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Krishna Bhajan

मेरी मैया, तेरो कन्हैया (राधा संग ब्याह करवा दे) बाल लीला भजन लिरिक्स | Meri Maiya Tero Kanhaiya Radha Sang Byah Karwa De Bal Leela Bhajan Lyrics

203 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 मेरी मैया, तेरो कन्हैया – राधा संग ब्याह करवा दे

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Meri Maiya, Tero Kanhaiya – Radha Sang Byah Karwa De) – बाल लीला भजन

🌸 बाल कृष्ण की मैया यशोदा से राधा संग विवाह की अनोखी प्रार्थना – ब्रज का अद्भुत लोकगीत

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / बाल लीला / ब्रज लोकगीत
🎶 भाव: वात्सल्य, बाल सुलभ नटखटपन, राधा-प्रेम
📍 विशेषता: बाल कृष्ण की राधा से विवाह की जिद, मैया यशोदा से मार्मिक विनती
📀 प्रचलन: ब्रज क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय, राधा-कृष्ण की बाल लीला पर आधारित प्रिय भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

मेरी मैया, तेरो कन्हैया,
आज पाँव पूज रयो तेरे।
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥

देख, ब्याह मेरो करवाय दे,
कंगन मेरे बंधवाय दे,
छोटे-छोटे हाथन में,
मेंहदी मेरे लगवाय दे।
मेरो गठबंधन करवाय दे,
धरवाय दे मैया फेरे,
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥

छम-छम डोले री आँगना में,
वो लंबे घूँघट वारी,
घूँघट में से मुस्कावे,
कजरारे नैनन वारी।
वृषभानु की राज-दुलारी,
अरे घर आवेगी मेरे,
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥

जो ब्याह न करावे मेरो,
तेरी गैया नाय चराऊँ,
ले पकड़ लकुटिया तेरी,
मैं तोते न बतराऊँ।
बाबा की सौ मैं खाऊँ,
ए री मैया, जतन बहुत भए तेरे,
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥

सुन मेरे लाडले छैया,
समझावे तेरी मैया,
तू अभी उमर को बारो,
मत ठाने ब्याह की ठैया।
जब लाल बड़ो हो जायगो,
पर वाय देऊँ तेरे फेरे,
राधा संग ब्याह करवा दे,
राधा मन भाय गई मेरे॥

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / ब्रज लोकगीत

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत लोकप्रिय ब्रज लोकगीत बाल कृष्ण की मैया यशोदा से राधा के साथ विवाह करवाने की अनोखी प्रार्थना को दर्शाता है। “मेरी मैया, तेरो कन्हैया, आज पाँव पूज रयो तेरे” – बाल कृष्ण मैया के पैर पूज रहे हैं (अर्थात विनम्रता से प्रार्थना कर रहे हैं)। “राधा संग ब्याह करवा दे, राधा मन भाय गई मेरे” – राधा से मेरा विवाह करवा दो, क्योंकि राधा मुझे बहुत पसंद आ गई है।

पहले अंतरे में – कन्हैया कहता है कि मेरा विवाह करवाओ, मेरे कंगन बंधवाओ, मेरे छोटे-छोटे हाथों में मेंहदी लगवाओ। मेरा गठबंधन (विवाह बंधन) करवाओ और फेरे धरवाओ। यह एक बालक की विवाह के प्रति स्वाभाविक उत्सुकता और नटखटपन है।

दूसरे अंतरे में – राधा का वर्णन: वह आँगन में छम-छम करके डोलती है, लंबा घूँघट डाले हुए, घूँघट में से मुस्कुराती है, काजल लगी आँखों वाली। वह वृषभानु की राज-दुलारी (राजकुमारी) है और मेरे घर आएगी।

तीसरे अंतरे में – बाल कृष्ण की धमकी: यदि तुम मेरा विवाह नहीं करवाओगी, तो मैं तुम्हारी गायें नहीं चराऊँगा, तुम्हारी लकुटी (लाठी) पकड़कर बैठ जाऊँगा, और तोते की तरह बातें नहीं करूँगा। बाबा की सौगंध खा लूँगा – मैया, बहुत प्रयास कर लिए (अब तो मान ही जाओ)।

चौथे अंतरे में – मैया समझाती है: हे मेरे लाडले पुत्र, तू अभी छोटी उम्र का है, विवाह की जिद मत कर। जब तू बड़ा हो जाएगा, तब मैं तेरे फेरे करवा दूँगी।

यह भजन बाल कृष्ण की नटखटपन, राधा के प्रति प्रेम और मैया यशोदा के वात्सल्य का अद्भुत चित्रण है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

राधा-कृष्ण की बाल लीला: यह भजन राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप में विवाह की जिद को दर्शाता है, जो ब्रज की लोक संस्कृति में अत्यंत लोकप्रिय है।

बालक की सरल धमकियाँ: “तेरी गैया नाय चराऊँ” और “तोते न बतराऊँ” – ये धमकियाँ बाल कृष्ण की नटखटपन और मासूमियत को दर्शाती हैं।

मैया यशोदा का वात्सल्य: आखिरी अंतरे में मैया का समझाना – “तू अभी उमर को बारो” – यह वास्तविक माता-पुत्र के संवाद जैसा लगता है।

💖 बाल कृष्ण की नटखट जिद

🎯 संदेश

बाल कृष्ण की यह राधा से विवाह की जिद हमें उनके मानवीय और सरल स्वरूप का दर्शन कराती है। यह भजन वात्सल्य, प्रेम और नटखटपन का अद्भुत मिश्रण है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हर उस भक्त के हृदय में बाल कृष्ण की छवि को जीवंत कर देता है। “राधा संग ब्याह करवा दे” की पंक्ति ब्रजवासियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

🙏 जय श्री कृष्ण ।। जय यशोदा नंदन ।। राधा संग ब्याह करवा दे मैया ।।

॥ इति बाल लीला भजनम् ॥
॥ मेरी मैया, तेरो कन्हैया – राधा संग ब्याह करवा दे, राधा मन भाय गई मेरे ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "मेरी मैया, तेरो कन्हैया (राधा संग ब्याह करवा दे) बाल लीला भजन लिरिक्स | Meri Maiya Tero Kanhaiya Radha Sang Byah Karwa De Bal Leela Bhajan Lyrics" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 04 Sep 2026

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