मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।
मोहन संग खेले राधा प्यारी बरसाने में होरी
मोहन संग खेलें राधा प्यारी बरसाने में होली
सबके मन भाये दिल में समाये ऐसे सुन्दर जोड़ी
इत नंद गाम के कान्हा हैं और संग ग्वालन की टोली
उत बरसाने की राधा हैं संग में हैं सखियाँ भोली
और अबीर गुलाल भर भर मारे मुखसे मली है रोली
बरसाने में होली...
कांधे कमरिया हाथ लकुटिया, ग्वाल बाल सब आए,
माखन चोर भी आज रंग की, गागर भर कर ले आए
भर भर पिचकारी सब ग्वालों ने सखियाँ ऊपर छोड़ी
बरसाने में होली...
जो भी गावे फाग प्रेम का, वो भी रंग रंग जाए,
राधा-कृष्ण की युगल छवि, उसके मन में बस जाए
सबके के मन भाए दिल में समाये ऐसी सुंदर जोड़ी
बरसाने में होली...
नील-पीत और लाल गुलालों, से अम्बर रंग आया,
भक्तों ने भी है आज प्रेम, गहरा ये रंग चढ़ाया।
‘(अभिराज राघवेंद्र)’ गावें महिमा ऐसी रंगोली होली
बरसाने में होली...
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह प्रसिद्ध होली भजन बरसाने की राधा और नंदगाँव के कान्हा (कृष्ण) के बीच खेली जाने वाली होली का वर्णन करता है। ग्वाल-बाल और सखियाँ रंग-गुलाल, पिचकारी और अबीर के साथ इस उत्सव में शामिल होते हैं। भजन में राधा-कृष्ण की अद्भुत जोड़ी की महिमा गाई गई है – जो सबके मन को भाती है।
अंतिम पंक्तियों में कहा गया है कि जो भी प्रेम से यह फाग (होली गीत) गाता है, वह भी इस प्रेम-रंग में रंग जाता है और उसके मन में राधा-कृष्ण की युगल छवि बस जाती है। यह भजन भक्ति, उल्लास और रंगों के पर्व होली के सार को जीवंत करता है।
🎵 गायक एवं रचनाकार: अभिराज राघवेंद्र
अभिराज राघवेंद्र उत्तर भारत के जाने-माने भक्ति गायक एवं संगीतकार हैं। उनकी शैली में पारंपरिक ब्रज संगीत और आधुनिक माधुर्य का सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिलता है। ‘मोहन संग खेले राधा प्यारी’ उनकी लोकप्रिय प्रस्तुतियों में से एक है, जिसने होली के मौके पर लाखों भक्तों के दिलों में रंग भरा है। उनके द्वारा रचित और गाए गए अनेक भजन ‘भक्ति गंगा’ लेबल पर उपलब्ध हैं।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "Mohan Sang Khele Radha Pyari Barsane Me Hori Lyrics (Holi Bhajan) – मोहन संग खेले राधा प्यारी बरसाने में होरी" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।
भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।
श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?
इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।
राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?
यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।
क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?
हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
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