मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।
(Hare Krishna Govind Mohan Murari) – Krishna Bhajan by Rajjan Ji Maharaj
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
जो किस्मत जगत की बनावे सँवारे,
तो क्यों न चलें हम उन्हीं को पुकारें।
यही मंत्र जपते हैं ऋषि-संत सारे,
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी॥
॥ अंतरा १ – गजेंद्र मोक्ष ॥
नदी में हुई ग्राह-गज की लड़ाई,
पुकारा था गज ने कन्हाई कन्हाई।
तो ब्रजराज आकर के गज को उबारे,
गई आह जब रुक्मिणी के द्वारे॥
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी॥
॥ अंतरा २ – प्रह्लाद-होलिका ॥
है प्रह्लाद की जानते सब कहानी,
उन्हें होलिका जब जलाने को ठानी।
जली होलिका जब मुरारी पधारे,
प्रह्लाद जपते थे अग्नि किनारे॥
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी॥
॥ अंतरा ३ – सुदामा ॥
सुदामा थे निर्धन, प्रभु के पुजारी,
दशा देखकर रो दिए थे मुरारी।
सब कुछ मिला उनको प्रभु के द्वारे,
यही मंत्र जपकर के वो जीवन गुज़ारे॥
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी॥
॥ अंतरा ४ – उपदेश ॥
कहाँ आज तक तू भटकता था राही,
विनय, तुम भी बन जाओ प्रभु के सिपाही।
उबारेंगे राजन को, जो सबको उबारे,
यही मंत्र जपना है रहकर सहारे॥
हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी॥
🎤 गायक :- राजन जी महाराज (Rajjan Ji Maharaj)
✍️ रचनाकार :- प्रचलित भक्ति गीत (अज्ञात)
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत लोकप्रिय कृष्ण भजन “हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी” महामंत्र पर आधारित है। भजन कहता है कि जो इस जगत की किस्मत बनाता और संवारता है, उसी को पुकारना चाहिए। ऋषि-संत यही मंत्र जपते हैं।
भजन में तीन प्रसिद्ध लीलाओं का उल्लेख है – गजेंद्र मोक्ष (ग्राह-गज की लड़ाई में गज को कन्हाई ने बचाया), प्रह्लाद-होलिका (होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए), और सुदामा (निर्धन सुदामा को प्रभु ने सब कुछ दिया)। ये सभी कथाएँ बताती हैं कि जो भी श्रीकृष्ण को सच्चे मन से पुकारता है, वे उसकी रक्षा करते हैं।
अंतिम अंतरा में भक्त को उपदेश दिया गया है – “कहाँ आज तक तू भटकता था राही, विनय तुम भी बन जाओ प्रभु के सिपाही”। राजन (गायक) कहते हैं कि जो सबको उबारता है, वह राजन को भी उबारेगा। यह भजन श्रीकृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और शरणागति का भाव प्रस्तुत करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
हरे कृष्ण महामंत्र का महत्व: यह भजन हरे कृष्ण महामंत्र को केंद्र में रखता है। “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे; हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे” का यह मंत्र कलियुग में सर्वोत्तम साधन माना गया है।
गजेंद्र मोक्ष की कथा: गज (हाथी) जब मगरमच्छ से जूझ रहा था, तो उसने “कन्हाई-कन्हाई” पुकारा और भगवान ने आकर उसे बचाया। यह सिखाता है कि अंत समय में भी सच्ची पुकार व्यर्थ नहीं जाती।
प्रह्लाद और सुदामा: ये दोनों कथाएँ बताती हैं कि भक्ति और निष्काम प्रेम के आगे सब कुछ नतमस्तक हो जाता है। प्रभु अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।
💖 भक्ति रस का संगम
🎯 संदेश
भगवान श्रीकृष्ण ही इस जगत के विधाता और संहारक हैं। उन्हें सच्चे मन से पुकारने से हर संकट दूर होता है। हरे कृष्ण मंत्र का जाप सबसे सरल और सर्वोत्तम साधना है।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन गजेंद्र, प्रह्लाद और सुदामा की कथाओं के माध्यम से दिखाता है कि प्रभु की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है। राजन जी महाराज के स्वर में यह भजन भक्तों को श्रीकृष्ण की शरण में ले जाता है।
🙏 हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे ॥
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "हरे कृष्ण गोविन्द मोहन मुरारी – Hare Krishna Govind Mohan Murari Lyrics in Hindi (Rajjan Ji Maharaj Bhajan)" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।
भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?
इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।
राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?
यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।
क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?
हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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