gurudev Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

बाबे नानक दा प्रकाश पुरब है आया (Babe nanak da prkaash purab hai aaya Lyrics in Hindi)

बाबे नानक दा प्रकाश पुरब भजन से नानक जी का संदेश, भक्ति का अर्थ और जीवन में आनंद पाने के उपाय जानें।

प्रस्तावना एवं परिचय

बाबे नानक का उज्ज्वल प्रकाश: भक्ति का संदेश

गुरु नानक के प्रकाश को समर्पित इस भजन से भक्ति का संचार करें और जीवन में आनंद का अनुभव करें।

बाबे नानक दा प्रकाश पुरब है आया प्रकाश पुरब दी लख लख बधाई बाबे नानक दा प्रकाश पुरब है आया वजन बधाइयां ,खुशियां छाइयाँ ,आ गए तारनहार। जोत एलाही ने जग विचों ,मेट दिता अन्धकार। सच्चा सतगुरु पीर पातशाह ,सच्च दा करे वपार। कहै 'मधुप' करां की वड्डियाईयां ,गुरु नानक अवतार।। बाबे नानक दा प्रकाश पुरब है आया। सतगुरु नानक दा प्रकाश पुरब है आया। मिट गया अन्धकार ते सारे जग विच चानन छाया।। कल्युग दा उद्धार करन लई ,सतगुरु नानक आया। पिता श्रीमैहता कालू रब्ब दा ,लख लख शुक्र मनाया।। भैंण नानकी वारे जावे ,वीरा घर विच आया। बाबे नानक दा.... ननकाना साहिब विच लीता ,गुरु नानक अवतार। माता तृप्ता दी गोदी विच ,खेड़ रिहा करतार।। देन बधाइयां संगतां आइयाँ,घर घर आनंद छाया।। बाबे नानक दा.... निराकार दी जोत एलाही ,नूर मारे चमकारे। संत भगत जन ख़ुशी मनावन ,बार बार बलिहारे।। धरती दा दुःख दूर करन लई ,तारनहारा आया। बाबे नानक दा.... बाबे नानक नाल ही प्रगटी ,सच्ची गुर दी वाणी। गुरवाणी सुन मिले शान्ति ,शक्ति मिले रूहानी।। दास 'मधुप' कर दर्शन सतगुरु ,सफल बनालो काया। बाबे नानक दा....
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भक्तिगीत में बाबा नानक के प्रकाश का जिक्र है, जो मानवता के उद्धार के लिए आया है। यहीं पर यह कहा गया है कि 'प्रकाश पुरब दी लख लख बधाई', अर्थात् गुरु नानक के अवतार का अभिनंदन, जो मानव जीवन में अंधकार को मिटा कर, एक नयी ज्योति का संचार करता है। 'जोत एलाही ने जग विचों, मेट दिता अंधकार' से यह स्पष्ट होता है कि गुरु नानक जी का उद्देश्य मानवता के लिए ज्ञान और प्रकाश लाना है, जिसके माध्यम से लोग अपने जीवन में धर्म और सच्चाई का अनुभव कर सकें। भजन में यह भी बताया गया है कि 'कलियुग दा उद्धार' करने हेतु नानक जी का आगमन हुआ। यह संदेश हमें यह सिखाता है कि सच्चे गुरु का मार्ग हमेशा सच्चाई और नैतिकता की ओर ले जाता है।

इस भजन के भावार्थ में गहरी भक्ति की गूंज है। 'भगत जन ख़ुशी मनावन, बार बार बलिहारे' इस पंक्ति में भक्तों की खुशी व्यक्त की गई है, जो नानक जी की उपासना करते हैं। जब हम इस जलते प्रकाश को देखते हैं, तो हमारे भीतर भी एक आंतरिक जगमगाहट पैदा होती है। यह भजन न केवल नानक जी के प्रति श्रद्धा प्रकट करता है, बल्कि यह हमें एक दूसरे के प्रति भी प्रेम और भाईचारे की भावना से ओतप्रोत करता है। नानक जी की शिक्षा के अनुसार, 'सच्च दा करे वपार' का अर्थ है सच्चाई का व्यापार करना, जो हमें भक्ति की सच्ची राह पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

गुरु नानक के इस प्रकाशमय अवतार को समर्पित यह भक्तिगीत भक्ति मार्ग की महिमा को समझाता है। 'सच्ची गुर दी वाणी' का उल्लेख हमें याद दिलाता है कि गुरु की वाणी सुनना और उसकी आज्ञा का पालन करना जीवन को एक नई दिशा देता है। भक्ति मार्ग में समर्पण और अहंकार से मुक्ति के बिना वास्तविक ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। यह भजन हमें दैनिक जीवन में सद्गुणों को अपनाने और नकारात्मकता से दूर रहने की प्रेरणा देता है। नानक जी का यह संदेश है कि सच्चाई, प्रेम और करुणा को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व गहरा और व्यापक है, क्योंकि यह गुरु नानक के जीवन और शिक्षाओं का सार प्रस्तुत करता है। पवित्र ग्रंथों में, विशेषकर गुरु ग्रंथ साहिब में, नानक जी की शिक्षाओं को विस्तार से वर्णित किया गया है। उन्होंने मानवता की भलाई के लिए अपने जीवन को समर्पित किया और समाज में भक्ति और समानता का संदेश फैलाया। भगवान की आराधना और गुरु की कृपा से ही मानवता का उद्धार संभव है। इसलिए इस भजन में नानक जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना मात्र कृतज्ञता नहीं, अपितु एक जीवन के सच्चे मार्ग की खोज भी है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन को गाने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की उपलब्धि होती है। यह नन्हे दिलों को नानक जी की शिक्षाओं की ओर आकर्षित करता है और भक्तों में सकारात्मकता का संचार करता है। भक्ति में लिप्त रहने से व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। इसके अलावा, यह भजन सुनने से मन की एकाग्रता बढ़ती है और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह या संध्या समय में किया जा सकता है। भजन करते समय एक शुद्ध चित्त से बैठना चाहिए, और अगर संभव हो तो एक दीया जलाएं और फूलों का चढ़ावा करें। ध्यान केंद्रित करने के लिए एक शांत स्थान चुनें और अपनी भावना को नानक जी की ओर लगाएं। इस भजन का जप करते समय हमें नानक जी की शिक्षाओं पर मनन करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

बाबे नानक दा प्रकाश पुरब भजन का क्या महत्व है?

यह भजन गुरु नानक के प्रकाश के आने और उनके उपदेशों को मनाने का एक माध्यम है, जो जीवन में शांति और ज्ञान लाने वाली है।

क्या इस भजन से मानसिक शांति प्राप्त हो सकती है?

जी हाँ, नानक जी के बताए मार्ग पर चलने से व्यक्ति को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

इस भजन का जप करने का सही समय क्या है?

इस भजन का जप प्रातः या संध्या समय में करना सर्वोत्तम माना जाता है, जिससे भक्ति और ध्यान की भावना में वृद्धि होती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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