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श्री एकदन्त स्तोत्रम् (Shri Ekdant Stotram In Hindi) - Ganesh Stotram Ganesh Bhajan by Shubhangi Joshi - Bhaktilok

133 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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गणेश की आराधना में अद्वितीय स्तोत्रम्

श्री एकदन्त स्तोत्रम् का पाठ कर गणेश जी की कृपा प्राप्त करें और जीवन में नश्चय की प्राप्ति करें।

 श्री एकदन्त स्तोत्रम् (Shri Ekdant Stotram In Hindi) -॥ श्री एकदन्त स्तोत्रम् ॥ महासुरं सुशांतं वै दृष्ट्वा विष्णुमुखा: सुरा: ।भ्रग्वादयश्र्च मुनय एकदन्तं समाययु: ।।1।।प्रणम्य तं प्रपूज्यादौ पुनस्तं नेमुरादरात् ।तुष्टुवुर्हर्षसंयुक्ता एकदन्तं गणेश्र्वरम् ।।2।।|| देवर्षय ऊचु:||सदात्मरूपं सकलादिभूतममायिनं सोऽहमचिन्त्यबोधम् ।अनादिमध्यांतविहीनमेकं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।3।।अनन्तचिद्रूपमयं गणेशं ह्मभेदभेदादिविहीनमाद्यम्।हृदि प्रकाशस्य धरं स्वधीस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।4।।विश्र्वादिभूतं ह्रदि योगिनां वै प्रत्यक्षरूपेण विभान्तमेकम् ।सदा निरालम्बसमाधिगम्यं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।5।।स्वबिम्बभावेन विलासयुक्तं बिंदुस्वरूपा रचिता स्वमाया ।तस्या स्ववीर्य प्रददाति यो वै तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।6।।त्वदीयवीर्येण समर्थभूता माया तया संरचितं च विश्र्वम् ।नादत्मकं ह्मात्मतया प्रतीतं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।7।।त्वदीयसत्ताधरमेकदन्तं गणेशमेकं त्रयबोधितारम् ।सेवन्त आपुस्तमजं त्रिसंस्थास्तमेकदन्तं शरणं व्रजाम: ।।8।।ततस्त्वया प्रेरित एव नादस्तेनेदमेवं रचितं जगद्वैतम्।आनन्दरूपं समभावसंस्थं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:।।9।।तदेव विश्र्वं कृपया तवैव सम्भूतमाद्यं तमसा विभातम्।अनेकरूपं ह्मजमेकभूतं तमेकदन्तं शरणं व्रजाम:।।10।।जय जया शुभकर विनायक लिरिक्स (Jaya Jaya Subhakara Vinayaka Lyrics in Hindi) - गणेश अमृतवाणी (Ganesh Amritwani Lyrics In Hindi) -

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री एकदन्त स्तोत्रम् मुख्यतः Lord Ganesh की महिमा का प्रदर्शन कर रहा है। इस स्तोत्र में गणेश जी की अद्वितीयता और उनके स्वरूप को वर्णित किया गया है। पहली श्लोक में यह कहा गया है कि महासुर का नाश कर, सुरों का मार्गदर्शन करने वाले एकदन्त उनका दर्शान करने के बाद मुनियों ने उन्हें नमस्कार किया। यहाँ एकदन्त को सिर्फ एक रूप नहीं, बल्कि अद्वितीय और सर्वव्यापी रूप में दर्शाया गया है। यह हमें बताता है कि गणेश जी सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करते हैं और उनकी उपासना से मानसिक शांति प्राप्त होती है। इस स्तोत्र में उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति का स्वरूप प्रकट होता है, जो साधक के लिए एक अद्भुत अनुभव है।

स्तोत्र में विद्यमान भावार्थ हमें एक गहरे आध्यात्मिक प्रकाश के द्वार पर ले जाता है। यहाँ 'अनादिमध्यांतविहीनमेकं तमेकदन्तं' का उल्लेख करते हुए यह दर्शाया गया है कि गणेश जी बिना प्रारंभ और अंत के हैं, और उन्हें समझना मानव बुद्धि के लिए कठिन है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सच्चे ज्ञान का अनुभव वही कर सकते हैं जो भक्ति में लीन होते हैं। उनकी उपासना से भक्त पर गहरी शांति और मानसिक स्पष्टता का अनुभव होता है, जिससे वह अपनी चिंताओं से मुक्ति पा सकता है। इस प्रकार, एकदन्त की उपासना हमें आत्मिक विकास की ओर अग्रसर करती है।

श्री एकदन्त स्तोत्रम् भक्ति मार्ग को दर्शाता है, जिसमें भक्त अपनी संपूर्ण श्रद्धा के साथ गणेश जी की उपासना करता है। प्रत्येक श्लोक में यह संकेत मिलता है कि ध्यान और समर्पण के साथ गणेश जी में आस्था रखने से भक्ति साधक को अनंत शांति और सच्चे ज्ञान की प्राप्ति होती है। यहाँ 'निरालम्बसमाधिगम्यं' वाक्यांश यह दर्शाता है कि भक्त गणेश की कृपा से अविचल समर्पण और ध्यान में लीन हो सकता है। यह भक्ति का पारंपरिक मार्ग है, जो हमें साधना के गहरे अनुभव की ओर ले जाता है और अंततः मोक्ष की ओर प्रगति करने में सहायक होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्री एकदन्त स्तोत्रम् का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। यह प्रायः पुराणों में गणेश जी की महिमा के साथ संबद्ध किया गया है। गणेश जी को विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है और उनका नाम चारों वेदों में लिया गया है। यह स्तोत्र विष्णु पुराण, शिव पुराण और गणेश पुराण में गणेश जी के अद्वितीय स्वरूप को दर्शाता है। साथ ही, यह भक्तों को उनके जीवन में सकारात्मकता और सफलता की प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है। गर्भाधारण से लेकर नए कार्य की शुरूआत तक, गणेश जी का स्मरण हर स्थिति में किया जाता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। श्री एकदन्त स्तोत्रम् का पाठ करने से अनेक मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से मानसिक शांति और सांत्वना मिलती है। साधक को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य और साहस प्रदान होता है। इसके अतिरिक्त, यह शरीर की ऊर्जा को संतुलित करने में सहायता करता है और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने में मदद करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

श्री एकदन्त स्तोत्रम् का पाठ भक्ति भाव से सुबह या शाम को करना चाहिए। पूजा क्षेत्र में एक दीया जलाना और गणेश जी की प्रतिमा के सामने सफेद फूल या मिठाई oferta करना इच्छित रहता है। उपासना के दौरान मन में भक्ति और श्रद्धा के भाव होना चाहिए। ध्यान मुद्रा में बैठकर स्तोत्र का पाठ करने से अधिक लाभ मिलता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या श्री एकदन्त स्तोत्रम् का पाठ विशेष अवसर पर करना चाहिए?

हां, यह स्तोत्र विशेष अवसरों जैसे गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, या किसी नए कार्य की शुरुआत पर पाठ करना शुभ माना जाता है।

इस स्तोत्र का पाठ करने के लिए कितनी बार करना चाहिए?

इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन एक या तीन बार करने से मन की स्थिरता और गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है।

क्या यह स्तोत्र बच्चों के लिए भी पाठ किया जा सकता है?

हां, यह स्तोत्र बच्चों को भी सुनाना या साथ में पाठ करना चाहिए, इससे उनमें सकारात्मक ऊर्जा और ध्यान की प्रवृत्ति विकसित होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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