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गुरु शरण जो मिल गई होती भजन लिरिक्स (Guru sharan jo mil gai hoti Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

191 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गुरु चरणों की भक्ति: सभी दुखों का समाधान

गुरु की शरण होने से हर प्रकार के संकट का समाधान संभव है। इस भजन को गाकर हम आभार व्यक्त करते हैं।

गुरु शरण जो मिल गई होती, बुरा क्या होता, बुरा क्या होता। गुरु शरण जो मिल गई होती, बुरा क्या होता। सर्वजन हिताय तेरे चरणों में, बुरा क्या होता, बुरा क्या होता। गुरु शरण जो मिल गई होती, बुरा क्या होता। तेरे चरणों में जो चेतना साथ लाए, बुरा क्या होता, बुरा क्या होता। भक्ति से जो प्रेम करें, सज्जन जो बन जाए, बुरा क्या होता, बुरा क्या होता। गुरु शरण जो मिल गई होती, बुरा क्या होता। सर्वजन हिताय तेरे चरणों में, बुरा क्या होता, बुरा क्या होता। गुरु शरण जो मिल गई होती, बुरा क्या होता। कृपा से जो मिले, बुराई जड़ से कट जाए, बुरा क्या होता, बुरा क्या होता। भक्ति से जो प्रेम करें, सज्जन जो बन जाए, बुरा क्या होता, बुरा क्या होता। गुरु शरण जो मिल गई होती, बुरा क्या होता। तेरे प्रेम में जो बहे, बुरा क्या होता, बुरा क्या होता। गुरु शरण जो मिल गई होती, बुरा क्या होता।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन गुरु के प्रति समर्पण और भक्ति को दर्शाता है। 'गुरु शरण जो मिल गई होती' की पंक्तियाँ इस तथ्य की ओर इशारा करती हैं कि जब भक्त अपने गुरु की शरण में आते हैं, तो उनकी सभी कठिनाइयाँ समाप्त हो जाती हैं। गुरु की कृपा से सब कुछ संभव हो जाता है। विशेष रूप से, 'सर्वजन हिताय तेरे चरणों में' पंक्ति इस बात को स्पष्ट करती है कि गुरु का ध्यान सभी के भले के लिए होता है। जब कोई सच्चे मन से गुरु के चरणों में समर्पित होता है, तो वह न केवल अपने लिए बल्कि समाज के लिए भी लाभदायक बनता है।

इस भजन में सद्गुरु की महिमा का गुणगान किया गया है। यह भावार्थ व्यक्त करता है कि गुरु के चरणों की शरण लेने से जीवन में संतोष और सुख की प्राप्ति होती है। 'कृपा से जो मिले, बुराई जड़ से कट जाए' इस वाक्य का अर्थ यह है कि जब भक्त गुरु की कृपा को अनुभव करता है, तो उसके सभी दुःख और दुखदाई अनुभव मिट जाते हैं। गुरु की शरण में आने से व्यक्ति सच्ची भक्ति और प्रेम की अनुभूति करता है, जिससे उसका जीवन सुखमय और शांतिपूर्ण बनता है।

भक्ति मार्ग की यह महिमा बताती है कि सच्चा भक्त अपने गुरु को केवल एक मार्गदर्शक नहीं, बल्कि अपने जीवन का अभिन्न अंग मानता है। यहाँ गुरु का महत्व न केवल ज्ञान और शिक्षा देने में है, बल्कि वे भक्त के लिए एक संरक्षक के रूप में भी कार्य करते हैं। 'तेरे प्रेम में जो बहे' पंक्ति ऐसे भक्तों की भावना को चित्रित करती है, जो गुरु की भक्ति में खोकर भक्ति के सुख को अनुभव करते हैं। यह प्रवृत्ति भक्ति मार्ग को प्रकट करती है, जहाँ भक्त अपने तटस्थता और अज्ञानता को छोड़कर पूर्ण समर्पण और भक्ति की ओर अग्रसर होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में गहराई से छिपा हुआ है। पुराणों, विशेषकर भगवतमहापुराण, में गुरु के महत्व को दर्शाया गया है। वेदों और उपनिषदों में भी गुरु को ज्ञान की प्रकाश स्तम्भ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह मान्यता है कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊँचा होता है, क्योंकि वे हमें आत्मज्ञान की ओर बढ़ाते हैं। इस भजन में गुरु की शरण प्राप्त करने की साधना को व्यक्त किया गया है, जो द्वापर युग से अलग वर्तमान युग में भी प्रासंगिक है।

संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। इस भजन का नियमित जप करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास, और सकारात्मकता की वृद्धि होती है। जब व्यक्ति गुरु की शरण में जाता है, तो उसकी आंतरिक शक्तियाँ जागृत होती हैं, जो उसे हर प्रकार के संकट से उबारने में सहायक होती हैं। यह भजन भक्ति का एक महत्वपूर्ण साधन है, जो भक्‍त को आत्मिक शांति की अनुभूति कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन की साधना सुबह के समय करना अत्यंत लाभकारी है। प्रात: सूर्योदय के समय स्वच्छ विधि से स्नान कर, स्वच्छ स्थान पर बैठकर, दीप जलाना चाहिए। सच्चे मन से गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए इस भजन का उच्चारण करना चाहिए। साधक को पूरी तन्मयता के साथ आसन पर बैठकर ध्यानमग्न होना चाहिए। हर शब्द को भावनाओं के साथ उच्चारित करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मूल संदेश क्या है?

इस भजन का मूल संदेश गुरु की शरण में आने से संपूर्ण दुखों का निराकरण एवं जीवन में सुख पाने की प्रेरणा है।

गुरु की कृपा से क्या प्राप्त होता है?

गुरु की कृपा से भक्त को ज्ञान, शांति, और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है, जो जीवन में सफलता की ओर ले जाता है।

इस भजन का जप करने का सही समय क्या है?

इस भजन का जप प्रात: काल करना सर्वोत्तम होता है, जिससे दिन भर की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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