Radha Kriya Kataksh Stotram सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम (Shree ganesh raksha stotram lyrics in hindi)

श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम का पाठ करें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित गणेश जी के इस शक्तिशाली स्तोत्र के लिरिक्स और अर्थ जानें।

प्रस्तावना एवं परिचय

गणेश की कृपा: श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम का महत्व

इस स्तोत्र द्वारा भक्तों को गणेशजी की आराधना करने और सुरक्षा प्राप्त करने का मार्ग मिल सकता है।

श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम (Shree ganesh raksha stotram lyrics in hindi) - जय गणेश जय गणेश, जय गणेश पाहिमाम,जय गणेश जय गणेश, जय गणेश रक्षितम lजय गणेश जय गणेश, जय गणेश पाहिमाम,जय गणेश जय गणेश, जय गणेश रक्षितम,जय गणेश जय गणेश, जय गणेश रक्षितम lमुदा करात्त मोदकं, सदा विमुक्ति साधकं,कला धरा वतं सकं, विलासि लोक रक्षकम् lअनाय कैक नायकं, विनाशिते भदैत्यकं,नता शुभाशु नाशकं, नमामितं विनायकम् ll जय गणेश llनतेत राति भीकरं, नवो दितार्क भास्वरं,नमत्सुरारि निर्जरं, नताधिका पदुद्धरम् lसुरेश्वरं निधीश्वरं, गजेश्वरं गणेश्वरं,महेश्वरं तमाश्रये, परात्परं निरन्तरम् ll जय गणेश llसमस्त लोक शंकरं, निरस्त दैत्य कुँजरं,दरे तरो दरं वरं वरे, भवक्त्र मक्षरम् lकृपा करं क्षमा करं, मुदा करं यशस्करं,मनस्करं नमस्कृतां, नमस्क रोमि भास्वरम् ll जय गणेश llअकिं चनार्ति मार्जनं, चिरन्त नोक्ति भाजनं,पुरारि पूर्व नन्दनं, सुरारिगर्व चर्वणम् lप्रपंच नाश भीषणं, धनंजयादि भूषणम्,कपोल दान वारणं, भजे पुराण वारणम् ll जय गणेश llनितान्त कान्त दन्त कान्ति, मन्त कान्त कात्मजं,अचिन्त्य रूप মন্তहीन, मन्त राय कृन्तनम् lहृदन्तरे निरन्तरं, वसन्त मेव योगिनां,तमेक दन्त मेवतं, विचिन्त यामि सन्ततम् ll जय गणेश llमहा गणेश पंच रत्न, माद रेण योयानवहं,प्रजल्पति प्रभात के, हृदि स्मरन् गणेश्वरम् lअरोग ताम दोषतां, सुसाहितीं सुपुत्रतां,समाहि तायुरष्ट भूति, मभ्यु पैति सोयाचिरात् ll जय गणेश ll
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम का मुख्य उद्देश्य भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाना है। इस स्तोत्र में गणेशजी की शक्ति, उनकी कृपा और उनके रक्षकों के गुणों का वर्णन किया गया है। प्रारंभ में 'जय गणेश' का उच्चारण भक्त की आराधना को दर्शाता है। यह स्तोत्र यह मांगता है कि गणेशजी अपने भक्तों की रक्षा करें और उन्हें मार्गदर्शन प्रदान करें। इसमें 'मुदा करात्त मोदकं' की पंक्ति यह प्रदर्शित करती है कि गणेशजी केवल सुख देने वाले नहीं हैं, बल्कि वे विमुक्ति यानी मोक्ष के साधक भी हैं। इसी प्रकार, 'नमामितं विनायकम्' नाम का उच्चारण गणेशजी की विनाशकारी शक्तियों का स्मरण कराता है जो बुराइयों को दूर करने के लिए होती हैं। यह स्तोत्र मन की शुद्धता, ग्राहक की संकल्प शक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

इस स्तोत्र में भावार्थ का गहरा अर्थ छिपा हुआ है। 'अकिं चनार्ति मार्जनं' का अर्थ है कि गणेशजी के सामने अपने सभी दुखों का समाधान करना आसान हो जाता है। भक्त जब इस स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो वे मन में एक संतोष और दृढ़ विश्वास महसूस करते हैं कि गणेशजी हर संकट से उन्हें बचाएंगे। 'धनंजयादि भूषणम्' वाक्य यह दर्शाता है कि भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही रूपों में भगवान गणेश का महत्व है। स्तोत्र की हर पंक्ति में भक्त का श्रद्धा और प्रेम झलकता है; यह इशारा करता है कि गणेशजी के माध्यम से ही व्यक्ति अपने जीवन में समस्त अभावों का निवारण कर सकता है।

गणेशजी की पूजा का एक विशेष पक्ष यह है कि वे विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं। इस प्रार्थना में 'नवं दितार्क भास्वरं' का संदर्भ दर्शाता है कि भगवान गणेश सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान करने की क्षमता रखते हैं। यह भक्ति मार्ग का एक अद्भुत उदाहरण है, जहाँ भक्त अपनी प्रार्थनाओं को सच्चे मन से अर्पित करते हैं और भगवान से मार्गदर्शन की अपेक्षा करते हैं। इस प्रकार का संवेदनशीलता भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा एवं मार्गदर्शन का कार्य करती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम का संदर्भ धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर गणेशपुराण और स्कंदपुराण में मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, गणेश भगवान सभी विघ्नों और बाधाओं को दूर करने वाले हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को गणेशजी का आशीर्वाद मिलता है, जो उसे हर प्रकार की बुराई से सुरक्षित रखता है। गणेशजी की पूजा एवं स्तुती करने से न केवल भक्त के जीवन में सुख शांति आती है, बल्कि यह मानसिक और आत्मिक शुद्धता का भी प्रतीक है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम का पाठ करने से मानसिक शांति, तनाव में कमी और आध्यात्मिक वृद्ध‍ि होती है। यह स्तोत्र न केवल भक्ति बल्कि आरोग्य की प्राप्ति का भी साधन है। नियमित पाठ से व्यक्ति में आत्मविश्वास की वृद्धि होती है और कार्यक्षेत्र में सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस स्तोत्र का पाठ प्रात: और संध्या के समय किया जाना चाहिए। पूजा करते समय एक दीपक जलाना, फल या मिठाई का भोग लगाना और गणेश प्रतिमा के सामने बैठकर ध्यान लगाना चाहिए। मन में पूर्ण श्रद्धा और समर्पण लेकर पाठ करें, जिससे भगवान गणेश की कृपा आसानी से प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम का सही समय क्या है?

श्री गणेश रक्षा स्तोत्रम का पाठ प्रात: और संध्या में करना शुभ माना जाता है, जिससे दिनभर की समस्याएं दूर हो सकें।

क्या नियमित पाठ से कोई विशेष लाभ है?

हां, नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और समृद्धि में वृद्धि होती है। यह मन की स्थिरता और व्यस्तता को कम करने में सहायता करता है।

किस प्रकार के भोग गणेशजी को लगाने चाहिए?

गणेशजी को विशेषकर मोदक, मिठाई, और फल का भोग अति प्रिय है। इसके अलवा भक्त को स्वच्छता और पूर्ण श्रद्धा के साथ भोग लगाना चाहिए।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!