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साँवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठाणी है (राधा-कृष्ण भजन) लिरिक्स | Sanwario Hai Seth Radha Krishna Bhajan Lyrics

341 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 साँवरियो है सेठ – म्हारी राधा जी सेठाणी है

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Sanwario Hai Seth – Mhari Radha Ji Sethani Hai) – Radha-Krishna Bhajan

🎵 तर्ज: “एक तेरा साथ हम को दो जहां से प्यारा है”

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन / राजस्थानी लोक भजन
🎶 भाव: श्रद्धा, प्रेम, साम्राज्योपमा
📍 विशेषता: कृष्ण-राधा को सेठ-सेठाणी (व्यापारी-पत्नी) रूप में संबोधित करने वाला अद्भुत भजन
📀 प्रचलन: राजस्थानी भाषा में रचित, पूरे उत्तर भारत में राधा-कृष्ण भक्तों में अत्यधिक प्रिय

📜 भजन लिरिक्स (राजस्थानी-हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है।
साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है,
ये सारी दुनिया जानी है॥

॥ अंतरा १ – राजाओं के राजा, महारानी की रानी ॥

राजाओं के राजा,
महारानी की रानी,
सिरमौर मुकुट राजे है।
दरबार निराला,
लगे जोड़ी प्यारी,
राधा के संग साजे है।
सोने पल में सेठ,
सोने पल में सेठ,
सोने पल में सेठाणी है,
ये सारी दुनिया जानी है॥

॥ अंतरा २ – भक्ताँ पे है राजी, करे घणो लाड़ ॥

साँवरिया राधा जी,
भक्ताँ पे है राजी,
करे घणो लाड़ है।
भंडार लुटावे है,
हर बात बनावे है,
भक्ताँ रा ठाठ है।
देवे छप्पर फाड़,
देवे छप्पर फाड़,
नहीं इनसो कोई दानी है,
ये सारी दुनिया जानी है॥

॥ अंतरा ३ – सुख-दुख में साथ, नरसी रो एक काम ॥

सुख-दुख में साँवरिया,
सुख-दुख में राधा जी,
सदा मेरे साथ है।
मेरी चिंता दूर करें,
मेरी विपदा दूर करें,
रख लेवे बात है।
नरसी रो तो एक काम,
नरसी रो तो एक काम,
बस एक हाजरी लगाणी है,
ये सारी दुनिया जानी है॥

साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है।
साँवरियो है सेठ,
म्हारी राधा जी सेठाणी है,
ये तो जाने दुनिया सारी है॥

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा (राजस्थानी भजन)

🗣️ भाषा: राजस्थानी-हिन्दी मिश्रित

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अद्भुत राजस्थानी भजन राधा-कृष्ण को सेठ (व्यापारी) और सेठाणी (व्यापारी पत्नी) के रूप में संबोधित करता है। “साँवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठाणी है” – साँवरियो (श्याम सुंदर कृष्ण) सेठ हैं और राधा जी सेठाणी हैं। भक्त कहता है कि यह बात पूरी दुनिया जानती है।

पहले अंतरे में उनकी भव्यता का वर्णन है – वे “राजाओं के राजा, महारानी की रानी” हैं। उनका दरबार निराला है, और राधा के साथ उनकी जोड़ी अत्यंत प्यारी लगती है। “सोने पल में सेठ, सेठाणी” – वे स्वर्णिम हैं।

दूसरे अंतरे में उनके भक्तों पर अनुग्रह का वर्णन है – “भक्ताँ पे है राजी, करे घणो लाड़ है” (भक्तों पर राजी हैं, बहुत लाड़ करते हैं)। वे भंडार लुटाते हैं, भक्तों की हर बात बनाते हैं। “देवे छप्पर फाड़” – इतनी उदारता से देते हैं कि छप्पर फाड़कर दें। उनसे बढ़कर कोई दानी नहीं।

तीसरे अंतरे में भक्त की भावना है – “सुख-दुख में साँवरिया, सुख-दुख में राधा जी, सदा मेरे साथ है”। वे चिंता और विपदा दूर करते हैं। भक्त (नरसी) कहता है – मुझे तो केवल एक ही काम है, उनकी हाजरी (उपस्थिति) लगानी है।

यह भजन राधा-कृष्ण को अपने घर के स्वामी-स्वामिनी के रूप में स्थापित करता है, जो भक्तों की हर आवश्यकता पूरी करते हैं और सदा उनके साथ रहते हैं।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

सेठ-सेठाणी का संबोधन: इस भजन में कृष्ण-राधा को व्यापारी परिवार के मुखिया के रूप में दर्शाया गया है। “सेठ” का अर्थ है धनी व्यापारी, और “सेठाणी” उनकी धर्मपत्नी। यह भजन उनकी समृद्धि, उदारता और वैभव को दर्शाता है।

भक्तों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति: “भंडार लुटावे है” और “देवे छप्पर फाड़” जैसी पंक्तियाँ राधा-कृष्ण की असीम दानशीलता और भक्तों पर कृपा का बखान करती हैं।

सुख-दुख में साथ का भाव: यह भजन सिखाता है कि राधा-कृष्ण सदा भक्तों के साथ हैं – सुख में भी और दुख में भी। उनकी उपस्थिति ही सबसे बड़ा आशीर्वाद है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

राधा-कृष्ण ही इस संसार के सच्चे स्वामी हैं। उनकी कृपा से भक्त को सब कुछ मिलता है। उनकी हाजरी (सान्निध्य) ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन राधा-कृष्ण के प्रति भक्तों के समर्पण और विश्वास को व्यक्त करता है। वे न केवल देवता हैं, बल्कि हमारे अपने घर के स्वामी, मित्र और संरक्षक भी हैं।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। साँवरियो सेठ की जय ।।

॥ इति राजस्थानी राधा-कृष्ण भजनम् ॥
॥ साँवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठाणी है, ये सारी दुनिया जानी है ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "साँवरियो है सेठ, म्हारी राधा जी सेठाणी है (राधा-कृष्ण भजन) लिरिक्स | Sanwario Hai Seth Radha Krishna Bhajan Lyrics" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 05 Sep 2026

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