🙏 सुन राधिका दुलारी – तेरे द्वार का भिखारी

(Sun Radhika Dulari) – Indresh Upadhyay | Radha Krishna Bhajan

हमें श्याम ना मिला ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: इंद्रेश उपाध्याय
🎶 संगीत: Bpraak, Mir Desai
✍️ गीतकार: रवीन्द्र जैन
🎭 अभिनय: अद्रिजा रॉय
🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन, विरह भजन
💖 भाव: श्याम से मिलन की व्याकुलता

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

सुन राधिका दुलारी,
तेरे द्वार का भिखारी,
तेरे श्याम का पुजारी,
एक पीड़ा है हमारी,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला।।

॥ अंतरा १ ॥

हम सोचते थे कान्हा कही,
कुंजन में होगा,
अभी तो मिलन का हमने,
सुख नहीं भोगा,
सुनके प्रेम की परिभाषा,
मन में बंधी थी जो आशा,
आशा हुई रे निराशा,
झूठी दे गया दिलासा,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला।।

॥ अंतरा २ ॥

देता है कन्हाई जिसे,
प्रेम की दशा,
सब विधि उसकी लेता,
भी है परीक्षा,
कभी निकट बुलाये,
कभी दूरियाँ बढ़ाये,
कभी हंसाये रुलाये,
छलिया हाथ नहीं आये,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला।।

॥ अंतरा ३ ॥

ओ अपना यहाँ जिसे,
कहे सब कोई,
उसके लिए मैं ही,
दिन रात रोई,
नेह दुनिया से तोड़ा,
नाता सांवरे से जोड़ा,
उसने ऐसा मुख मोड़ा,
मुझे कही का ना छोड़ा,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला।।

सुन राधिका दुलारी,
तेरे द्वार का भिखारी,
तेरे श्याम का पुजारी,
एक पीड़ा है हमारी,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला,
हमें श्याम ना मिला।।

🎵 गायक: इंद्रेश उपाध्याय | संगीत: Bpraak & Mir Desai | गीत: रवीन्द्र जैन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह मार्मिक भजन एक भक्त के हृदय की पीड़ा को व्यक्त करता है जो राधिका (राधा) से प्रार्थना करता है कि वह उसकी व्यथा सुने। "सुन राधिका दुलारी, तेरे द्वार का भिखारी, तेरे श्याम का पुजारी" – हे राधिका दुलारी, मैं तेरे द्वार का भिखारी हूँ, तेरे श्याम (कृष्ण) का पुजारी हूँ। "एक पीड़ा है हमारी, हमें श्याम ना मिला" – बस एक ही पीड़ा है कि हमें श्याम नहीं मिले।

"हम सोचते थे कान्हा कहीं, कुंजन में होगा" – हम सोचते थे कि कान्हा कुंज गलियों में होंगे। अभी तो मिलन का सुख हमने भोगा नहीं। प्रेम की परिभाषा सुनकर जो आशा मन में बंधी थी, वह निराशा में बदल गई, और झूठी दिलासा दे गया।

"देता है कन्हाई जिसे प्रेम की दशा, सब विधि उसकी लेता भी है परीक्षा" – जिसे कन्हाई प्रेम की दशा देते हैं, उसकी हर प्रकार से परीक्षा भी लेते हैं। कभी निकट बुलाते हैं, कभी दूरियाँ बढ़ाते हैं, कभी हँसाते हैं तो कभी रुलाते हैं। यह छलिया (चालाक) हाथ नहीं आता।

"ओ अपना यहाँ जिसे कहे सब कोई, उसके लिए मैं ही दिन रात रोई" – जिसे सब अपना कहते हैं, उसी के लिए मैं दिन-रात रोता हूँ। मैंने दुनिया से नेह (प्रेम) तोड़ लिया और साँवरे से नाता जोड़ लिया, फिर भी उसने ऐसा मुँह मोड़ा कि मुझे कहीं का न छोड़ा।

यह भजन उस विरह की व्यथा है जहाँ भक्त ने सांसारिक रिश्ते त्याग कर केवल कृष्ण को अपनाया, फिर भी मिलन नहीं हुआ। वह राधा के द्वार पर भिखारी बनकर खड़ा है और उनसे याचना करता है कि वह उसकी पीड़ा सुने और उसे श्याम मिल जाए।

📖 राधा का द्वार – भक्त की शरण

इस भजन में भक्त राधा के द्वार का भिखारी कहलाने को अपना सौभाग्य मानता है। राधा को कृष्ण की प्रियतमा और कृपा की द्वार माना गया है। भक्त का मानना है कि राधा की शरण में जाने से ही श्याम की प्राप्ति होती है।

गीतकार रवीन्द्र जैन ने इस भजन में विरह की गहरी पीड़ा और श्याम के मिलन की तीव्र लालसा को बड़ी संवेदनशीलता से व्यक्त किया है। इंद्रेश उपाध्याय की आवाज़ और Bpraak-मीर देसाई के संगीत ने इस भजन को भक्तों के दिलों में विशेष स्थान दिलाया है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

💔 विरह की गहरी पीड़ा

यह भजन विरह भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है। भक्त ने सांसारिक सब कुछ त्याग दिया, लेकिन श्याम का मिलन न होने की पीड़ा उसे बेचैन कर रही है।

🙏 राधा के द्वार की भिक्षा

"तेरे द्वार का भिखारी" – भक्त अपने आपको भिखारी कहकर नम्रता और समर्पण का भाव रखता है। उसे कुछ नहीं चाहिए, बस श्याम का दर्शन चाहिए।

🎯 संदेश : श्याम को पाने की तड़प ही सच्ची भक्ति है। राधा के द्वार पर खड़ा भिखारी हर पल पुकारता है कि उसे श्याम मिल जाए। जिसे प्रेम की दशा मिलती है, उसकी परीक्षा भी ली जाती है – कभी निकट, कभी दूर, कभी हँसी, कभी आँसू। पर यह छलिया हाथ नहीं आता। लेकिन राधा की कृपा से ही श्याम मिलते हैं। यह भजन हमें धैर्य, समर्पण और निरंतर पुकार का महत्व सिखाता है।

॥ सुन राधिका दुलारी ॥
॥ तेरे द्वार का भिखारी ॥