहे हैं (अर्थात विनम्रता से प्रार्थना कर रहे हैं)। “राधा संग ब्याह करवा दे, राधा मन भाय गई मेरे” – राधा से मेरा विवाह करवा दो, क्योंकि राधा मुझे बहुत पसंद आ गई है।
पहले अंतरे में – कन्हैया कहता है कि मेरा विवाह करवाओ, मेरे कंगन बंधवाओ, मेरे छोटे-छोटे हाथों में मेंहदी लगवाओ। मेरा गठबंधन (विवाह बंधन) करवाओ और फेरे धरवाओ। यह एक बालक की विवाह के प्रति स्वाभाविक उत्सुकता और नटखटपन है।
दूसरे अंतरे में – राधा का वर्णन: वह आँगन में छम-छम करके डोलती है, लंबा घूँघट डाले हुए, घूँघट में से मुस्कुराती है, काजल लगी आँखों वाली। वह वृषभानु की राज-दुलारी (राजकुमारी) है और मेरे घर आएगी।
तीसरे अंतरे में – बाल कृष्ण की धमकी: यदि तुम मेरा विवाह नहीं करवाओगी, तो मैं तुम्हारी गायें नहीं चराऊँगा, तुम्हारी लकुटी (लाठी) पकड़कर बैठ जाऊँगा, और तोते की तरह बातें नहीं करूँगा। बाबा की सौगंध खा लूँगा – मैया, बहुत प्रयास कर लिए (अब तो मान ही जाओ)।
चौथे अंतरे में – मैया समझाती है: हे मेरे लाडले पुत्र, तू अभी छोटी उम्र का है, विवाह की जिद मत कर। जब तू बड़ा हो जाएगा, तब मैं तेरे फेरे करवा दूँगी।
यह भजन बाल कृष्ण की नटखटपन, राधा के प्रति प्रेम और मैया यशोदा के वात्सल्य का अद्भुत चित्रण है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
राधा-कृष्ण की बाल लीला: यह भजन राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप में विवाह की जिद को दर्शाता है, जो ब्रज की लोक संस्कृति में अत्यंत लोकप्रिय है।
बालक की सरल धमकियाँ: “तेरी गैया नाय चराऊँ” और “तोते न बतराऊँ” – ये धमकियाँ बाल कृष्ण की नटखटपन और मासूमियत को दर्शाती हैं।
मैया यशोदा का वात्सल्य: आखिरी अंतरे में मैया का समझाना – “तू अभी उमर को बारो” – यह वास्तविक माता-पुत्र के संवाद जैसा लगता है।
💖 बाल कृष्ण की नटखट जिद
🎯 संदेश
बाल कृष्ण की यह राधा से विवाह की जिद हमें उनके मानवीय और सरल स्वरूप का दर्शन कराती है। यह भजन वात्सल्य, प्रेम और नटखटपन का अद्भुत मिश्रण है।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन हर उस भक्त के हृदय में बाल कृष्ण की छवि को जीवंत कर देता है। “राधा संग ब्याह करवा दे” की पंक्ति ब्रजवासियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
🙏 जय श्री कृष्ण ।। जय यशोदा नंदन ।। राधा संग ब्याह करवा दे मैया ।।