मोहन संग खेले राधा प्यारी बरसाने में होरी
मोहन संग खेलें राधा प्यारी बरसाने में होली
सबके मन भाये दिल में समाये ऐसे सुन्दर जोड़ी
इत नंद गाम के कान्हा हैं और संग ग्वालन की टोली
उत बरसाने की राधा हैं संग में हैं सखियाँ भोली
और अबीर गुलाल भर भर मारे मुखसे मली है रोली
बरसाने में होली...
कांधे कमरिया हाथ लकुटिया, ग्वाल बाल सब आए,
माखन चोर भी आज रंग की, गागर भर कर ले आए
भर भर पिचकारी सब ग्वालों ने सखियाँ ऊपर छोड़ी
बरसाने में होली...
जो भी गावे फाग प्रेम का, वो भी रंग रंग जाए,
राधा-कृष्ण की युगल छवि, उसके मन में बस जाए
सबके के मन भाए दिल में समाये ऐसी सुंदर जोड़ी
बरसाने में होली...
नील-पीत और लाल गुलालों, से अम्बर रंग आया,
भक्तों ने भी है आज प्रेम, गहरा ये रंग चढ़ाया।
‘(अभिराज राघवेंद्र)’ गावें महिमा ऐसी रंगोली होली
बरसाने में होली...
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह प्रसिद्ध होली भजन बरसाने की राधा और नंदगाँव के कान्हा (कृष्ण) के बीच खेली जाने वाली होली का वर्णन करता है। ग्वाल-बाल और सखियाँ रंग-गुलाल, पिचकारी और अबीर के साथ इस उत्सव में शामिल होते हैं। भजन में राधा-कृष्ण की अद्भुत जोड़ी की महिमा गाई गई है – जो सबके मन को भाती है।
अंतिम पंक्तियों में कहा गया है कि जो भी प्रेम से यह फाग (होली गीत) गाता है, वह भी इस प्रेम-रंग में रंग जाता है और उसके मन में राधा-कृष्ण की युगल छवि बस जाती है। यह भजन भक्ति, उल्लास और रंगों के पर्व होली के सार को जीवंत करता है।
🎵 गायक एवं रचनाकार: अभिराज राघवेंद्र
अभिराज राघवेंद्र उत्तर भारत के जाने-माने भक्ति गायक एवं संगीतकार हैं। उनकी शैली में पारंपरिक ब्रज संगीत और आधुनिक माधुर्य का सुंदर सम्मिश्रण देखने को मिलता है। ‘मोहन संग खेले राधा प्यारी’ उनकी लोकप्रिय प्रस्तुतियों में से एक है, जिसने होली के मौके पर लाखों भक्तों के दिलों में रंग भरा है। उनके द्वारा रचित और गाए गए अनेक भजन ‘भक्ति गंगा’ लेबल पर उपलब्ध हैं।